
चित्तौडग़ढ़ में वर्ष 1984 में जौहर श्रद्धाजंलि समारोह में निकाली गई शोभायात्रा जौहर स्थल पहुंचने से पहले दुग के हनुमान पोल से गणेश पोल मार्ग से गुजरते हुए। - फाइल फोटो
चित्तौडग़ढ़. आत्मसम्मान व सतीत्च की रक्षा के लिए दुर्ग पर जौहर करने वाली वीरांगनाओं को श्रद्धाजंलि देने के लिए वर्ष 1981 से चेत्र कृष्ण एकादशी को अनवरत हो रहा जौहर श्रद्धाजंलि समारोह गुरूवार को इस बार कोरोना वायरस संक्रमण के खतरे के चलते औपचारिकता रह गया है। इसके बावजूद ये दिन यहां हुए जौहर के इतिहास की याद दिलाने वाला है। चित्तौडग़ढ़ दुुर्ग पर हुए जौहर यहां का गौरवमय इतिहास का अभिन्न अंग है। इस बार जौहर स्मृति संस्थान ने कोरोना वायरस की एडवायजरी को ध्यान में रखते हुए शोभायात्रा व मुख्य समारोह आयोजित नहीं करने का फैसला किया। इसके चलते गुरूवार को दुर्ग पर जौहर स्थल पर सुबह ९ बजे से वीरांगनाओं की स्मृति में केवल यज्ञ-हवन किया जाएगा। इसमें संस्थान के पदाधिकारियों द्वारा आहूतियां दी जाएगी। इस दौरान भी दुर्ग पर प्रवेश बंद किए जाने के दृष्टिगत अधिक भीड़ एकत्रित नहीं हो इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा। जौहर स्मृति संस्थान के अध्यक्ष तख्तसिंह सोलंकी एवं महामंत्री मंगलसिंह खंगारोत के अनुसार हवन से पूर्व सुबह ८ बजे से संस्थान पदाधिकारियों द्वारा विभिन्न स्थानें पर लगी राणा सांगा, गोरा-बादल, जयमल आदि की प्रतिमाओं को श्रद्धाजंलि अर्पित की जाएगी। इस बार समारोह में शामिल होने के लिए उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह, केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्रसिंह शेखावत, पंजाब विधानसभा अध्यक्ष राणा केपी सिंह एवं राजस्थान के उच्च शिक्षा मंत्री भंवरसिंह भाटी की स्वीकृति मिल चुकी थी लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते एनवक्त पर इसे निरस्त करना पड़ा।
चार दशक में चित्तौड़ की पहचान बन गया जौहर मेला
वर्ष १९६८ में जौहर स्मृति संस्थान का पंजीयन हुआ था। इसके बाद चैत्र कृष्ण एकादशी को वर्ष १९८१ से नियमित जौहर मेला आयोजन की शुरूआत हुई। दुर्ग पर जौहर करने वाली वीरांगनाओं को श्रद्धाजंलि देने के लिए चैत्र कृष्ण एकादशी को शोभायात्रा निकालने के साथ जौहर स्थल पर यज्ञ-हवन होता है। इसके बाद फतहप्रकाश प्रांगण में मुख्य श्रद्धाजंलि समारोह होता है। इस आयोजन में अब तक पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर, पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटील, पूर्र्व उप राष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत, पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आड़वाणी, ग्वालियर के सिंधिया परिवार की विजियाराजे सिंधिया, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह,जोधपुर के पूर्व नरेश गजसिंह आदि भी शामिल हो चुके है।
तोपखाना परिसर में हुई थी सभा
दुर्ग के इतिहास की जानकारी रखने वाले कानसिंह सुवावा के अनुसार वर्ष १९९१ में तत्कालीन प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर एवं राजस्थान के मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत आए तो इतनी भीड़ उमड़ी की सभा फतहप्रकाश प्रांगण की बजाय तोपखाना परिसर में करनी पड़ी। जौहर श्रद्धाजंलि समारोह शुरू होने के बाद से हर वर्ष इसके आयोजन में पूरे देश के अलग-अलग क्षेत्रों से लोग शामिल होते रहे है।
वीरांगनाओं की स्मृति में घर पर जलाए एक दीपक
जौैहर श्रद्धाजंलि का कोई सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं होने से संस्थान ने इस बार वीरांगनाओं की स्मृति में हर घर पर शाम को ६.१५ बजे एक दीपक जला श्रद्धाजंलि देने का आह्वान किया है। इस बारे में सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोगों को सूचित करने का प्रयास किया गया है।
चित्तौडग़ढ़ में वर्ष १९८४ में निकाली गई जौहर शोभायात्रा का नजारा।
Published on:
18 Mar 2020 11:09 pm
बड़ी खबरें
View Allचित्तौड़गढ़
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
