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चित्तौड़़ के देसी गुड़ की मिठास उदयपुर, कोटा तक पहुंच रही है

चित्तौडग़ढ़. चित्तौडग़ढ़ जिले में बनने वाला देसी गुड की मिठास चित्पौडग़ढ़ में ही नहीं वरन प्रदेश के अन्य जिलों में भी पहुंच रही है। यहां पर भीलवाड़ा मार्ग पर हाइवे पर, उदयपुर मार्ग पर देवरी बस्सी आछोड़ा चौराहा लगी देसी गुड बनाने की लिएचरखियां लगी है। ऐसे में इन गुडकोयहां पर तैयार कर मौके पर ही लोगों को बेचा जाता है।

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चित्तौड़़ के देसी गुड़ की मिठास उदयपुर, कोटा तक पहुंच रही है

चित्तौड़़ के देसी गुड़ की मिठास उदयपुर, कोटा तक पहुंच रही है

चित्तौडग़ढ़. चित्तौडग़ढ़ जिले में बनने वाला देसी गुड की मिठास चित्पौडग़ढ़ में ही नहीं वरन प्रदेश के अन्य जिलों में भी पहुंच रही है। यहां पर भीलवाड़ा मार्ग पर हाइवे पर, उदयपुर मार्ग पर देवरी बस्सी आछोड़ा चौराहा लगी देसी गुड बनाने की लिएचरखियां लगी है। ऐसे में इन गुडकोयहां पर तैयार कर मौके पर ही लोगों को बेचा जाता है। इस गुड़ देसी गुड़ की मिठास भीलवाड़ा, जयपुर, अजमेर, उदयपुर, कोटा सहित अन्य जिलों में भी पहुंच रही है। सेमलपुरा मोड़ के आगे और आछोडा चौराहे के समीप बस्सी हाइवे पर लगी गुड़ की भट्टी में सर्दियों के समय में प्रतिवर्ष गुड़ निकाला जाता है। यहां से निकलने वाले गुड़ की मांग दूर-दूर तक है।
आछोड़ा निवासी तुलसीराम डांगी ने बताया कि सर्दियों के समय में देसी गुड़ की मांग काफी रहती है। बस्सी हाईवे के समीप गुड फैक्ट्री होने के कारण यहां से निकलने वाला गुड़ बस्सी, बेगू, कोटा, उदयपुर और गुजरात के राहगीर ले जाते हैं।

इस बार तेज है गन्ने के भाव
हालांकि इस बार गन्ने का उत्पादन कम होने के कारण गन्ने की दरों में वृद्धि है। गत वर्ष गन्ना प्रति ङ्क्षक्वटल 280 रुपए में मिल रहा था, वहीं इस वर्ष गन्ना 380 रुपए प्रति ङ्क्षक्वटल मिल रहा है, जिसके कारण गत वर्ष गुड़ 45 रुपए प्रति किलो था जो इस वर्ष 50 रुपए प्रति किलो है। तुलसीराम डांगी ने बताया कि दरों में उतार-चढ़ाव तो प्रतिवर्ष होता रहता है उससे उनकी ग्राहकी में कोई फर्क नहीं है। चार बीघा के लगभग गन्ना उन्होंने अपने खेत में बो रखा है वही अधिकतर गन्ना उन्हें खरीदकर लाना पड़ता है।