
मछलियां और मृत मगरमच्छ, एआई की मदद से तैयार प्रतीकात्मक तस्वीर
चंबल की लहरों और जलीय जीवों के लिए सुरक्षित माने जाने वाले गांधीसागर बैकवाटर में इन दिनों 'मौत का करंट' दौड़ रहा है। पश्चिम बंगाल से आए शातिर तस्करों ने ज्यादा मुनाफे के लालच में जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को तहस-नहस करने का खौफनाक खेल शुरू किया है। ये तस्कर पानी में बिजली का करंट छोड़कर मछलियों का शिकार कर रहे थे, लेकिन इस अवैध कृत्य की चपेट में आकर बेजुबान मगरमच्छ भी अपनी जान गंवा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि गांधी सागर का बड़ा हिस्सा राजस्थान के कोटा, चित्तौड़गढ़ और एमपी के मंदसौर में स्थित है। चित्तौडगढ़ में रावतभाटा इलाके में एक्शन लिया गया है।
नाहलगढ़ पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पश्चिम बंगाल के तीन तस्करों—सुजान विश्वास, देवव्रत विश्वास और सुकांत सरकार को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी पिछले दो महीने से इलाके में सक्रिय थे। इनके पास से हाई-वोल्टेज यूपीएस बैटरी, तार और करंट प्रवाहित करने वाले उपकरण बरामद हुए हैं। जांच में सामने आया कि ये तस्कर करंट के जरिए भारी मात्रा में मछलियां मारकर उन्हें इंदौर जैसे बड़े शहरों के बाजारों में ऊंचे दामों पर सप्लाई करते थे।
गांधीसागर में अवैध शिकार का यह काला धंधा तब उजागर हुआ, जब बैकवाटर के किनारे एक विशालकाय मगरमच्छ मृत अवस्था में मिला। स्थानीय लोगों और पुलिस को पहले सामान्य मौत का अंदेशा था, लेकिन जब किनारे पर बड़ी संख्या में मरी हुई मछलियां और करंट के उपकरण दिखे, तो हड़कंप मच गया। तस्करों की इस 'खतरनाक तकनीक' से न केवल मछलियां, बल्कि कछुए और मगरमच्छों जैसे संरक्षित जीवों के अस्तित्व पर भी संकट मंडरा रहा है।
हैरानी की बात यह है कि गांधीसागर में मछली पकड़ने का ठेका दो महीने पहले ही निरस्त किया जा चुका है। इसके बावजूद ये तस्कर नियमों को ताक पर रखकर प्रतिबंधित क्षेत्र में शिकार कर रहे थे। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के तार अंतरराज्यीय तस्करी गिरोह से जुड़े हो सकते हैं। नाहरगढ़ थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मत्स्य अधिनियम और चोरी की धाराओं में मामला दर्ज किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पानी में करंट छोड़ने से न केवल वर्तमान जलीय जीव मरते हैं, बल्कि पानी की उर्वरता और सूक्ष्म जीवों पर भी बुरा असर पड़ता है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है कि आखिर इन तस्करों को स्थानीय स्तर पर कौन संरक्षण दे रहा था।
Published on:
18 Apr 2026 10:59 am
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