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Churu : रबी फसल पर मौसम परिवर्तन का असर, किसानों की बढ़ी चिंता, जानें किस फसल पर पड़ेगा विपरीत असर

किसानों का कहना है कि तापमान में अचानक वृद्धि और तेज धूप के कारण फसल पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे समय में खेतों में पर्याप्त नमी बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि दाने का भराव अच्छा हो और उत्पादन प्रभावित न हो।

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सादुलपुर. गत एक सप्ताह से मौसम में आए बदलाव के कारण सर्दी का असर कम हो गया है और दिन में तेज धूप का प्रभाव बढ़ने लगा है। मौसम परिवर्तन का सीधा असर रबी की मुख्य फसल गेहूं पर पड़ रहा है। तहसील के सिंचित ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों गेहूं की फसल बालियां निकलने और दाना बनने की अवस्था में है। किसानों का कहना है कि तापमान (Temperature) में अचानक वृद्धि और तेज धूप के कारण फसल पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे समय में खेतों में पर्याप्त नमी बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि दाने का भराव अच्छा हो और उत्पादन प्रभावित न हो। विशेषकर हल्की भूमि वाले क्षेत्रों में किसानों को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। किसानों द्वारा प्रतिदिन खेत का निरीक्षण कर जरूरत अनुसार सिंचाई की जा रही है।

गेहूं में संभावित रोग और बचाव के उपाय
किसान नरेंद्र सिंह मेहरा, महेंद्र सिंह, सीताराम, चंद्रभान ने बताया कि मौसम परिवर्तन के साथ गेहूं की फसल में विभिन्न रोगों की आशंका भी बढ़ गई है। किसानों ने संभावित रोगों को लेकर सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है।

पीला रतुआ
इस रोग में पत्तियों पर पीली धारियां या धब्बे दिखाई देते हैं, जिससे पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है। लक्षण दिखाई देने पर समय पर फफूंदनाशक का छिड़काव करना आवश्यक है।

कंडुआ एवं करनाल बंट रोग
इन रोगों में बालियों के दाने काले पड़ जाते हैं, जिससे गुणवत्ता और उत्पादन दोनों प्रभावित होते हैं। प्रमाणित बीज का उपयोग तथा संतुलित उर्वरक प्रबंधन से इन रोगों से बचाव संभव है।

पत्तियों का सूखना
कुछ स्थानों पर पत्तियों के सिरे सूखने की समस्या भी सामने आती है, जिससे पौधा कमजोर पड़ जाता है। समय पर सिंचाई और सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव लाभकारी साबित होता है।

खाद एवं पोषण प्रबंधन पर विशेष ध्यान
किसानों के अनुसार वर्तमान समय में आवश्यकता अनुसार यूरिया की टॉप ड्रेसिंग करनी चाहिए। साथ ही जिंक, सल्फर एवं अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव करने से पौधे स्वस्थ रहते हैं और दाने का भराव बेहतर होता है।अधिक नाइट्रोजन देने से फसल गिरने की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए संतुलित मात्रा का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। तेज धूप और बढ़ते तापमान को देखते हुए सुबह या शाम के समय सिंचाई करना अधिक लाभकारी रहेगा, जिससे पानी का वाष्पीकरण कम होगा और फसल को पर्याप्त नमी मिल सकेगी।

सजगता से बेहतर उत्पादन की उम्मीद
ग्रामीण किसानों ने विश्वास जताया है कि यदि समय पर सिंचाई, संतुलित खाद प्रबंधन और रोग नियंत्रण के उपाय अपनाए जाएं, तो इस वर्ष गेहूं की अच्छी पैदावार की संभावना है। मौसम में आए बदलाव के बीच किसानों की सजगता ही बेहतर उत्पादन की कुंजी साबित होगी।