
विजय स्तंभ के एंट्री गेट पर लटके ताले, पत्रिका फोटो
Vijay Stambh Closed: कोरोना महामारी को खत्म हुए 6 साल बीत गए हैं लेकिन चित्तौड़गढ़ जिले में कोरोना आज भी एक्टिव है। यह बात हम नहीं कह रहे हैं। प्रदेश का पुरातत्व विभाग अब तक यह मानने को तैयार नहीं है कि कोरोना अब चला गया है। इसी के चलते विभाग ने जिले के विजय स्तंभ पर तालाबंदी कर रखी है। भविष्य में यह तालाबंदी कब हटेगी इसका जवाब भी विभाग नहीं दे रहा है।
चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर यूं तो देखने लायक कई प्राचीन स्मारक है, लेकिन पर्यटकों को दूर से ही अपनी ओर आकर्षित करने वाला विजय स्तंभ पिछले छह साल से बंद है। मार्च 2020 से पहले विजय स्तंभ को पर्यटक अदंर से भी देख सकते थे, लेकिन कोरोना अलर्ट के बाद से ही यहां तालाबंदी हो गई। तालाबंदी ऐसी हुई कि कोरोना चला गया, लेकिन यहां ध्यान नहीं दिया गया। जिले में जहां तालाबंदी थी, उसे खुले हुए वर्षों बीत गए पर विजय स्तम्भ आज भी ताले में बंद है।
विजय स्तम्भ ताले से कब आजाद होगा, विभाग जवाब देने को तैयार नहीं है। वहीं एक साल पहले रैलिंग लगाकर पर्यटकों को विजय स्तम्भ छूने से भी दूर कर दिया है। विश्व विरासत स्थल की सूची में शामिल चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर इन दिनों प्रतिदिन तीन से साढ़े तीन हजार पर्यटक दुर्ग भ्रमण पर आते हैं। ऐसे में विजय स्तम्भ को बंद देखकर पर्यटक भी हैरान हैं। पुरातत्व विभाग की ओर से सूचनात्मक कोई बोर्ड भी नहीं लगा है, जिससे लोगों को यह पता चल सके कि विजय स्तम्भ को हमेशा-हमेशा के लिए बंद कर दिया है या वापस पर्यटकों के लिए खोला जाएगा।
1448 ईस्वी में महाराणा कुंम्भा ने इसका निर्माण करवाया था। 122 फीट ऊंचे नौ मंजिला इस स्तंभ में कई प्राचीन मूर्तियां है। कहा जाता है कि इसे मालवा व गुजराज की जीत में बनाया गया था। विजय स्तम्भ की दीवारें कई जगह से बदरंग हो गई है। ऐसे में इसकी समय-समय पर सफाई होना आवश्यक है।
पुरातत्व विभाग के अधिकारियों से जब विजय स्तम्भ के ताले खुलने के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि वह इस बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता। उच्च अधिकारियों के आदेश है। ताला कब खुलेगा यह कह नहीं सकते।
Updated on:
10 Mar 2026 09:50 am
Published on:
10 Mar 2026 09:49 am
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