
ठीक इसके अगले दिन 4 मार्च को भी राहुल कस्वां ने अपनी नाराज़गी दर्ज कराई। इस बार उन्होंने कई सवाल उठाते हुए लिखा, ''आखिर मेरा गुनाह क्या था...? क्या मैं ईमानदार नहीं था ? क्या मैं मेहनती नहीं था ? क्या मैं निष्ठावान नहीं था ? क्या मैं दागदार था ? क्या मैंने चूरू लोकसभा में काम करवाने में कोई कमी छोड़ दी थी ? मा. प्रधानमंत्री जी की सभी योजनाओं के क्रियान्वयन में, मैं सबसे आगे था। ओर क्या चाहिए था ? जब भी इस प्रश्न को मैंने पूछा, सभी निरुत्तर और निःशब्द रहे। कोई इसका उत्तर नहीं दे पा रहा। शायद मेरे अपने ही मुझे कुछ बता पाएं।''
ये भी पढ़ें : कांग्रेस या आरएलपी? BJP से टिकट कटने के बाद सांसद राहुल कस्वां को लेकर आ गई बड़ी खबर
दिल्ली में नेताओं से मुलाक़ात
... तो क्या 'दल- बदल' करेंगे कस्वां?
ये भी पढ़ें : चर्चा में BJP की ये लिस्ट, भजनलाल-दिया कुमारी की जगह लेंगे ये नेता ! बालकनाथ को भी बड़ा ज़िम्मा
कांग्रेस-आरएलपी के खोले द्वार
कांग्रेस ने दिया ऑफर चूरू से टिकट गंवाने के बाद कांग्रेस ने राहुल कस्वां को टिकट ऑफर किया है। बीकानेर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष विशनाराम सियाग ने एक्स प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर लिखा कि 'अगर राहुल कस्वां कांग्रेस से चुनाव लड़े तो जीत 100% पक्की।' जिसके बाद कस्वां के कांग्रेस में शामिल होने को लेकर कयास लगाए जा रहे है।
अब क्या होगा? पूरे क्षेत्र की नजर
ये भी पढ़ें : राजस्थान में यहां एक साथ झूम उठे BJP-Congress-RLP नेता, डोटासरा ने भी मचा डाला धमाल
वसुंधरा के नजदीक है कस्वां
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के काफी नजदीक रहे रामसिंह कस्वां ही जिले के एकमात्र नेता है, जिनके विधानसभा क्षेत्र की चुनावी सभा में राजे आई। इससे पहले भी जिले में राजे की हुई बड़ी सभाओं के आयोजनों के कर्णधार कस्वां ही रहे। राजे के पिछले जन्मदिन पर सालासर में हुई सभा में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह सहित कई बड़े नेता आए थे तो रामसिंह कस्वां ने सभा आयोजन में अग्रणी भूमिका निभाई थी।
राजे की सभाओं से दूर रहे राठौड़
राजे की बीदासर के निकटवर्ती गांव बम्बू तथा सालासर में हुई सभा में पूर्व प्रतिपक्ष नेता राजेन्द्र राठौड़ व जिले के भाजपा संगठन ने दूरी बनाए रखी तो विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में राजे की हुई सभा से भी राठौड़ नहीं गए।
कभी हुआ करती थी राम-लखन की जोड़ी
करीब डेढ दशक पूर्व तक पूर्व सांसद रामसिंह कस्वां व राजेन्द्र राठौड़ एक थे। यहां दोनों के बीच संबंधों को राम लखन की जोड़ी बताया जाता था। इसके बाद बात ऐसी बिगड़ी कि दोनों की पार्टी एक लेकिन राह दो हो गई। समय के साथ तल्खी इतनी बढ़ गई कि दो लोकसभा चुनाव व विधानसभा चुनाव होने के बावजूद भी ये कभी एक मंच पर नजर नहीं आए।
भाजपा जिला संगठन में राठौड़ का वर्चस्व रहा, लेकिन यहां भाजपा दो खेमों में बट गई। कभी कभार पार्टी की बैठकों व कार्यक्रमों में राठौड़ व राहुल एक मंच पर नजर आए, लेकिन आपस में बातचीत करते नहीं देखा गया।
Published on:
05 Mar 2024 11:50 am

बड़ी खबरें
View Allचूरू
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
