1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

कुण्ड के पानी में बुलबुले उठने से नाम हुआ भभुका महादेव

चित्तौडग़ढ़. डूंगला. उपखण्ड क्षेत्र के रावतपुरा ग्राम पंचायत के भाणपा के पास हरी भरी पहाडिय़ों के बीच सुरम्य स्थान पर बना हुआ है प्राचीन भभुका महादेव स्थान जहां प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पंहुचते है।

2 min read
Google source verification
कुण्ड के पानी में बुलबुले उठने से नाम हुआ भभुका महादेव

कुण्ड के पानी में बुलबुले उठने से नाम हुआ भभुका महादेव

चित्तौडग़ढ़. डूंगला. उपखण्ड क्षेत्र के रावतपुरा ग्राम पंचायत के भाणपा के पास हरी भरी पहाडिय़ों के बीच सुरम्य स्थान पर बना हुआ है प्राचीन भभुका महादेव स्थान जहां प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पंहुचते है।
चित्तौडग़ढ़ जिले के अंतिम छोर पर उदयपुर जिले से सटा भाणपा गांव है व इसके आसपास करीब 70 फलो में बंटा हुआ है पूरा क्षेत्र। उदयपुर जिले में भीण्डर से कानोड़ के बीच से भभुका महादेव रास्ता जाता हैं जो वहां से करीब छह किमी व डूंगला उपखण्ड मुख्यालय से करीब 20 किमी दूर है। यहां एक हजार वर्ष से अधिक पुराना मंदिर बना हुआ है। मंदिर के पास ही एक छोटा से पानी का कुंड बना हैं उसमें से पानी पास के दूसरे बड़े कुंड में जाता हैं । भाणपा से मंदिर तक जाने का पूरा रास्ता पहाड़ी हैं।
मंदिर के पुजारी लोगर महाराज बताते हैं कि यहां श्रावण मास में प्रतिदिन विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं । वहीं कई भक्त विशेष अनुष्ठान, अभिषेक व हवन आदि करते है। यहां आसपास के आदिवासी क्षेत्र के अलावा चित्तौडग़ढ़, उदयपुर व प्रतापगढ़ जिले के श्रद्धालु भी पंहुचते है। यहां पर मुख्य शिवलिंग है जिसके पांच मुंह है तथा मंदिर में अलग से शिवलिंग की स्थापना की गई है। शिवलिंग पर पीतल का नाग चढ़ाया हुआ हैं। वहीं एक सवा किलो वजनी का चांदी का नाग भी हैं जो विशेष आयोजनों पर चढ़ाया जाता हैं तथा बाद में पुन: सुरक्षित स्थान पर रखा जाता है। मंदिर के पास ही हनुमान जी व रामदेवजी मंदिर बना हुआ हैं वहीं अखण्ड धुणी चलती है। मान्यता हैं कि यहां की मन्नत पूरी होती हैं एवं कोई भी खाली हाथ नहीं जाता है। यहां तीन सरायें व सामुदायिक भवन बना हुआ है।

कुण्ड से प्रकट हुआ शिवलिंग
इस मंदिर की विशेषता हैं कि यहां शिवलिंग कुण्ड से प्रकट हुआ एवं इस कुण्ड का नाम गंगा कुण्ड रखा गया है। कुण्ड का पानी कभी खाली नहीं होता हैं जिससे इसका नाम गंगा कुण्ड रखा गया है। बाद में मंदिर का निर्माण किया गया।

छोटा से कुण्ड, पानी अथाह
इस मंदिर के पास ही एक छोटा से कुण्ड बना हुआ हैं जो कि पांच से छ: फीट गहरा हैं। इस कुण्ड के पानी में बुलबुले उठते रहते हैं जिससे इस स्थान का नामकरण भभुका महादेव है। इस कुण्ड में लगातार जमीन से पानी की आवक होती रहती हैं। इस कुण्ड से पास ही में बने बड़े कुण्ड में लगातार पानी जाता रहता हैं जहां लोग नहाने का आनन्द लेते है। बताया गया कि इस कुण्ड के पानी से कई रोग दुर हो जाते है।

हरियाली बनी आकर्षण-
भाणपा गांव से मंदिर तक पुरा पहाड़ी रास्ता वर्तमान में हरियाली से असच्छादित हैं । मंदिर के पास ही एक एनिकट व तालाब बना हुआ है। मंदिर को विकास की दरकार- यह क्षेत्र आर्थिक रूप से काफी पिछड़ा हुआ हैं एवं इस क्षेत्र के लोग गरीबी में जीवन यापन करते हैं। बताया गया कि यहां लगी हाई मास्क लाईटे भी लम्बे समय से बंद है। इस सम्बंध में ग्राम पंचायत सरपंच ने कहा कि तकनीकी खराबी से लाईटें बंद हैं जो शीघ्र दुरूस्त करवा दी जाएगी।

मंदिर स्थल पर विकास कार्य लगातार जारी हैं
यहां पर सामुदायिक भवन, 5.5 किमी सड़क निर्माण, नाला व पुलिया निर्माण, घाट विस्तारीकरण किया गया व पार्क निर्माण जारी है। आगे भी चरणबद्ध तरीके से विकास करने का प्रयास किया जाएगा।
- ठाकुर सिंह रावत, संरक्षक मंदिर मण्डल एवं सरपंच ग्राम पंचायत रावतपुरा