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नदी के पेटे में हो गया पार्क और प्लेटफार्म का निर्माण

चित्तौडग़ढ़ की 'गंगाÓ की 'मुस्कानÓ छीनने में जनता के चुने हुए नुमाइन्दों ने भी कसर नहीं छोड़ी। जनता की गाढ़ी कमाई के लाखों रुपए से पार्क और प्लेटफार्म बनाकर गंभीरी का गला घोट दिया।

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चित्तौडग़ढ़ गम्भीरी नदी पुलिया के पास बना पार्क।



चित्तौडग़ढ़. चित्तौडग़ढ़ की 'गंगाÓ की 'मुस्कानÓ छीनने में जनता के चुने हुए नुमाइन्दों ने भी कसर नहीं छोड़ी। जनता की गाढ़ी कमाई के लाखों रुपए से पार्क और प्लेटफार्म बनाकर गंभीरी का गला घोट दिया।
नेताओं के इस 'खेलÓ में दबाव की राजनीति भी जमकर चली। पुलिया से गुजरने वाली हजारों 'आंखोंÓ के सामने गंभीरी की 'देहÓ पर गेंतियां और फावड़े चले, लेकिन इन सब पर 'राजनीतिक आंखेंÓ भारी पड़ गई।
वर्ष २००६ में गंभीरी ने रौद्र रूप दिखाया, इसमें अभिमन्यु पार्क डूबकर तहस-नहस हो गया था, फिर भी नदी के एक तरफ ऊंचाई तक पक्के प्लेटफार्म का निर्माण करवा दिया गया, ताकि विशेष समारोहों में यहां लग्जरी वाहन पार्क किए जा सके। इस निर्माण को लेकर भी विरोध के स्वर सत्ता के कथित दबाव में खामोश हो गए। सरकारी नक्शे में गंभीरी नदी की चौड़ाई १९२ मीटर अंकित है, लेकिन मौके पर चौड़ाई इससे बहुत कम है। इस नदी का उद्गम स्थल समीपवर्ती मध्यप्रदेश में है और चित्तौडग़ढ़ शहर तक लगभग ३८६५ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में जलग्रहण हैं। वहां पर अच्छी बारिश होने पर यहां भी पानी की अच्छी आवक होती है।
१३ साल पहले बना पार्क
तत्कालीन नगर पालिका की ओर से वर्ष २००५ में नदी की जमीन पर अभिमन्यु पार्क का निर्माण करवाया गया था, तब इस पर करीब ५० लाख रुपए खर्च हुए थे। यह पार्क १९ अगस्त २००६ को चित्तौडग़ढ़ में बाढ़ के हालात के दौरान डूब गया था। पार्क नदी में बना होने से यहां कभी भी बच्चे हादसे का शिकार हो सकते हैं। पार्क और प्लेटफार्म बनाने के लिए गंभीरी नदी के दो गेट अवरूद्ध कर दिए गए, जहां से नदी में पानी का बहाव होता था। पार्क और प्लेटफार्म निर्माण के कारण बारिश में होने वाला नदी का बहाव अवरूद्ध होने के कारण तेज हो जाता है और पानी पार्क के ऊपर से निकल जाता है।

यह है नियम
इरिगेशन एण्ड ड्रेनेज एक्ट १९५४ के अनुसार किसी भी प्राकृतिक जल मार्ग को अवरुद्ध नहीं किया जा सकता। यहां तक कि इन मार्गों के साथ छेड़छाड़ करना भी नियम विरुद्ध है।


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