चित्तौडग़ढ़
चित्तौडग़ढ़ शहर सहित जिले भर में हुई बारिश और ओलावृष्टि से फसलों में हुई तबाही ने अन्नदाता की आंख में आंसू ला दिए हैं। जिले में इसबगोल की फसल में सर्वाधिक 70 फीसदी तक नुकसान हुआ है। जबकि अन्य फसलों में पच्चीस से तीन प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। इस खराबे को लेकर अतिरिक्त निदेशक कृषि को रिपोर्ट भिजवा दी गई है।
जिले में पिछले एक सप्ताह में हुई बे-मौसम बारिश और ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी और कटी फसल को भारी नुकसान हुआ है। इसबगोल की 2464 हैक्टेयर क्षेत्र में बुवाई की गई थी, जिसमें 70 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। जिले में कुल 31 हजार 52 हैक्टेयर क्षेत्र में रबी की फसल को भारी नुकसान हुआ है। संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार दिनेश कुमार जागा ने बताया कि जिले में इस बार 3 लाख 18 हजार 787 हैक्टेयर क्षेत्र में रबी की बुवाई की गई थी। इसमें 1 लाख 57 हजार हैक्टेयर में गेहूं, 9 हजार 25 हैक्टेयर में जौ, 70 हजार हैक्टेयर में चना व 2464 हैक्टेयर क्षेत्र में इसबगोल की बुवाई की गई थी। बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान को लेकर कृषि विभाग की ओर से करवाए गए सर्वे में 22 हजार 915 हैक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है। जबकि 1325 हैक्टेयर में जौ, 4348 हैक्टेयर क्षेत्र में चने की फसल को नुकसान हुआ है। कई जगह अफीम की फसल में चीरे लगे डोडों के दूध का भी नुकसान हुआ है। हालाकि अधिकांश जगह डोडों से अफीम का दूध एकत्रित करने का काम लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन बारिश और ओलावृष्टि से डोडों से पोस्तदाना निकालने में किसानों को परेशानी आ सकती है। किसानों को इस बार रबी फसलों की बंपर पैदावार होने की उम्मीद थी, लेकिन बे-मौसम बारिश और ओलावृष्टि के साथ ही फसलों में आए विभिन्न रोगों ने किसानों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया है।