
Rajasthan News : चित्तौड़गढ़ जिले सहित प्रदेश भर के शराब के अधिकृत विक्रेताओं को अब फूड लाइसेंस भी अनिवार्य रूप से लेना होगा। ऐसा नहीं करने पर दस लाख रुपए तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। राज्य सरकार ने मिलावटी शराब को लेकर मिल रही शिकायतों के बाद यह निर्णय किया है।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण विभाग आदेश मिलते ही इस संबंध में प्रक्रिया शुरू करेगा। शराब की दुकानों से लिए गए नमूनों की जांच खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की प्रयोगशाला में कराई जाएगी पर दुकानों पर छापे और नमूने लेने का अधिकार किसको दिया जाएगा यह अब तक स्पष्ट नहीं हुआ है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने आबकारी विभाग के अतिरिक्त आयुक्तों को पत्र लिखकर शराब कारोबारियों को फूड लाइसेंस लेने के लिए पाबंद करने के लिए कहा है।
नए नियमों के मुताबिक शराब के मानक भी श्रेणी के अनुसार तय किए गए हैं। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार आबकारी विभाग की ओर से शराब के वैध और अवैध कारोबार पर तो निगरानी रखी जाती है पर मिलावट व गुणवत्ता की जांच की व्यवस्था नहीं है।
दो हजार रुपए तय किया लाइसेंस शुल्क
यदि विक्रेता बिना फूड लाइसेंस शराब बेचता पाया गया तो उस पर 10 लाख रुपए तक का जुर्माना भी किया जा सकेगा। खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006 के तहत व्यापारियों को वार्षिक टर्न ओवर व प्रतिदिन की उत्पादन क्षमता के अनुसार लाइसेंस अनिवार्य किया हुआ है। लाइसेेंस शुल्क दो हजार रुपए तय किया गया है।
आदेश प्राप्त होते ही करेंगे पांबद
शराब विक्रेताओं के लिए फूड लाइसेंस अब अनिवार्य कर दिया है। आदेश की प्रति प्राप्त होते ही जिले के शराब विक्रेताओं को इसके लिए पाबंद किया जाएगा।
घनश्याम शर्मा, खाद्य सुरक्षा अधिकारी चित्तौड़गढ़
Published on:
23 Jun 2024 02:22 pm

बड़ी खबरें
View Allचित्तौड़गढ़
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
