
राजकीय कन्या महाविद्यालय चित्तौडग़ढ़
चित्तौडग़ढ़. बालिकाओं को शिक्षा देने एवं उच्च शिक्षा प्राप्ति के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही है। वहीं दूसरी तरफ जिले के एक मात्र राजकीय कन्या महाविद्यालय में पढऩे के लिए बालिका का नामांकन तो बढ़ा लेकिन उनको पढ़ाने वाले ही नहीं है। कहने को तो सरकार ने कॉलेज में पढ़ाने के लिए व्याख्याताओं के पद स्वीकृत कर रखे है। लेकिन हकीकत में यहां आधे से भी ज्यादा पद रिक्त चलने से जिससे बालिकाओं का शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। गल्र्स कॉलेज में 18 व्याख्याता के पद स्वीकृत हैलेकिन 11 पद रिक्त चल रहे है। राज्य सरकार ने 2018-19के बजट में गल्र्स कॉलेज को पीजी करने की घोषणा तो कर दी है लेकिन किस विषय में पीजी किया इस अभी तक कॉलेज प्रशासन के पास आदेश नहीं आया है।
जिले में गल्र्स कॉलेज की शुरुआत लगभग 23 साल पहले 1995 में आट्र्स और कॉमर्स विषय के साथ हुई थी। वहीं २०१० में यहां विज्ञान विषय भी खोल दिया। लेकिन अभी एक बार सरकार द्वारा सीटों में बढ़ोतरी नहीं की गई। जिससे हर साल यहां बालिका प्रवेश लेने से वंचित रह जाती है। गल्र्स कॉलेज में पुस्तकालय अध्यक्ष का एक पद स्वीकृत है वो भी रिक्त चल रहा है। इसी तरह शारीरिक शिक्षक का भी पद स्वीकृत है जो भी रिक्त है। कला संकाय में कुल १० पद स्वीकृत जिसमें कार्यरत चार पद है छह पद रिक्त चल रहे है। वाणिज्य संकाय में तीन पद स्वीकृत जिसमें एक पद रिक्त चल रहा है। विज्ञान संकाय में पांच पद स्वीकृत है जिसमें से तीन पद रिक्त चल रहे है।
संविदा व्याख्याता कराते कोर्स
कार्यवाहक प्राचार्य एलएल शर्मा ने बताया कॉलेज में व्याख्याताओं की कमी के चलते संविदा पर व्याख्याताओं को लगाकर कोर्स पूरा कराया जाता है। कॉलेज की विकास समिति से शिक्षण सत्र के दौरान चार माह के लिए संविदा पर व्याख्याताओं को लगाया जाता है।
छह माह से कॉलेज मुखिया का ही पद रिक्त
यहां व्याख्याताओं के पद को रिक्त चल ही रहे लेकिन यहां तो प्राचार्य का ही पद पिछले छह माह से रिक्त चल रहा है। ऐसे में अभी प्राचार्य का कार्यभार एलएल शर्मा संभाल रहे है लेकिन जब कार्यवाहक प्राचार्य शर्मा नहीं होते तक कॉलेज की प्रशासनिक व्यवस्था की जिम्मेदारी भी व्याख्याता पर जाती है क्योंकि यहां पर उपप्राचार्य का का पद तो है लेकिन वो सिर्फ यहां कागजों में चल रहे है उनको प्रतिनियुक्त पर राजकीय महाविद्यालय लसाडिय़ा उदयपुर लगा रखा है। जिससे यहां शिक्षण कार्य प्रभावित होता है।
गत साल ९९ फीसदी रहा रिजल्ट
व्याख्याताओं कमी होने के बाद भी गत साल यहां ९९ फीसदी रिजल्ट रहा। वहीं पिछले सात साल भी यहां कहां का परिणाम ९५ फीसदी से ज्यादा ही रहा है।सत्र ११-१२ में ६४७ बालिका परिणाम ९६.९१, सत्र १२-१३ में ६८४ बालिका परिणाम ९७.५०, १३-१४ में ७०० बालिका परिणाम ९८.२८, १४-१५ में ६९५ में बालिका परिणाम ९०.००, १५-१६ में ७१२ बालिका परिणाम ९६.७७ फीसदी रहा।गत साल ८३० बालिकाओं का नामांकन था जो इस साल बढ़कर ८९९ हो गया ।
Published on:
21 Feb 2018 12:49 pm
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