
खून की कमी से जूझ रही दस हजार से ज्यादा प्रसूताएं
चित्तौडग़ढ़. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में पंजीकृत १० हजार ९४ प्रसूताओं में हिमोग्लोबिन की मात्रा निर्धारित से कम पाई गई है। जबकि ६४९ प्रसूताओं में तो इसकी मात्रा सिर्फ सात ग्राम ही पाई गई है। खानपान में संतुलित आहार की कमी से यह समस्या सामने आ रही है। प्रसव के समय प्रसूता के खून में हिमोग्लोबिन की मात्रा ११ ग्राम से अधिक होनी चाहिए।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में जिले में कुल १४ हजार ६५६ प्रसूताओं का पंजीयन किया गया था, जिनके रक्त की जांच में १० हजार ९४ प्रसूताओं में हिमोग्लोबिन की कमी पाई गई। इनके अलावा ६४९ प्रसूताओं के रक्त में हिमोग्लोबिन की मात्रा सिर्फ सात ग्राम ही पाई गई, जो बहुत ही कम है। हालाकि इन महिलाओं में इंजेक्शन या दवाइयों के जरिए हिमोग्लोबिन की मात्रा बढाने के चिकित्सकीय प्रयास किए जाते हैं। विभाग की ओर से शहरी यूनिट में १२१५ प्रसूताओं का पंजीयन किया गया, इनमें ८८९ प्रसूताओं में हिमोग्लोबिन कम पाया गया। जबकि ३९७ प्रसूताओं में हिमोग्लोबिन की मात्रा सिर्फ सात या इससे कम पाई गई। निम्बाहेड़ा क्षेत्र में २०३८ प्रसूताओं में से १३५३ में खून की कमी पाई गई और १०१ में हिमोग्लोबिन की मात्रा सात और इससे कम पाई गई। बड़ीसादड़ी में १०९० में से ७६३ में खून की कमी पाई गई और ४ में अत्यधिक रक्ताल्पता पाई गई। बेगूं में १३३६ में से ९१५ में रक्ताल्पता और ६ में अत्यधिक रक्ताल्पता पाई गई। भदेसर में ११३३ में से ६१४ में खून की कमी पाई गई और ८ प्रसूताओं में इसकी अत्यधिक कमी पाई गई। भूपालसागर में ७७२ में से ५४२ प्रसूताओं में रक्ताल्पता और २ में अत्यधिक रक्ताल्पता पाई गई। चित्तौडग़ढ़ में १९५३ प्रसूताओं का पंजीयन हुआ, इनमें १४१५ प्रसूताएं खून की कमी से ग्रसित पाई गई जबकि ४२ में हिमोग्लोबिन की अत्यधिक कमी पाई गई। डूंगला में १०३३ में से ८९१ प्रसूताओं में रक्ताल्पता व ६ में खून की अत्यधिक कमी पाई गई।
गंगरार क्षेत्र में पंजीकृत ९२९ प्रसूताओं में से ३६८ में रक्ताल्पता पाई गई। कपासन क्षेत्र में १०८६ में से ९६५ में खून की कमी और ४१ में अत्यधिक खून की कमी पाई गई। राशमी क्षेत्र में पंजीकृत ८३६ प्रसूताओं में से ५७३ में खून की कमी पाई गई। जबकि ३१ प्रसूताओं में हिमोग्लोबिन की मात्रा सात या इससे कम पाई गई। रावतभाटा क्षेत्र में १२३५ में से ८०६ में खून की कमी और ३१ में हिमोग्लोबिन की मात्रा अत्यधिक कम पाई गई।
इसलिए होती है खून की कमी
प्रसूति रोग विशषज्ञ डॉ. हेमलता के अनुसार पोषक तत्वों की कमी, चालीस से पैंतालीस की उम्र के बाद, हारमोंस संबंधी बीमारी, अधिक बार प्रसव होने जैसे कारणों से महिलाओं में खून की कमी की समस्याएं आती है। इन बातों का ध्यान रखकर चिकित्सकीय सलाह से दवा के जरिए इस समस्या से निजात पाई जा सकती है।
ऐसे होता है उपचार
प्रसव पूर्व जांच में प्रसूताओं के खून में हिमोग्लोबिन की मात्रा का पता लगा लिया जाता है। जिन प्रसूताओं में खून की कमी होती है उन्हें आयरन सुक्रोज इंजेक्शन लगाकर हिमोग्लोबिन की मात्रा बढाने के प्रयास किए जाते हैं। इसके अलावा जिन प्रसूताओं के खून में हिमोग्लोबिन की मात्रा सात या इससे कम पाई जाती है, उन्हें खून चढाने की व्यवस्था की जाती है। हिमोग्लोबिन की जांच सब सेंटर स्तर तक भी उपलब्ध है।
Published on:
11 Nov 2021 10:51 pm
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