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PATRIKA STING: सेक्स पावर बढाने की चाह घोल रही जवां रगों में जहर

जिले में स्मैक का काला कारोबार बड़े पैमाने पर फैल चुका है। शहर के साथ अब गांवों में भी कई युवाओं की रगों में स्मैक का नशा दौड़ रहा है। शहर में घूमते तस्करों के दलाल और सेक्स पॉवर बढाने के झांसे में स्मैक के नशे से युवा वर्ग अपनी देह तबाह कर रहा है।

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Tej Narayan Sharma

Aug 02, 2016

जिले में स्मैक का काला कारोबार बड़े पैमाने पर फैल चुका है। शहर के साथ अब गांवों में भी कई युवाओं की रगों में स्मैक का नशा दौड़ रहा है। ऐसे नशेड़ी युवकों के बीवी-बच्चे इसलिए घुट-घुटकर जीने को मजबूर है कि परिवार की इज्जत का सवाल आ जाता है। शहर में घूमते तस्करों के दलाल और सेक्स पॉवर बढाने के झांसे में आकर स्मैक के नशे से युवा वर्ग अपनी देह तबाह कर रहा है। दलाल युवा वर्ग को झांसा देते हैं कि स्मैक दवा के रूप में काम करती है और इसकी पन्नी पीने से सेक्स पॉवर बढता है।

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भदेसर क्षेत्र के रेवलिया खुर्द गांव में हर पांचवें घर में किसी न किसी को स्मैक का नशा करते देखा जा सकता है। स्मैक की तलब पूरी करने के लिए छोटी-मोटी चोरियां आस-पास के क्षेत्रों में आम बात हो गई है। निम्बाहेड़ा क्षेत्र मध्यप्रदेश बॉर्डर से सटा हुआ होने से यहां भी स्मैक का नशा करने वालों की संख्या कम नहीं है। बड़ीसादड़ी प्रतापगढ़ जिले के पास है और वहां नीमच रोड़, रेलवे कॉलोनी के खण्डहर भवन, इन्द्रा कॉलोनी आदि इलाकों में नशेडिय़ों को स्मैक का नशा करते देखा जा सकता है।

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यहां प्रतापगढ़ और निम्बाहेड़ा से स्मैक सप्लाई की बात सामने आ रही है। बस्सी क्षेत्र के बल्दरखा गांव में भी स्मैक का नशा करने वालों की तादाद बढ़ रही है। बेगूं क्षेत्र के हरदेवपुरा और गोपालपुरा में सबसे ज्यादा स्मैकची है। इन गांवों में कई परिवार स्मैक के नशे के कारण बर्बाद हो चुके हैं। कपासन विधायक अर्जुनलाल जीनगर का कहना है कि गंगरार से लेकर कपासन तक का पूरा बेल्ट नशाखोरी में डूबा हुआ है। जो लोग नशा कर रहे ह। विधायक ने स्वीकार किया कि कपासन में तो कुछ महिलाएं भी स्मैक बेचती है।

तलाक की नौबत

स्मैक के धुएं का सच यह है कि स्मैक के नशे से परेशान कई महिलाएं खुदकुशी कर चुकी है तो कई परिवारों में तलाक की नौबत आ गई है। नशा छुड़वाने के लिए जवान बेटे के पैर बेडिय़ों में जकडऩे पड़ रहे हैं।

पुडिय़ा का नेटवर्क

चित्तौडग़ढ़ जिले में पिछले कुछ वर्षों से स्मैक का नशा करने वालों की संख्या लगातार बढ़ी है। जिला मुख्यालय ही नहीं बल्कि गांवों में भी कई लोग स्मैक पीने के आदी हो गए हैं। स्मैक की पुडिय़ा गांव और गलियों तक पहुंचाई जा रही है। पड़ोसी राज्य के अलावा प्रतापगढ़ जिले से स्मैक की पुडिय़ा रवाना होती है तो चित्तौडग़ढ़ जिले में विभिन्न रास्तों से होते हुए गांवों में युवाओं तक पहुंच रही है। इसके लिए चेन सिस्टम बना हुआ है। टुकड़ों में स्मैक एक के बाद दूसरे सौदागर से होते हुए कमीशन पर काम कर रहे दलालों के मार्फत युवाओं के हाथों में आ रही है।

सेक्स पावर बढऩे का देते हैं झांसा

शहर में घूमते तस्करों के दलाल और सेक्स पॉवर बढाने के झांसे में आकर स्मैक के नशे से युवा वर्ग अपनी देह तबाह कर रहा है। दलाल युवा वर्ग को झांसा देते हैं कि स्मैक दवा के रूप में काम करती है और इसकी पन्नी पीने से सेक्स पॉवर बढता है। युवक इनके झांसे में आ जाते हैं और धीरे-धीरे वे भी स्मैकची बन जाते हैं। शुरुआत में स्मैक शरीर में उत्तेजना पैदा करती है और बाद में नशेड़ी इसके 'गुलामÓ बन जाते हैं। अकेले चित्तौडग़ढ़ शहर में ही ऐसे करीब चार सौ से पांच सौ लोग हैं, जिन्हें स्मैक की पन्नी पीने की लत है।

