
आचार्य महाश्रमण ने कही ये बड़ी बात, आप भी जाने...
लाडनूं. जैन विश्व भारती के नवनिर्मित महाश्रमण विहार में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के आचार्य महाश्रमणजी ने सोमवार को प्रात:कालीन मंगल प्रवचन कार्यक्रम में कहा कि आदमी को अपने जीवन में ईमानदारी रखने का प्रयास करना चाहिए। जीवन में नैतिकता व ईमानदारी हो तो जीवन की पवित्रता बनी रह सकती है। आदमी को झूठ बोलने और चोरी करने से बचने का प्रयास करना चाहिए। त्याग की भावना नहीं होने के कारण आदमी गलत तरीके से अर्थार्जन का प्रयास करता है। जिस धन पर दूसरे का हक हो, उसे रख लेना भी एक प्रकार की चोरी ही होती है। टैक्स नहीं चुकाना भी एक प्रकार की चोरी है।
जिस धन पर अपना अधिकार नहीं और उसे रख लिया जाए तो वह बात भी चोरी-सी प्रतीत होती है। आचार्य ने कहा कि संतों के चरण जिस धरती पर पड़ते हैं, वह परम सौभाग्यशाली होती है। मेरा जैन विश्व भारती में प्रवास हो रहा है। इस धरती पर भी परम पूज्य गुरुदेव तुलसी और परम पूज्य आचार्य महाप्रज्ञ के चरणकमल टिके थे। जैन विश्व भारती द्वारा का शिक्षा, संस्कार व साहित्य के क्षेत्र कितने-कितने उपक्रम चल रहे हैं। यह मानों जय-कुंजर हाथी के समान विशालकाय है। स्वागत समारोह के उपक्रम में सर्वप्रथम लाडनूं प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष शांतिलाल बरमेचा, स्वागताध्यक्ष राकेश कठोतिया, जैन विश्व भारती के अध्यक्ष मनोज लूणिया, महामंत्री प्रमोद बैद, जैन विश्व भारती मान्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़, समणी नियोजिका अमलप्रज्ञा व उमेशसिंह बोकडिय़ा ने अपनी अभिव्यक्ति प्रस्तुत की। समणीवृंद तथा पारमार्थिक शिक्षण संस्था की बहनों द्वारा गीत का संगान किया गया। इस दौरान जैन विश्व भारती के पदाधिकारियों ने आचार्य महाप्रज्ञ की अंग्रेजी की चार पुस्तकें पूज्यप्रवर के समक्ष लोकार्पित की गई। पुस्तकों के संदर्भ में मुख्यनियोजिका साध्वी विश्रुतविभा ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। कार्यक्रम के उपरान्त आचार्य जैन विश्व भारती परिसर में आचार्य महाश्रमण षष्टीपूर्ति व साध्वीप्रमुखा के अमृत महोत्सव के संदर्भ में नवनिर्मित साहित्य सदनम् में पधारे। इस भव्य सदनम् का शुभारम्भ आचार्य के मंगलपाठ से हुआ। आदर्श साहित्य विभाग के संयोजक पुखराज बड़ोला व सह संयोजक विजयराज आंचलिया ने भवन के विषय में अवगति दी। आचार्य ने उसका अवलोकन करने के पश्चात उन्होंने कहा कि यह साहित्य सदनम् साहित्य की संपूर्ण जानकारी व नव्यता-भव्यता लिए हुए प्रदर्शित हो रहा है। इससे साहित्य की विशेष खुराक मिलती रहे। बहिर्विहार से समागत साध्वीवृन्द ने गुरुचरणों में हस्तनिर्मित कलाकृतियां भेंट की।
गृहस्थ के जीवन में त्याग की चेतना जरूरी
आचार्य महाश्रमण ने व्यक्ति की विभिन्न सम्पदाओं का वर्णन करते हुए त्याग का महत्व बताया। उन्होंने यहां जैन विश्व भारती स्थित महाश्रमण विहार में अपने नियमित प्रवचन में आठ प्रकार की सम्पदाएं बताई। जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में जैन विश्व भारती के अध्यक्ष मनोज लूणियां, मंत्री प्रमोद बैद, शांतिलाल बरडिय़ा, आचार्य महाश्रमण प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष शांतिलाल बरमेचा, राकेश कठोतिया, उम्मदसिंह बोकडिय़ा ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए और आचार्यश्री महाश्रमण से लाडनूं में योगक्षेम वर्ष मनाए जाने के समय की घोषणा करने तथा साध्वीप्रमुखा कनकप्रभा की अवस्था को देखते हुए लाडनूं में स्थायी प्रवास की व्यवस्था फरमाए जाने का आग्रह किया। जैन विश्व भारती के अध्यक्ष मनोज लूणिया व अन्य पदाधिकारियों ने आचार्य महाप्रज्ञ कृत चार पुस्तकों के अंग्रेजी संस्करणों का विमोचन करवाया। मुख्य नियोजिका साध्वी ने इन पुस्तकों के सृजन और अनुवाद में सहयोगकर्ताओं के बारे में बताते हुए विषयवस्तु की जानकारी
प्रस्तुत की।
Published on:
18 Jan 2022 08:11 am
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