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Vedic Culture– एक ऐसी पाठशाला जहां दी जाती है वैदिक संस्कृति के साथ नि:शुल्क आधुनिक शिक्षा

चूरू (सरदारशहर). इंग्लिश मीडियम की चकाचौंध में कहीं ना कहीं हम अपनी प्राचीन संस्कृति और हमारी प्राचीन शिक्षा पद्धति को भी भुलाते जा रहे हैं। इसी का नतीजा है कि आज के समय में हर दूसरा बच्चा अवसाद से ग्रसित है। लेकिन आज भी कुछ जगह ऐसी है जहां हमारी संस्कृति से बच्चों को जोड़ा जा रहा है। प्राचीन ग्रन्थों में जैसी गुरु-शिष्य परंपरा का जिक्र मिलता है, वह आज भी सरदारशहर में सांस ले रही है।

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चूरू

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Vijay

Mar 04, 2022

Vedic Culture-- एक ऐसी पाठशाला जहां दी जाती है वेदिक संस्कृति के साथ नि:शुल्क आधुनिक शिक्षा

Vedic Culture-- एक ऐसी पाठशाला जहां दी जाती है वेदिक संस्कृति के साथ नि:शुल्क आधुनिक शिक्षा

चूरू (सरदारशहर). इंग्लिश मीडियम की चकाचौंध में कहीं ना कहीं हम अपनी प्राचीन संस्कृति और हमारी प्राचीन शिक्षा पद्धति को भी भुलाते जा रहे हैं। इसी का नतीजा है कि आज के समय में हर दूसरा बच्चा अवसाद से ग्रसित है। लेकिन आज भी कुछ जगह ऐसी है जहां हमारी संस्कृति से बच्चों को जोड़ा जा रहा है। प्राचीन ग्रन्थों में जैसी गुरु-शिष्य परंपरा का जिक्र मिलता है, वह आज भी सरदारशहर में सांस ले रही है। वेद वेदांग ऋ षिकुल ब्रह्मचर्या आश्रम में बटुक यानी छात्र वेद-वेदांग, ज्योतिष, कर्मकांड के साथ आधुनिक शिक्षा का भी विद्याभ्यास करते हैं। वर्तमान में ऋ षिकुल ब्रह्मचारी आश्रम में 51 बटुकों को शुक्ल यजुर्वेद पढाया जाता है। कक्षा पांच पास बच्चों को यहां दाखिला देते हैं, जिसे पांच साल तक वेद-वेदांग की पढ़ाई कराते हैं। यहां सौ से अधिक विप्र बटुक वेद पढ़कर कर्मकांड के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेंगे। माथे पर तिलक-त्रिपुंड, गले में रुद्राक्ष, तुलसी की कंठी और कंधे पर पीतांबरी दुपट्टा धारण किए कर्मकांडी बटुक रुद्रहोम, शतचंडी यज्ञ, पूजा, कर्मकांड, विवाह, ज्योतिष, पंचाग और अन्य संस्कार आचार्य के तौर पर कराने लगेंगे। यहां पर पढ़ कर निकले सैकड़ों बच्चे अब अलग-अलग क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं।
बच्चों के दूध के लिए रखते हैं देसी गाय
बच्चों को देसी गाय की महिमा का मालूम हो इसलिए आश्रम में ही देसी गाय रखी जाती है। और उनका महत्व इन बच्चों को बताया जाता है और इन बच्चों से गौ सेवा भी करवाई जाती है। गायों द्वारा दिया जाने वाला दूध इन बच्चों के ही खाने-पीने के काम आता है। यहां पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा लगाई गई है। यहां पर राजस्थान का एकमात्र नौ कुंडीय हवन यज्ञ स्थल बनाया गया है जो यहां पर पढऩे वाले बच्चों के पढ़ाई में सहयोग करता है। इसके अलावा यहां पर एक बालाजी का मंदिर और शिवलिंग भी स्थापित किया गया है। जहां हर और छोटे-छोटे बच्चे पीले वस्त्र धारण की एक हाथ में माला वहीं दूसरे हाथ में धार्मिक ग्रंथ लिए सिर्फ भगवान का स्मरण ही कर रहे हैं। यहां पर बच्चों को पढ़ाई के साथ साथ खेल प्रतियोगिताए होती हैं ताकि बच्चों का शारीरिक विकास भी ना रुके। ऋ षिकुल आश्रम के संचालकों ने बताया कि इस आश्रम को चलाने के लिए सरकार और भामाशाहो के सहयोग की जरूरत है। संस्था के संस्थापक बालकृष्ण कौशिक ने बताया कि यह विद्यालय राजस्थान संस्कृत अकादमी, जयपुर से मान्यता प्राप्त है। सम्पूर्ण वेद का अध्ययन पांच वर्षों में पूर्ण होता हैं। उसके बाद बटुकों को वेद विभूषण की उपाधि प्रदान की जाती हैं तथा प्रत्येक वर्ष वेद विधार्थी को 6 000 रुपये छात्रवृत्ति दी जाती हैं तथा अकादमी द्वारा एक वेदध्यापक की नियुक्ति की गई हैं। इस आश्रम में बटुकों को किसी प्रकार का कोई शुल्क नहीं देना पड़ता।

