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Rajasthan Unique Tradition : ‘अनाज तौल’ ने की भविष्यवाणी, इस वर्ष मेहरबान रहेंगे बदरा, मिर्च-धनिया किसान होंगे मालामाल

Rajasthan Unique Tradition : राजस्थान में इस वर्ष बदरा मेहरबान रहेंगे। प्रदेश में जमकर बारिश होगी। इसके साथ ही मिर्च और धनिया के किसान मालामाल होंगे। पर इन फसलों की पैदावार घटेगी। जानिए किसने यह भविष्यवाणी की है।

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Rajasthan Tradition Chittorgarh Badwal Village Anaj Tol Prediction It will rain heavily this year Chilli-coriander farmers will be rich

पत्रिका फोटो

Rajasthan Unique Tradition : विज्ञान के इस युग में जहां मौसम की सटीक जानकारी के लिए सैटेलाइट और रडार का उपयोग होता है, वहीं मेवाड़ के चित्तौड़गढ़ में बड़ीसादड़ी उपखण्ड के बड़वल गांव में आज भी 600 साल पुरानी अनाज तौल परंपरा से भविष्य का आकलन किया जा रहा है। अक्षय तृतीया पर भगवान लक्ष्मीनारायण मंदिर में हुई इस अनूठी रस्म के अनुसार, इस वर्ष क्षेत्र में पिछले साल की तुलना में अधिक वर्षा होगी। वहीं, व्यापारिक फसलों में मिर्च और धनिया किसानों को मालामाल करेंगे। ग्रामीणों का मानना है कि यह परंपरा पीढ़ियों से सटीक साबित होती आई है और इसके आधार पर किसान अपनी खेती की रणनीति भी तय करते हैं।

ऐसे तौला जाता है भविष्य

मंदिर के पुजारी उदयलाल भट्ट ने बताया कि अक्षय तृतीया की पूर्व संध्या पर आरती के बाद मंदिर के गर्भगृह में विभिन्न जिंसों (अनाज, तिलहन, मसाले) के 10-10 ग्राम के नमूने इलेक्ट्रॉनिक कांटे पर तौलकर रखे जाते हैं। अगले दिन ब्रह्म मुहूर्त में पूरी पारदर्शिता के साथ श्रद्धालुओं के सामने इन्हें पुनः तौला जाता है। यदि वजन 10 ग्राम से अधिक निकलता है, तो पैदावार बंपर मानी जाती है। वजन घटने पर पैदावार कम और बराबर रहने पर पिछले साल जैसा ही उत्पादन रहने की भविष्यवाणी की जाती है।

बुजुर्गों का भरोसा, कभी फेल नहीं हुई गणना

गांव के 85 वर्षीय बुजुर्ग रामेश्वर लाल सुथार और जियाखेड़ी के देवकिशन शर्मा का कहना है कि उन्होंने जीवन में कभी इस भविष्यवाणी को गलत साबित होते नहीं देखा। ग्रामीण इसी आधार पर अपनी बुआई का निर्णय लेते हैं। मान्यता है कि पहाड़ी पर स्थित धुंधली मल स्वामी की धूणी पर घी की आहुति देने से क्षेत्र की फसलों को पाले और प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा मिलती है।

परंपरा और विज्ञान का संगम

पुजारी परिवार की आठवीं पीढ़ी इस परंपरा का निर्वहन कर रही है। खास बात यह है कि अब इस पुरानी रस्म में भी आधुनिकता का समावेश हो गया है। पहले तौल के लिए पारंपरिक तराजू का उपयोग होता था, लेकिन अब पूरी सटीकता के लिए इलेक्ट्रॉनिक कांटों का उपयोग किया जाता है।

फसलों का पूर्वानुमान…

पैदावार बढ़ेगी - पैदावार घटेगी - पिछले वर्ष के बराबर
मिर्च, धनिया, अलसी - लहसुन (ऊटी) - गेहूं, सोयाबीन, मूंगफली
चिया सीड्स, जौ - मैथी, चारा - मक्का (पीली-सफेद), चना
पोस्त (राजहंस) - गेहूं (लोकवन) - जीरा, ईसबगोल, अजवाइन।

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