निशाने पर युवा, नशे के सौदागर देते स्कीम

तस्करों के दलालों ने युवा पीढी को टारगेट पर ले लिया है। अपना नेटवर्क बढ़ाने के लिए ये पहले तो स्मैक मिलाकर मुफ्त की सिगरेट पीने के दे देते हैं और आठ-दस दिन बाद जब यह सिगरेट पीने वाले को नशे की लत लग जाती है तो उसे कमीशन पर पुडिय़ा बेचने का काम सौंप देते हैं। स्कीम में अपने लिए स्मैक की पुडिय़ा का जुगाड़ करने के फेर में खुद गरदुल्ले भी इस अवैध धंधे को बढ़ावा दे रहे हैं। इसके अलावा मुफ्त की सिगरेट से नशे की लत में डूबने वाले भी मुफ्तखोरी की पुडिय़ा के लालच में आकर अपने अन्य साथियों को नशीली सिगरेट पिलाकर स्मैक का आदी बना रहे हैं। यह जाल फैलता जा रहा है। हालांकि बड़ा तबका वाकिफ है।

धुर्र कहते ही फु र्र हो जाते हैं गरदुल्ले

स्मैक की पुडिय़ा बेचने वालों के 'कोड वर्डÓ भी गरदुल्ले अच्छी तरह समझते हैं। कहीं पर पकड़े जाने का आभास हो तो पुडिय़ा बेचने वाले धुर्र-धुर्र की आवाज करते हुए वहां से चलते बनते हैं और यह सुनकर गरदुल्ले भी समझ जाते हैं। बाद में इन्हें नई जगह के बारे में बता दिया जाता है, जहां पहुंचकर ये पुडिय़ा खरीद लेते हैं।

अंगों को शिथिल कर रहा नशा

स्मैक का नशा शुरुआती दिनों में मस्तिष्क के तंत्रिका तंत्र को उत्तेजित करता है, इससे नशेड़ी को ऐसा लगता है कि उसमें ताकत बढ गई है, लेकिन पन्द्रह-बीस दिन बाद ही यह नशा तंत्रिका तंत्र सहित पूरे शरीर को शिथिल करना शुरू कर देता है। इससे नशे के आदी व्यक्ति में नपुंसकता आ जाती है। स्मैक नहीं मिलने पर मुंह से लार निकलने और बेहोशी जैसी शिकायतें होती है।

यहां बिकती है स्मैक

चित्तौड़ शहर में पावटा चौक, चन्द्रलोक सिनेमा के पीछे और मोक्षधाम के पीछे स्मैक की पुडिय़ा बेची जाती है। एक पुडिय़ा के सौ रूपए लिए जाते हैं।

केस-1

शहर के जूनावास में रहने वाले सेवानिवृत शिक्षक का बेटा बीस साल से स्मैक का नशा कर रहा है। दोस्तों ने उसे स्मैक की लत लगा दी। पिता दो बार नशा मुक्ति केन्द्र ले गए। ठीक भी हो गया, लेकिन साथी गरदुल्लों को यह रास नहीं आया सो उसे फिर स्मैक के नशे का चस्का लगा दिया।

केस-2

शहर में ही रहने वाली एक महिला के पति की मौत हो गई तो एक अन्य युवक से निकाह कर लिया। दूसरे पति को स्मैक की लत लग गई। हालत यह हो गई कि महिला को अब घर-घर झाड़ू-पोछा और खाना बनाकर बच्चों का पेट पालना पड़ रहा है। महिला का कहना है कि कई बार पति उसकी मेहनत की कमाई छीनकर ले जाता है। कभी नहीं देने पर मारपीट पर भी उतारू हो जाता है। पति पर स्मैक का नशा कुछ इस कदर हावी हो चुका है कि वह पैसे के लिए दबाव बनाने के लिए हाथों की नसें तक काटने जैसा काम कर चुका है।

केस-3

पुराने शहर में रहने वाला एक युवक तो करीब पन्द्रह लाख रूपए की स्मैक का नशा कर चुका है। सदमें से उसके पिता भी चल बसे। मजबूरी में युवक को बेडिय़ों जकड़ दिया गया है ताकि वह घर से बाहर ही नहीं जाएगा तो नशा करेगा कैसे।

पन्नी के धुएं में सबकुछ भूले

पन्नी यानी स्मैक के आदी गरदुल्लों को यदि लगाव है तो सिर्फ स्मैक से। नशे की लत के कारण परिजनों से उनका लगाव लगभग खत्म हो चुका है। नाते-रिश्ते सिर्फ स्मैक की पुडिय़ा तक सीमित रह गए हैं। सुबह घर से निकलना, नशा करना और इसके लिए छोटी-मोटी वारदात को अंजाम देना। बस यही दिनचर्या में शामिल हो चुका है।


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