
ऋषि मुनियों की तपोस्थली रहा है केलझर महादेव
चित्तौडग़ढ़. चित्तौडग़ढ़ पंचायत समिति के नेतावलगढ़ पांछली ग्राम पंचायत में स्थित है प्राचीन केलझर महादेव मंदिर। केलझर महादेव मंदिर प्राचीन समय में ऋषि मुनियों की तपोस्थली रहा है, यहां की गुफाओं में प्राचीन समय में ऋषि मुनि तप किया करते थे। यहां का मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना है, जब आसपास के गांव भी नहीं थे उससे पहले का यह मंदिर है।
मंदिर में जो शिवलिंग है उसे स्थापित नहीं किया गया है वह प्राकृतिक है, 1993-94 चित्तौडग़ढ़ तत्कालिन एसडीएम रामराय बांगड़ ने यहां पर काफी विकास कार्य करवाएए उसी समय केलझर महादेव मंदिर, हनुमान मंदिर लक्ष्मीनारायण मंदिर पर कलश स्थापना भी की गई। तथा मंदिर की सीढिय़ां, दीवारें , रेलिंगए सराय आदि का कार्य करवाया गया। वर्ष 1994 के बाद यह धार्मिक स्थान धीरे-धीरे लोगों को आकर्षित करने लगा।
1995 में देवस्थान विभाग उदयपुर द्वारा इसे पंजीकृत करवाकर श्री केलझर महादेव सार्वजनिक प्रन्यास ट्रस्ट की स्थापना की गई, मंदिर में सारे कार्य वर्तमान में ट्रस्ट द्वारा करवाए जाते हैं। महाशिवरात्रि पर यहां पर भव्य आयोजन होते हैं, भजन संध्या, भोजन प्रसादी आदि में आसपास के गांवों के सैकड़ों भक्तजन भाग लेते हैं।
केलझर महादेव मंदिर चित्तौडग़ढ़ जिला मुख्यालय से करीब 17 किलोमीटर है तथा घटियावली गांव से यह 3 किलोमीटर ह मंदिर तक पहुंचने के लिए पक्का सड़क मार्ग बना हुआ है, यहां पर हरियाली अमावस्या एवं महाशिवरात्रि के अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं मंदिर के ऊपर 2 कुंड बने हुए हैं, वही मंदिर के नीचे सीढियो के पास तीन पानी के कुंड बने हुए हैंए इन सभी कुंड में वर्ष पर्यंत पानी रहता है। मंदिर के नीचे सीढिय़ो के पास ही करीब 50 वर्ष पूर्व में यहां पर पूजा करने वाले नरसिंहदास महाराज की समाधि बनी हुई है, उनके समीप ही दो समाधि महाराज की बनी हुई है।
अरावली पर्वत शृंखला की हरी-भरी पहाडिय़ों में स्थित होने के कारण यह बहुत ही रमणीय स्थल है, धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से केलझर महादेव में प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
Published on:
02 Aug 2021 10:09 pm
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