
चित्तौड़गढ़. आषाढ़ मास के गुप्त नवरात्र 6 से 15 जुलाई होंगे। खास बात यह है कि शक्ति की साधना और उपासना का यह पर्व इस बार 9 की बजाए पूरे 10 दिन का होगा। इस अवधि में 9 देवियों के साथ ही दस महाविद्याओं की विशेष पूजा, अराधना भी की जा सकेगी। चतुर्थी तिथि दो दिन (9 व 10 जुलाई) को रहेगी। इसलिए इस बार गुप्त नवरात्र 9 के बजाय 10 दिन की रहेगी। इन दस दिनों में पूजा आराधना के अलावा खरीद, फरोत के लिए भी एक दिन पुष्य नक्षत्र, दो दिन सर्वार्थ सिद्धि और एक दिन भड़लिया नवमी पर समापन दिवस पर अबूझ मुहूर्त रहेगा। नवरात्र के इन दस दिनों मे घरों व देवी मंदिरों में अखंड दीप जला कर मां शक्ति की आराधना की जाएगी। दो गुप्त नवरात्र में पहली माघ व दूसरी आषाढ़ महीने में होती है।
गुप्त नवरात्र के चलते 7 जुलाई को सूर्योदय से 8 जुलाई की सुबह 6.17 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। 9 जुलाई को सूर्योदय से शाम 06.53 बजे तक यही योग रहेगा। पुष्य नक्षत्र योग 7 जुलाई को सूर्योदय से 8 जुलाई की सुबह 6.43 बजे तक रहेगा। नवरात्र के समापन दिवस पर 15 जुलाई को भड़लिया नवमी रहेगी। इन मुहूर्तों में किए गए कार्य सफल होंगे। वहीं खरीद-फरोत करना भी शुभ व मंगलकारी साबित होगा।
ज्योतिषाचार्यों ने बताया कि आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्र में मां दुर्गा, काली के विभिन्न स्वरूपों की उपासना की जाती है। साल में 4 बार नवरात्र होते हैं। पहला चैत्र माह में दूसरा आश्विन माह में मनाए जाने वाले शारदीय नवरात्र होते हैं। दूसरे दो नवरात्र गुप्त रूप से मनाए जाते हैं। यह गुप्त नवरात्र माघ माह और आषाढ़ माह में मनाए जाते हैं। मान्यता है कि इस गुप्त नवरात्र में मां की आराधना करने से दस महाविद्याओं की सिद्धियां प्राप्त होती हैं।
Published on:
27 Jun 2024 04:46 pm
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