
नेबुलाइजर पर सख्त हुई सरकार
चित्तौडग़ढ़
सरकार की सख्ती के बाद अब किसी भी अस्पताल, क्लिनिक, नर्सिंग होम में इसका उपयोग नहीं किया जा सकेगा। अस्पतालों के ओपीडी व आइपीडी में जो चिकित्सा कर्मी रोगियों के लिए नेबुलाइजर का उपयोग करते हैं, उन्हें इससे रोका जाएगा। सरकार का मानना है कि नेबुलाइजर में एक ही मॉस्क का उपयोग कई मरीजों के लिए कर लिया जाता है, ऐसे में श्वसन रोगों के संचार का माध्यम हो सकता है। सरकार ने इस संबंध में एजवायजरी भी जारी की है, जिसमें कहा है कि किन्हीं विशेष परिस्थितियों में यदि नेबुलाइजर का उपयोग किया जाता है तो यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक मरीज के लिए अलग-अलग नेबुलाइजर मॉस्क की व्यवस्था हो। मॉस्क का निस्तारण भी बीएमडब्ल्यू के नियमानुसार करना होगा।
आपातकालीन हालात में होता है उपयोग
नेबुलाइजर का उपयोग अमूमन सांस संबंधी समस्याओं में किया जाता है। इसका अधिक उपयोग हड्डियों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। यह वजन बढाने में भी मुख्य कारक होता है। कुछ अन्य रोगों उच्च रक्तचाप, मधुमेह या संक्रमण से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है। खांसी व श्वास संबंधी परेशानी होने पर नेबुलाइजर के उपयोग के समय इसके कंटेनर में एक से दो दवाइयां तरल रूप में डाली जाती है। जब किसी को अस्थमा का दौरा पड़ता है तो उसका उपयोग किया जाता है।
क्या होता है नेबुलाइजर
नेबुलाइजर एक तरह से डिवाइस होता है, जो मेटर्ड डोज इनहेलर (एमआईडी) का बड़ा रूप है। अस्थमा के रोगियों के उपचार में यह काम आता है। यह मुख्य रूप से उन बच्चों के लिए उपयोगी है, जो इनहेलर का ठीक से उपयोग नहीं कर पाते हैं। यह एक खास तरह की मशीन होती है जो भाप के जरिए तरल दवा रोगी की श्वास नलियों तक पहुंचाती है। यह विद्युत और बैटरी चलित दोनों तरह के होते हैं। बैटरी से चलने वाला नेबुलाइजर रोगी यात्रा में अपने साथ ले जा सकते हैं।
ऐसे करता है नेबुलाइजर काम
नेबुलाइजर वायु कंप्रेशर के जरिए दवा को रोगी की श्वास नलियों तक पहुंचाता है। दवा अन्दर जाते ही रोगी को आराम मिलने लगता है।
Published on:
29 Mar 2020 09:02 pm
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