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Rajasthan: वीबी जी-राम-जी योजना में ‘घोस्ट लेबर’ घोटाला! होटल के वेटर को दिखाया लेबर, ऐप से फर्जीवाड़ा

Ghost Labour Scam: राजस्थान में विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार आजीविका मिशन - ग्रामीण (VB-G RAM G) अब केवल रोजगार की गारंटी नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की गारंटी बनता जा रहा है।

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चित्तौड़गढ़

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Anand Prakash Yadav

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संदीप सुराणा

Apr 16, 2026

वीबी-जी रामजी स्कीम में लेबर घोटाला, पत्रिका फोटो

वीबी-जी रामजी स्कीम में लेबर घोटाला, पत्रिका फोटो

Ghost Labour Scam: राजस्थान में विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार आजीविका मिशन - ग्रामीण (VB-G RAM G) अब केवल रोजगार की गारंटी नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की गारंटी बनता जा रहा है। सरकार का दावा है कि डिजिटल हाजिरी और यूनिक आईडी से फर्जीवाड़ा खत्म हो गया है, लेकिन बेगूं की पारसोली पंचायत ने इन दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। यहां एक श्रमिक उदयपुर के लग्जरी होटल में बैठकर वेटर की नौकरी कर रहा है, जबकि चित्तौड़गढ़ के सरकारी रिकॉर्ड में वह चिलचिलाती धूप में तगारी उठा रहा है।

इन्वेस्टिगेशन: एक मस्टररोल, कई फर्जी चेहरे

अमरपुरा गांव में चारागाह विकास (खसरा नं. 134) के नाम पर मस्टररोल संख्या 183 में सरकारी धन की खुली लूट मची है। पड़ताल में सामने आया कि मौके पर केवल एक श्रमिक, रामेश्वरलाल धाकड़ मौजूद है, जो पिछले आठ महीनों से अकेला ही पूरी साइट की चौकीदारी कर रहा है। रिकॉर्ड में दर्ज अन्य दो श्रमिक केवल कागजी भूत बनकर पैसा निकाल रहे हैं।

नंदलाल बोला:'मैं तो उदयपुर में हूं, गांव में हाजिरी कैसे लग रही, पता नहीं'

इस फर्जीवाड़े का सबसे बड़ा सबूत श्रमिक नंदलाल मीणा है। पत्रिका ने जब उससे संपर्क किया, तो उसने साफ स्वीकार किया कि वह उदयपुर के एक होटल में कार्यरत है। अब सवाल यह है कि अगर श्रमिक 150 किमी दूर उदयपुर में है, तो नरेगा मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम पर उसकी 'जियो-टैग्ड' फोटो कौन और कैसे अपलोड कर रहा है?

5 सवाल - जिनका जवाब प्रशासन के पास नहीं है

  • तकनीक से 'धोखाधड़ी' कैसे? ऐप केवल कार्यस्थल की लोकेशन पर फोटो लेता है। क्या मेट और अधिकारियों ने नंदलाल की जगह किसी और का फोटो ऐप पर अपलोड किया? यदि हां, तो यह सीधे तौर पर 'साइबर फ्रॉड' और 'राजकीय जालसाजी' का मामला है।
  • वीडीओ की भूमिका संदिग्ध: ग्राम विकास अधिकारी हंसराज मीणा का दावा है कि श्रमिक मौके पर मिला था। जब श्रमिक खुद उदयपुर में होना स्वीकार रहा है, तो क्या अधिकारी भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रहे हैं?
  • चेहरा मिलान क्यों नहीं? क्या सिस्टम में फोटो अपलोड करते समय चेहरे का मिलान नहीं किया जाता? अगर नहीं, तो करोड़ों की यह तकनीक सिर्फ दिखावा है?
  • त्रिकोणीय गठजोड़: मेट, सरपंच और वीडिओ की मिलीभगत के बिना यह संभव नहीं है। क्या प्रशासन इस 'सिंडिकेट' को तोड़ने की हिम्मत जुटा पाएगा?
  • बार-बार वही पंचायत क्यों? पारसोली में 2023 और 2024 में भी फर्जीवाड़े पकड़े गए, लेकिन दोषियों पर एफआईआर क्यों नहीं हुई? क्या उन्हें किसी रसूखदार का 'अभयदान' प्राप्त है?

पुरानी फाइलों पर जमी धूल, भ्रष्टाचारियों के हौसले बुलंद

पत्रिका और अन्य माध्यमों ने पहले भी पारसोली में रात के अंधेरे में फोटो अपलोड करने और पुरानी सड़कों पर नया बजट ठिकाने लगाने के मामले उजागर किए थे। हर बार जांच का झुनझुना थमाया गया। सख्त कार्रवाई न होना ही इस भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी खाद है।

पत्रिका की मांग: सिर्फ नोटिस नहीं, FIR चाहिए

यह केवल एक श्रमिक का मामला नहीं, बल्कि टैक्सपेयर्स के पैसे की डकैती है। जिला प्रशासन को चाहिए कि
इस मस्टररोल के भुगतान पर तुरंत रोक लगाकर रिकवरी की जाए। झूठ बोलने वाले ग्राम विकास अधिकारी और फर्जी फोटो अपलोड करने वाले मेट पर एफआईआर दर्ज हो। पूरे ब्लॉक के मस्टररोल्स का थर्ड-पार्टी ऑडिट करवाया जाए।

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