कक्षा 6 से 12 तक राजस्थान शिक्षा बोर्ड की पढ़ाई भी
बच्चे शिक्षा की मूल धारा से भी वंचित न रहे इसके लिए बच्चों को कक्षा 6 से 12 तक राजस्थान शिक्षा बोर्ड की पढ़ाई भी करवाई जाती है और कक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को राजस्थान शिक्षा बोर्ड के परीक्षा दिलवाई जाती है। 2017 में इस विद्यालय में पढऩे वाले एक बच्चे ने राजस्थान में द्वितीय स्थान प्राप्त किया था। पण्डित ओमप्रकाश शास्त्री ने बताया कि श्री पंडित परिषद की ओर से संचालित श्री सप्तर्षि वेद वेदांग ऋषिकुल ब्रह्मचर्या आश्रम की स्थापना सरदारशहर में 2007 में की गई। यह राजस्थान का एकमात्र ऋ षिकुल है जंहा वेद वेदांग के साथ आधुनिक शिक्षा भी दी जाती है यह चूरू जिले का एक मात्र वेद विद्यालय हैं। समिति के अध्यक्ष मुखराम नाथोलिया ने बताया ऋषिकुल के छात्रों को संस्कारों का भी पूरा ज्ञान दिया जाएगा। बटुक अंकित कुमार शर्मा ने बताया कि पाश्चात्य संस्कृति के साथ साथ हमारी खुद की संस्कृति का भी हमें बचाए रखना चाहिए।

बटुकों (छात्रों ) की दिनचर्या
ऋषिकुल में विद्यार्थी सुबह 4 से 5 बजे तक नित्यकर्म-स्नान आदि, सुबह 5 से 5.45 बजे तक संध्या वंदन और हवन, सुबह 5.45 से 6 .15 बजे तक महापुरुष, नदी, तीर्थ व ईश वंदना, सुबह 6 .15 से 8 बजे तक वेद स्वाध्याय, सुबह 8 से 8 .30 बजे तक आरती व प्रार्थना, सुबह 8 .30 से 9 बजे तक स्वल्पाहार, सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक वेदपाठ, दोपहर 12 से 12.30 बजे तक मध्याह्न संध्या, दोपहर12.30 से 1.30 बजे तक भोजन एवं विश्राम, दोपहर 1.30 से शाम 5 बजे तक वेद, आधुनिक शिक्षा का अध्ययन, शाम 5 से 6 .15 बजे तक खेलकूद, शाम 6 .15 से 7.45 बजे तक सायं हवन और संध्या वंदन आरती, शाम 7.45 से 8 .15 बजे तक स्वाध्याय,रात 8 .15 से 9 बजे तक भोजन, रात 9 से 9.15 बजे तक भ्रमण, रात 9.15 से 9.45 बजे तक लेखन कार्य, रात 9.45 से 10 बजे तक रात्रि प्रार्थना, दीप विसर्जन आदि कार्य किए जाते है।