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बांध चित्तौैडगढ़़ में,पानी राजसमन्द में और नियंत्रण भीलवाड़ा जिले में

मातृ़कुण्डिया बांध से जुड़ी विसंगतियां चर्चा मेंचित्तौडग़ढ़ जिले में होकर भी भीलवाड़ा से होता नियंंत्रण मेंबांध का सर्वाधिक पानी जाता राजसमन्द जिले के लिए आरक्षित

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बांध चित्तौैडगढ़़ में,पानी राजसमन्द में और नियंत्रण भीलवाड़ा जिले में

बांध चित्तौैडगढ़़ में,पानी राजसमन्द में और नियंत्रण भीलवाड़ा जिले में


चित्तौडगढ़़. राशमी क्षेत्र में स्थित मातृकुण्डिया बांध जिले की भूमि पर स्थित है। इसके बावजूद यहां विभागीय नियंत्रण चित्तौडग़ढ़ जिले का नहीं होकर जल संसाधन विभाग के भीलवाड़ा जिले के अधिकरियों का है। रोचक तथ्य ये भी है कि बांध चित्तौडग़ढ़ जिले में, नियंत्रण भीलवाड़ा जिले में और यहां के पानी में सर्वाधिक आरक्षित हिस्सा राजसमन्द जिले के दरीबा माइन्स का है। भीलवाड़ा जिले के मेजा बांध के लिए भी यहां से फीडर में छोड़े जाना वाली पानी लाइफलाइन माना जाता है। इस वर्ष अच्छे मानसून के बाद मातृकुण्डिया बांध भी छलक रहा है। बावन गेटो वाले इस बांध के गेट खोल बनास नदी में जल निकासी भी की गर्ई। बांध चित्तौैडग़ढ़ जिले में स्थित होने के बावजूद इसका लाभ यहां कम ही मिल पा रहा है। लाभ तो दूर बांध को किसी तरह की क्षति होने की स्थिति में नुकसान सीधे चित्तौडग़ढ़ जिले को हो सकता एवं बचाव कार्य भी यहां के प्रशासन को ही करने है लेकिन विभागीय स्तर पर यहां से जुड़ी जानकारियां ही चित्तौडग़ढ़ में कम मिलती है।
बांध से कितना पानी किसको
विभागीय अधिकारियों के अनुसार ११८८ एमसीएफटी क्षमता वाले मातृकुण्डिया बांध में सर्वाधिक २१३ एमसीएफटी पानी दरीबा माइंस के लिए आरक्षित है। बांध से ११७ एमसीएफटी पानी भीलवाड़ा जिले के गंगापुर व राजसमन्द जिले के रेलमगरा में जलापूर्ति के लिए आरक्षित रखा गया है। बांध से ५० एमसीएफटी पानी नदी रिचार्ज के लिए बनास नदी में छोड़े जाने का प्रावधान है। इन आरक्षित प्रावधानों के बाद बांध में जो पानी बचता है उसे मेजा फीडर के माध्यम से भीलवाड़ा के मेजा बांध के लिए छोड़े जाने का प्रावधान है।

नंदसमंद भरे तो मातृकुण्डिया में बढ़ती आवक
इस वर्ष मानसून की मेहरबानी के बाद जिले के गंभीरी, बस्सी, घोसुण्डा जैसे कई प्रमुख बांध छलकने लगे तब भी मातृकुण्डिया बांध पूरा नहीं भर पाया था। इसका कारण बांध में पानी की आवक का मुख्य स्रोत राजसमन्द जिले में स्थित नंदसमंद बांध का होना है। नदंसमंद बांध भरने के बाद ही यहां पानी की आवक बढ़ती है।

जिला नियंत्रण कक्ष के पास नहीं होती कोई जानकारी
मातृकुण्डिया बांध चित्तौडग़ढ़ जिले में होने के बाद भी जिला बाढ़ नियंत्रण कक्ष के पास अधिकतर मौके पर इस बांध से जुड़ी कोई जानकारी नहीं मिलती है। मांगे जाने पर यहीं कहा जाता है कि ये बांध भीलवाड़ा जिले के नियंत्रण में आने से सूचना नहीं मिल पा रही है। हालात ये है कि बाढ़ नियंत्रण कक्ष के पास बांध की देखरेख का कार्य संभाल रहे भीलवाड़ा जिले के जल संसाधन विभाग के अभियन्ताओं के नंबर भी उपलब्ध नहीं कराए गए है।

पानी छोडऩे के लिए प्रावधान तय
मातृकुण्डिया बांध से कितना पानी किसको दिया जा सकता इसके लिए प्रावधान बने हुए है। इन प्रावधानों के अनुसार ही पानी छोड़ा जा सकता है। बांध में अच्छा पानी आने पर मेजा फीडर में भी पानी छोड़ा गया है।
धीरज बेनिवाल, कनिष्ट अभियन्ता, मातृकुण्डिया बांध