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सरकार अब तो पूरी करो विकास की दरकार

चित्तौडग़ढ़. चित्तौडग़ढ़ भले ही विश्व धरोहर में शुमार हो लेकिन यहां पर विकास की दरकार अब भी पूरी नहीं हुई है। ऐसे में यहां पर उद्योग एवं अन्य आय के साधन विकसित नहीं हो पा रहे है। ऐसे में यहां के युवाओं का पलायन करने पर मजबूर होना पड़ रहा है।

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सरकार अब तो पूरी करो विकास की दरकार

सरकार अब तो पूरी करो विकास की दरकार

चित्तौडग़ढ़. चित्तौडग़ढ़ भले ही विश्व धरोहर में शुमार हो लेकिन यहां पर विकास की दरकार अब भी पूरी नहीं हुई है। ऐसे में यहां पर उद्योग एवं अन्य आय के साधन विकसित नहीं हो पा रहे है। ऐसे में यहां के युवाओं का पलायन करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। केन्द्र एवं राज्य की सरकार में यहां से कई दिग्गज नेताओं ने प्रतिनिधित्व किया हो, लेकिन यहां के विकास को वे गति नहीं दे पाए। अगर यहां पर विकास होता तो शायद अन्य निकटवर्ती जिलों की तरह यहां की रौनक भी कुछ और ही होती है। अब यहां पर विकास की गति के लिए सबसे महत्ती आवश्यकता एक व्यवस्थित एवं विशाल औद्योगिक क्षेत्र का विकसित करने की जरूरत है। जिससे युवा यहां पर अपने उद्योग स्थपित कर स्वयं एवं स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर खुल सके।

नए औद्योगिक क्षेत्र की जरूरत
चित्तौडग़ढ़ जिले में पिछले तीन दशक के कोई नया औद्योगिक क्षेत्र नहीं बना है ऐसे में पुराने औद्योगिक क्षेत्रों में जो भूखण्ड थे वे भी करीब पूरे हो चुके है। ऐसे में यहां पर एक समृद्ध नए औद्योगिक क्षेत्र की आवश्यकता है। अगर नया औद्योगिक क्षेत्र बनता है तो सेरामिक उद्योग को भी यहां पर बढ़ावा मिल सकता है।

पलायन को रोकना जरूरी
नए उद्योगों के लिए जमीन नहीं होने से अब युवाओं का मध्यप्रदेश एवं अन्य स्थानों पर पलायन शुरू हो गया है। ऐसे में यहां पर औद्योगिक विकास करना है तो एक नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की खासी जरूरत है।

पर्यटन उद्योग को भी मिले बढ़ावा
चित्तौडग़ढ़ दुर्ग विश्व विरासत में शुमार है ऐसे में यहां पर जो पर्यटन उद्योग की चाल होनी चाहिए वह काफी धीमी है। इसलिए पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए भी सफल प्रयास की जरूरत है। चित्तौडग़ढ़ शहर दो नदियों के मध्य बसा हुआ है। ऐसे उदयपुर की तर्ज पर नदियों को भी पर्यटन केन्द्र के रुप में विकसित कर इस उद्योग को बढ़ावा देकर यहां पर पर्यटकों के ठहराव के लिए कार्य किया जा सकता है। इससे स्थानीय लोगों को भी रोजगार के अवसर मिलेंगे।

नहीं पूरी हुई ट्रांसपोर्ट नगर की मांग
चित्तौडग़ढ़ जिला सीमेन्ट उद्योग के हब के नाम से भी प्रसिद्ध है ऐसे में यहां पर सीमेन्ट की अन्य स्थानों पर पहुंचाने के लिए ट्रांसपोर्ट उद्योग भी संचालित है, लेकिन यहां पर अब तक एक व्यवस्थित ट्रांसपोट नगर नहीं है। ऐसे में पिछले कइ्र वर्षो से यह मांग उठ रही है लेकिन अब तक ट्रासंपोर्अ नगर नहीं बन सका। अगर यहां भीलवाड़ा एवं अन्य शहरों की तर्ज पर ट्रासंपोर्ट नगर बने तो कई लोगों के रोजगार के अवसर खुल सकते है।

मध्यप्रदेश में पलायन से रोका जा सकता है
इस समय समीपवर्ती मध्यप्रदेश की सरकार नए उद्योग लगाने के लिए उद्यमियों को अपनी और खीचने के लिए एक अच्छी कैपिटल तैयार कर दे रही है। ऐसे में प्रदेश के कइ्र उद्यमी मध्यप्रदेश की ओर रूख करने लगे है। अगर चित्तौडग़ढ़ में दोनो राज्यों की सीमा पर एक नया औद्योगिक क्षेत्र बने तो उद्यामियों के पलायन को रोका जा सकता है।

धरा रह गया प्रस्ताव
पिछले कुछ वर्षों पूर्व यहां मादंलदा रोड पर रोजडा में एक नया औद्योगिक क्षेत्र बनाने को लेकर सरकार के पास प्रस्ताव भेजा गया था लेकिन यह प्रस्ताव सिर्फ फाइलों में दब कर रह गया। इसी तरह गंगरार के निकट करीब १६ साल पहले सोनियाणा औद्योगिक क्षेत्र बनाया गया लेकिन वह भी अब तक पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाया।

इस तरह से बने औद्योगिक क्षेत्र
रेलवे स्टेशन के निकट औद्योगिक क्षेत्र -१९६५-७०
पुराना औद्योगिक क्षेत्र १९७५-१९७९
चंदेरिया औद्योगिक क्षेत्र- १९८०
औजोलिया का खेड़ा औद्योगिक क्षेत्र -१९९०

एक्सपर्ट व्यू
चित्तौडग़ढ़ जिले में एक नए औद्योगिक क्षेत्र के निर्माण की महत्ती आवश्यकता है। अगर नया औद्योगिक क्षेत्र बनता है तो यहां पर नए युवा उद्यमी तैयार हो सकते है। ऐसे में मार्बल के बाद यहां पर सैरामिक इण्डस्ट्री विकसित हो सकती है। मध्यप्रदेश सरकार की तर्ज पर राजस्थान सरकार को भी नए उद्योगों को स्थापित करने के लिए कोई योजना बनानी चाहिए। इससे युवाओं का पलायन भी रूकेगा और रोजगार के अवसर खुलेंगे। शहर में ट्रांसपोर्ट नगर की भी महत्ती आवश्यकता है। वहीं पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए भी उदयपुर की तर्ज पर नदियों में वोटिंग आदि शुरू की जानी चाहिए। इससे पर्यटकों को ठहराव होगा और पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
- राजेश ईनाणी, मार्बल उद्यमी चित्तौडग़ढ़

तलाश रहे है नई जमीन
चित्तौडग़ढ़ में नए औद्योगिक क्षेत्र बनाने के लिए सरकार गंभीर है। इसके लिए जिला कलक्टर से वर्ता भी की गई है। अब नई जमीन तलाश की जा रही है। इसके बाद सरकार को प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा।


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