
चकबस्त की शायरी ने आज़ादी में निभाई भूमिका
चूरू. २०वीं सदी के महान देश भक्त उर्दू शायर पंडित बृज नारायण चकबस्त को गुरुवार को उनकी देश भक्ति शायरी के माध्यम से खिराज ए अक़ीदत श्रद्धांजलि दी गई। नगर श्री शोध संस्थान में अमन ट्रस्ट की तरफ से आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जयपुर पुलिस मुख्यालय के पुलिस उपाधीक्षक हूक्मसिंह ज़मीर ने कहा कि चकबस्त की शायरी ने मुल्क की आज़ादी में बहुत बड़ा रोल अदा किया था। उन्होंने अपने इस शेर के ज़रिए चकबस्त को याद किया कि शहीद होने के जुनून में सिपर में सर रखते हैं, ख्वाइशें क़त्ल है कातिलों की बस्ती में घर रखते हैं। हाजी अब्दुल सत्तार अंसारी ने चकबस्त के शेर किस तरह बन में आंखों के तारे को भेज दूं। जोगी बना के राज दुलारे को भेज दूं के ज़रिए चकबस्त को खिराज ए अक़ीदत पेश की। डा. शमशाद अली ने मशहूर उर्दू शायर पंडित चकबस्त की जि़ंदगी और देश भक्ति पर व्याख्यान दिया। अब्दुल मन्नान मज़हर ने उर्दू अदब में आज भी जिनका मकाम है, जिनका वतन के नाम पे काफी कलाम है सुनाकर समां बांधा। एडवोकेट सद्दाम हुसैन ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को भी श्रद्धांजलि दी। अमन ट्रस्ट के अध्यक्ष उस्मान अंसारी ने सभी का आभार व्यक्त किया। उर्दू व्याख्याता असगर अली ने देश भक्ति गीत प्रस्तुत कर सब को मंत्र मुग्ध कर दिया। विशिष्ठ अतिथि एडवोकेट सुरेश कल्ला, हज कमेटी के जिला अध्यक्ष हाजी यूसुफ खान चौहान थे। इस अवसर पर महबूब खान, श्याम सुंदर शर्मा, विजयकांत शर्मा, खादिम अली, रमेश सोनी, इरफान, आमिर अंसारी, एडवोकेट सद्दाम हुसैन, मोहसिन, जमील अहमद, निसार अहमद, अज़ीज़ खान, साजिद खान, मुबारिक, महताब खान, सहित काफी उर्दू के शैदाई मौजूद थे।
Published on:
01 Feb 2019 01:29 pm
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