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सियासत में संयोग: चूरू-हिसार सांसदों ने साथ BJP छोड़ थामा कांग्रेस का दामन, एक के पिता अब भी भाजपा में

इसे संयोग कहें या सियासत...। इन दिनों राजस्थान से लेकर देश की सियासत में चूरू और हिसार सबसे ज्यादा चर्चा में है। दोनों सांसदों ने एक साथ भाजपा का दामन छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है।

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चूरू

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Santosh Trivedi

Mar 14, 2024

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चूरू। इसे संयोग कहें या सियासत...। इन दिनों राजस्थान से लेकर देश की सियासत में चूरू और हिसार सबसे ज्यादा चर्चा में है। दोनों सांसदों ने एक साथ भाजपा का दामन छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है। अब दोनों ने अपने पुराने दलों को सियासी मैदान में चुनौती देने की तैयारी भी कर ली है।

पड़ोसी राज्य हरियाणा का जिला हिसार चूरू जिले से सीधा जुड़ा है तो यहां की राजगढ़ तहसील क्षेत्र में रोटी-बेटी का व्यवहार भी है। जिले की राजगढ़ क्षेत्र के लोगों की तो हिसार रोज आवाजाही होती है। मार्केटिंग हब माने जाने वाले हिसार से यहां के लोग प्रतिदिन मार्केटिंग के लिए आवागमन करते हैं तो चिकित्सा सेवा की दृष्टि से यहां के लोग हिसार जाना पसंद करते हैं। इसलिए ही हिसार और चूरू की राजनीति आबोहवा भी आपस में घुल मिलती है।



चूरू सांसद राहुल कस्वां और हिसार के बृजेंद्र सिंह दोनों में यह भी समानता है कि इन्हें अपने पिता से राजनीतिक विरासत मिली हैं। चूरू के पूर्व सांसद रामसिंह कस्वां से राहुल को तो बृजेन्द्र सिंह को अपने पिता केन्द्रीय मंत्री रहे राज्यसभा सांसद चौधरी बीरेन्द्रसिंह की विरासत से राजनीति में आने का अवसर मिला। पिछला लोकसभा चुनाव दोनों से भाजपा से लड़ा और संसद में पहुंचे, लेकिन इस बार पाला बदलकर कांग्रेस में शामिल हो गए तो उन्हें कांग्रेस ने टिकट भी दे दिया।

राजनीति परिवार से आने वाले IAS अधिकारी बृजेंद्र सिंह नौकरी छोड़कर भाजपा में आए और 2019 के चुनाव में उन्हें पार्टी ने टिकट दिया तो हिसार में पहली बार भाजपा से चुनाव जीता और बृजेंन्द्र सांसद बने। हिसार संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से राजनीति की पहली परीक्षा पास करने वाले बृजेन्द्र सिंह ने इससे पूर्व 1998 में आईएएस परीक्षा में 9वां स्थान प्राप्त करते हुए स्वर्णिम सफलता प्राप्त की। तो चुनाव से राजनीति में आए सिंह ने शानदार सफलता प्राप्त की। जबकि उनका सिविल सेवा क्षेत्र में काम करने का लंबा अनुभव रहा है।

हरियाणा की राजनीति में दबदबा रखने वाले सर छोटूराम परिवार से जुड़े बृजेन्द्र सिंह के पिता वीरेन्द्र सिंह का नाता कांग्रेस से रहा। हरियाण में हुड्डा सरकार से खिन्न हुए वीरेन्द्र सिंह 2014 में भाजपा में शामिल हो गए और इस चुनाव में सांसद बने तो केन्द्र सरकार में मंत्री भी रहे। भाजपा में मंत्री रहे लेकिन उम्र को देखते हुए इनके पुत्र आईएएस की नौकरी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए और संसद में पहुंचे।



पूर्व केन्द्रीय मंत्री और हरियाणा ने नेता वीरेन्द्र सिंह अब भी भाजपा में है लेकिन कांग्रेस में शामिल हुए उनके पुत्र बृजेन्द्र सिंह को अब कांग्रेस ने हिसार लोकसभा का प्रत्याशी बनाया है। दो पीढ़ी शीर्ष राजनीति में रहे बीरेन्द्रसिंह फिलहाल भाजपा में जबकि वे इससे पूर्व वे कांग्रेस के कई प्रदेशों में प्रभारी भी रह चुके हैं। जबकि बृजेंद्रसिंह की मां प्रेमलता ने उचाना कलां विधानसभा से भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ा और जीता। अब बृजेन्द्र सिंह राजनीति विरासत को संभाले हुए हैं।

आने वाले लोकसभा चुनाव से पूर्व ही भाजपा को बाय-बाय करते हुए हिसार के सांसद बृजेन्द्रसिंह दस मार्च को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मौजूदगी में हाथ का दामन थाम लिया। सिंह ने भाजपा से त्याग पत्र दिया और उन्होंने सोशल मीडिया पर ही अपने इस्तीफे की जानकारी दी। जबकि लोकसभा चुनाव में भाजपा से उनका टिकट कटना तय माना जा रहा था तो उन्होंने कांग्रेस में जाने का फैसला ले लिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी मजबूरियों का हवाला दिया और भाजपा के मिले सहयोग के प्रति उन्होंने केन्द्रीय नेतृत्व के प्रति आभार भी व्यक्त किया।