22 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ पहुंचे अपने स्कूल, बच्चों को सुनाए बचपन के दिलचस्प किस्से

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ मंगलवार को अपने विद्यालय सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ पहुंचे। यहां उन्होंने छात्रों, पूर्व-छात्रों और शिक्षकों से मुलाकात की। ज्ञात रहे कि धनखड़ ने सन 1962 से 1967 तक अपनी स्कूली शिक्षा यहीं से पूरी की थी।

2 min read
Google source verification
photo_6282792140887144419_w.jpg

चित्तौड़गढ़ . उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ मंगलवार को अपने विद्यालय सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ पहुंचे। यहां उन्होंने छात्रों, पूर्व-छात्रों और शिक्षकों से मुलाकात की। ज्ञात रहे कि धनखड़ ने सन 1962 से 1967 तक अपनी स्कूली शिक्षा यहीं से पूरी की थी। इस अवसर पर भावुक होते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज मैं जो कुछ हूं, सैनिक स्कूल और यहां मिली शिक्षा की बदौलत ही हूं। इस माटी को मैं सलाम करता हूं। सैनिक स्कूल के छात्र-छात्राओं से मुलाकात के दौरान उपराष्ट्रपति ने अपने स्कूल के दिनों के कई रोचक संस्मरण सुनाए। उन्होंने बताया कि गांव के प्राइमरी स्कूल में पांचवीं कक्षा तक अंग्रेजी नहीं सिखाई जाती थी। इस कारण उन्हें सैनिक स्कूल में शुरुआती दिनों में कठिनाई का सामना करना पड़ा।

एक बार प्रिंसिपल ने कक्षा में उनसे अंग्रेजी में कुछ सवाल पूछे तो वे समझ नहीं सके। प्रिंसिपल ने उन्हें शाम को अपने घर पर चाय के समय बुलाया, तब उन्होंने हिम्मत कर प्रिंसिपल से कहा, सर मैं होशियार लड़का हूं पर, अंग्रेजी नहीं आती। उपराष्ट्रपति ने बताया कि उन प्रिंसिपल ने मुझे मार्गदर्शन दिया और मेरा जीवन बदल गया। मैं आजीवन उनका ऋणी रहूंगा।

यह भी पढ़ें : स्कूलों के लिए बना नया मॉड्यूल, अब बच्चों को बॉयज-गर्ल्स कहकर नहीं बुला पाएंगे टीचर

अति प्रतिस्पर्द्धा में न पड़ें
छात्रों को अति प्रतिस्पर्धा में न पड़ने की सलाह देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि मैं हमेशा क्लास में फर्स्ट आता था और हमेशा डरा रहता था कि फर्स्ट न आया तो क्या होगा। उस डर के कारण मैंने बहुत कुछ खोया। मैं अधिक दोस्त बना पाता, अधिक हॉबी कर पाता। नदी और नहर का उदाहरण देते उपराष्ट्रपति ने छात्रों से कहा की बंधे किनारों वाली नहर न बनें बल्कि, स्वतंत्र नदी बनें जो अपना रास्ता स्वंय चुनती है।

यह भी पढ़ें : ERCP पर सियासत के बीच मंत्री शेखावत का बड़ा बयान, पूर्वी राजस्थान के 13 जिलों की प्यास बुझाने का बताया ये 'मास्टर प्लान'

मां देती थी पोस्टकार्ड
धनखड़ ने बताया कि बेहद कम उम्र में सैनिक स्कूल में आने से उनकी मां को बहुत चिंता रहती थी। अत: वे रोज एक पोस्टकार्ड अपनी मां के लिए लिख कर भेजा करते थे। उन्होंने बताया जब मैं घर जाता था तो मां खाली पोस्टकार्ड का एक पैकेट मुझे दे दिया करती थी।