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सावधान! हीटवेव कर सकती है हार्ट, किडनी और लिवर को फेल, मनरेगा मजदूरों की मौत में भी ऐसे ही लक्षण

Rajasthan Weather : गर्मी के मौसम में न केवल हीट स्ट्रोक बल्कि ब्रेन स्ट्रोक के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं।

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चित्तौड़गढ़. गर्मी के मौसम में न केवल हीट स्ट्रोक बल्कि ब्रेन स्ट्रोक के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में सूरत से लेकर जमशेदपुर तक कई अस्पतालों में ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसका एक बड़ा कारण भीषण गर्मी और अचानक बदलता तापमान है। अध्ययनों में बताया गया है कि तापमान में छोटी - सी वृद्धि भी कार्डियोवास्कुलर रोगों का खतरा बढ़ा सकती है। डेटा बताते हैं कि तापमान में एक डिग्री सेंटीग्रेड का परिवर्तन भी हार्ट अटैक या स्ट्रोक के अधिक खतरे के साथ जुड़ा होता है। चित्तौड़गढ़ में पिछले दिनों मनरेगा मजदूरों की मौत ब्रेन स्ट्रोक या हार्ट अटैक से हुई है। ऐसे में इसके पीछे भी गर्मी से इनकार नहीं किया जा सकता।

बुजुर्गों को अधिक खतरा

चिकित्सकों के अनुसार बुजुर्गों को गर्मी में स्ट्रोक का खतरा होता है। साथ ही, जिन लोगों के पास अंदरूनी बीमारियां हैं, जैसे हृदय और रक्त संबंधी बीमारियां, उन्हें भी स्ट्रोक का ज्यादा खतरा होता है।

भट्टी - सा तप रहा शहर, नजर नहीं आ रहे परिंदे

शहर में नौ तपा का कहर सोमवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। अधिकतम तापमान जहां 45.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, वहीं न्यूनतम तापमान भी बढ़कर 31.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है।सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करने के साथ ही 25 मई से गर्मी का जोर बढ़ गया है। इस दिन अधिकतम तापमान 46 डिग्री व न्यूनतम तापमान 31 डिग्री था। 26 मई को अधिकतम तापमान 45.8 डिग्री व न्यूनतम तापमान 29.9 डिग्री रहा। जबकि सोमवार को अधिकतम तापमान 45.6 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 31.2 डिग्री सेल्सियस रहा। इस बीच चित्तौड़गढ़ शहर भट्टी सा तप रहा है। दिन में सड़कें सूनी नजर आ रही है। चित्तौड़गढ़ के सांवलियाजी अस्पताल में प्रतिदिन पन्द्रह से बीस मरीज तापघात से पीड़ित होकर भर्ती हो रहे हैं। जबकि आउटडोर में तापघात के पचास से साठ मरीज उपचार के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं।

यह हैं बचाव

बहुत महत्वपूर्ण है कि जब तापमान बढ़ जाए, तो व्यक्ति को अधिक पानी पीना और उचित कपड़े पहनना चाहिए। उच्च तापमान या धूप में बहुत ज्यादा समय तक नहीं रहना चाहिए। धूप में बाहर जाने की बजाय घर में रहने का प्रयास करें।

इनका कहना है

तापघात से शरीर के विभिन्न अंगों किडनी, लिवर, ब्रेन, हृदय आदि पर प्रभाव पड़ता है। शरीर का तापमान 104 डिग्री सेल्सियस होना, मरीज का मानसिक संतुलन गड़बड़ाना तथा पसीना नहीं आना तापघात की श्रेणी में आता है।- अनीस जैन, वाइस प्रिंसीपल, मेडिकल कॉलेज, चित्तौड़गढ़

केस-1

22 मई को नन्दु बाई मानपुरा ग्राम पंचायत के राजस्व ग्राम सूरजपोल के पास गुन्दली नाडी पर कार्य कर रही थी। कार्य पूर्ण होने के बाद कार्य ऑटो में बैठकर स्वस्थ रूप से घर चली गई। गुरुवार को श्री सांवरिया राजकीय चिकित्सालय में उनकी मृत्यु हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट अनुसार मृत्यु का कारण ब्रेन स्ट्रोक से होना पाया गया।

केस-2

ग्राम पंचायत अभयपुर के ग्राम बडी का खेड़ा में नरेगा श्रमिक धनपुरी गोस्वामी कार्य कर रहे थे। सुबह 11.30 बजे उल्टी, दस्त व जी घबराने के कारण मेट नन्दपुरी नरेगा श्रमिक धनपुरी को घर ले आया। थोड़ी देर बाद वापस उल्टी, दस्त एवं जी घबराने लगा तो इलाज के लिए चित्तौडग़ढ़ लाया गया। यहां अस्पताल में जाते ही मृत्यु हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट अनुसार नरेगा श्रमिक की मृत्यु का कारण हार्ट अटैक (हृदयाघात) होना पाया गया।

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यह है कारण

स्ट्रोक होने के कई कारण हो सकते हैं। ये शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार के हो सकते हैं। कुछ मुख्य कारणों में हाई ब्लड प्रेशर, अनियमित खान-पान, शराब और धूम्रपान का सेवन, डायबिटीज, अधिक वजन, और अधिक तनाव शामिल हो सकते हैं।

जब तापमान ज्यादा होता है, तो पसीने की मात्रा बढ़ जाती है। यह बढ़ती हुई पसीने की मात्रा पानी की कमी और तबीयत खराब कर सकती है और यह स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ा सकती है।

शरीर पर थर्मल तनाव बढ़ने से भी स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है, जैसे हाइपरटेंशन , हार्ट रेट की असंतुलन जिसे एरिथमिया और इस्केमिक हृदय रोग भी कहा जाता है।

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