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बजरी के अवैध कारोबार से कूट रहे चांदी

चित्तौडग़ढ़. भूपालसागर उपखण्ड क्षेत्र में बनास नदी से बजरी दौहन का अवैध कारोबार चांदी कूट रहा है। इस पर लगाम लगाने के लिए भले ही पुलिस लाख दावे कर रही हो, लेकिन हकीकत इससे परे है।

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बजरी के अवैध कारोबार से कूट रहे चांदी

बजरी के अवैध कारोबार से कूट रहे चांदी

चित्तौडग़ढ़. भूपालसागर उपखण्ड क्षेत्र में बनास नदी से बजरी दौहन का अवैध कारोबार चांदी कूट रहा है। इस पर लगाम लगाने के लिए भले ही पुलिस लाख दावे कर रही हो, लेकिन हकीकत इससे परे है।
जिले में अवैध बजरी खनन हो रहा है। आधी रात से अल सवेरे तक चलने वाले अवैध खनन व परिवहन के खेल में माफिया जमकर चांदी कूट रहे हैं। पुलिस कभी कभार कार्रवाई करती है, लेकिन बजरी खनन के अवैध कारोबार पर लगाम अब तक नहीं लगा पा रही है। बजरी माफिया इस मौके का फायदा उठा रहे हैं। अवैध बजरी खनन तेजी से हो रहा है। बजरी खनन माफिया लोगों से बजरी के मनमाने दाम वसूल रहे हैं। मजबूर लोग भी मुंह मांगे दाम देने को मजबूर हैं। इसके चलते नदी क्षेत्रों में से बजरी का जो अवैध खनन हो रहा है, उसकी कल्पना तक नहीं की जा सकती है। रात होते ही बजरी खनन माफिया सक्रिय हो जाते हैं जो अल सवेरे तक सैंकड़ों ट्रैक्टरों, डंपरों में बजरी का परिवहन कर एक जगह एकत्रित करते हैं। इसके बाद जब भी मौका मिलता है। वहां से बजरी को उठाकर जरूरत स्थल तक पहुंचाई जाती है। रात के समय बजरी खनन माफिया ना केवल रौब झाड़ते नजर आते हैं बल्कि रोकने टोकने वालों को डराया धमकाया भी जाता है। आलम ये है कि बजरी से भरे ट्रैक्टर ट्रॉली तंग गलियों से भी बहुत तेज़ रफ्तार से गुजरते है जिसके चलते बजरी कई बार दुर्घटनाएं हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने नदियों से बजरी खनन पर रोक लगा रखी है लेकिन बजरी माफियाओं द्वारा आदेशों की अवहेलना कर अवैध बजरी परिवहन की जा रही है ।
बदला नदी का स्वरूप
बनास नदी की बजरी माफियाओं ने बेखौफ होकर नदी की बजरी का अवैध दोहन कर स्वरूप ही बदल दिया। गर्मी के मौसम में नदी के तट पर खीरा ककड़ी व सब्जियों की पैदावार कर अपने परिवार का भरण पोषण करने वाले परिवारों के सामने आज संकट के बादल मण्डराने लगे हैं। बजरी पर प्रशासन अंकुश लगाने में बेअसर साबित हुआ है। इसका खामियाजा आम जनता एवं नदी से जुड़े ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।
नए नए तरीकों से होती है बजरी परिवहन
अवैध बजरी परिवहन के लिए डम्पर वाले नए नए तरीकों से अपना रहे है। ट्रॉली स्तर तक रेत भर कर उसके ऊपर मिट्टी की परत जमाई जाती है फिर ऊपर मिट्टी डाल कर बजरी परिवहन की जाती है। ट्रॉली स्तर तक बजरी भर तिरपाल डाल कर या अन्य से बजरी छिपाई जाकर ऐसे तरीके अपनाए जाते हैं।


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