
वीबी-जी रामजी स्कीम में लेबर घोटाला, पत्रिका फोटो
Ghost Labour Scam: राजस्थान में विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार आजीविका मिशन - ग्रामीण (VB-G RAM G) अब केवल रोजगार की गारंटी नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की गारंटी बनता जा रहा है। सरकार का दावा है कि डिजिटल हाजिरी और यूनिक आईडी से फर्जीवाड़ा खत्म हो गया है, लेकिन बेगूं की पारसोली पंचायत ने इन दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। यहां एक श्रमिक उदयपुर के लग्जरी होटल में बैठकर वेटर की नौकरी कर रहा है, जबकि चित्तौड़गढ़ के सरकारी रिकॉर्ड में वह चिलचिलाती धूप में तगारी उठा रहा है।
अमरपुरा गांव में चारागाह विकास (खसरा नं. 134) के नाम पर मस्टररोल संख्या 183 में सरकारी धन की खुली लूट मची है। पड़ताल में सामने आया कि मौके पर केवल एक श्रमिक, रामेश्वरलाल धाकड़ मौजूद है, जो पिछले आठ महीनों से अकेला ही पूरी साइट की चौकीदारी कर रहा है। रिकॉर्ड में दर्ज अन्य दो श्रमिक केवल कागजी भूत बनकर पैसा निकाल रहे हैं।
नंदलाल बोला:'मैं तो उदयपुर में हूं, गांव में हाजिरी कैसे लग रही, पता नहीं'
इस फर्जीवाड़े का सबसे बड़ा सबूत श्रमिक नंदलाल मीणा है। पत्रिका ने जब उससे संपर्क किया, तो उसने साफ स्वीकार किया कि वह उदयपुर के एक होटल में कार्यरत है। अब सवाल यह है कि अगर श्रमिक 150 किमी दूर उदयपुर में है, तो नरेगा मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम पर उसकी 'जियो-टैग्ड' फोटो कौन और कैसे अपलोड कर रहा है?
पत्रिका और अन्य माध्यमों ने पहले भी पारसोली में रात के अंधेरे में फोटो अपलोड करने और पुरानी सड़कों पर नया बजट ठिकाने लगाने के मामले उजागर किए थे। हर बार जांच का झुनझुना थमाया गया। सख्त कार्रवाई न होना ही इस भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी खाद है।
यह केवल एक श्रमिक का मामला नहीं, बल्कि टैक्सपेयर्स के पैसे की डकैती है। जिला प्रशासन को चाहिए कि
इस मस्टररोल के भुगतान पर तुरंत रोक लगाकर रिकवरी की जाए। झूठ बोलने वाले ग्राम विकास अधिकारी और फर्जी फोटो अपलोड करने वाले मेट पर एफआईआर दर्ज हो। पूरे ब्लॉक के मस्टररोल्स का थर्ड-पार्टी ऑडिट करवाया जाए।
Updated on:
16 Apr 2026 10:58 am
Published on:
16 Apr 2026 10:57 am
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