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इस नवरात्र दुर्लभ योग संयोग में की जाएगी माँ दुर्गा की उपासना

चित्तौडग़ढ़. ङ्क्षहदू धर्म में नवरात्रि आध्यात्मिक महत्व है और ङ्क्षहदू वर्ष में 4 बार नवरात्र का पर्व मनाया जाता है, इनमें से 2 गुप्त नवरात्र होती हैं और 2 प्रत्यक्ष नवरात्र होती हैं। ङ्क्षहदू नववर्ष की शुरुआत ही चैत्र नवरात्र से होती है जो कि इस बार 22 मार्च से प्रारंभ होकर 30 मार्च को रामनवमी के दिन समाप्त हों

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इस नवरात्र दुर्लभ योग संयोग में की जाएगी माँ दुर्गा की उपासना

इस नवरात्र दुर्लभ योग संयोग में की जाएगी माँ दुर्गा की उपासना

चित्तौडग़ढ़. ङ्क्षहदू धर्म में नवरात्रि आध्यात्मिक महत्व है और ङ्क्षहदू वर्ष में 4 बार नवरात्र का पर्व मनाया जाता है, इनमें से 2 गुप्त नवरात्र होती हैं और 2 प्रत्यक्ष नवरात्र होती हैं। ङ्क्षहदू नववर्ष की शुरुआत ही चैत्र नवरात्र से होती है जो कि इस बार 22 मार्च से प्रारंभ होकर 30 मार्च को रामनवमी के दिन समाप्त होंगी।
ङ्क्षहदू पंचाग के आधार पर ज्योतिर्विद डॉ संजय गील के अनुसार इस बार चैत्र नवरात्र के प्रथम दिवस पर बेहद शुभ संयोगों का दुर्लभ संयोग बन रहा है । साथ ही इस वर्ष चैत्र नवरात्र पर मां दुर्गा का आगमन नौका पर हो रहा है, जिसे सुख-समृद्धि कारक कहा जाता है ।
चैत्र नवरात्र पर शुभ संयोग
इस बार चैत्र नवरात्रि पर्व का आगमन बेहद शुभ योग में हो रहा है, क्योकि इस दिवस पर चैत्र प्रतिपदा तिथि की शुरुआत ब्रह्म योग में हो रही है साथ ही शुक्ल योग भी बनेगा वही चैत्र नवरात्रि के पहले दिन यानी कि प्रतिपदा तिथि पर ब्रह्म योग सुबह 9 बजकर 18 मिनट से शुरू हो जाएगा जो कि 23 मार्च तक रहेगा। इसी प्रकार 21 मार्च को सुबह 12 बजकर 42 मिनट से शुरू होकर 22 मार्च तक शुक्ल योग भी रहेगा ।
फिर ब्रह्म योग के बाद इंद्र योग का निर्माण भी होने जा रहा है। ङ्क्षहदू पंचांग के अनुसार इन नवरात्र पर ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति बेहद खास है, जो 110 वर्ष पश्चात बन रही है. नवरात्र के दौरान शनि और गुरु अपनी स्वराशि में रहेंगे। शनि कुंभ में और गुरु मीन राशि में मौजूद रहेंगे। इसके अलावा चार महत्वपूर्ण ग्रह गोचर भी होंगे।

नवरात्र घट स्थापना मुहूर्त
22 मार्च को प्रतिपदा तिथि सुबह 8 बजकर 20 मिनट तक ही है अत: 8 बजे से पहले ही घट स्थापना यानी कलश स्थापना अत्तिउत्तम है । 22 मार्च को कलश स्थापना का मुहूर्त सुबह 06 बजकर 29 मिनट से सुबह 07 बजकर 39 मिनट तक है। (अवधि - 01 घण्टा 10 मिनट)

तिथि अनुसार देवी पूजा
प्रथम दिवस 22 मार्च 2023 ,बुधवार: मां शैलपुत्री पूजा (घटस्थापना)
दूसरा दिवस 23 मार्च 2023 ,गुरुवार: मां ब्रह्मचारिणी पूजा
तीसरा दिवस 24 मार्च 2023 ,शुक्रवार: मां चंद्रघंटा पूजा
चौथा दिवस 25 मार्च 2023 ,शनिवार: मां कुष्मांडा पूजा
पांचवां दिवस 26 मार्च 2023 ,रविवार: मां स्कंदमाता पूजा
छठवां दिवस 27 मार्च 2023, सोमवार: मां कात्यायनी पूजा
सातवं दिवस 28 मार्च 2023 ,मंगलवार: मां कालरात्रि पूजा
आठवां दिवस 29 मार्च 2023, बुधवार: मां महागौरी
9वां दिवस 30 मार्च 2023 ,गुरुवार: मां सिद्धिदात्री


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