मनीष मिश्रा
चूरू. संस्कारों के लिए जहां वैदिक शिक्षा जरूरी हैं वहीं कॅरियर के लिए आधुनिक शिक्षा भी जरूरी है। जी हां! चूरू में गीता प्रेस का देश में एकलौता ऐसा गुरुकुल है जहां करीब 90 बच्चों को वैदिक के साथ आधुनिक शिक्षा दी जाती है। यह गुरुकुल धर्मस्तूप से कुछ दूरी पर है, जहां सुबह-शाम वैदिक मंत्र, हवन, संध्या सहित संस्कृत में संवाद करते बच्चे नजर आ जाते हैं।
गुरुकुल में हिन्दी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, संस्कृत सहित बच्चों को नियमित तौर पर गीता, वेद, उपनिषद, व्याकरण के अध्ययन सहित हवन, आरती, पूजा कराई जाती है। सुबह के समय बच्चों को योगाभ्यास भी नियमति तौर पर कराया जाता है। गुरुकुल के प्रबंधक ईश्वर सिंह राठौड़ ने बताया कि गुरुकुल से शिक्षा प्राप्त कई विद्यार्थी देश के नामी कथावाचकों में शुमार हंै। इसके अलावा उच्च सरकारी पदों पर भी कार्यरत हैं। बच्चों को न्यूनतम शुल्क पर खाने और रहने की सुविधा गुरुकुल में दी जाती है।
जब भगवान ने गीता प्रचार का दिया आदेश
लोगों के अनुसार सेठजी के नाम से प्रसिद्ध चूरू जयदयाल गोयनका कमरे में सो रहे थे। तभी भगवान प्रकट हुए और कहा कि गीता का ज्ञान लोग भूलते जा रहे हैं इसलिए गीता का प्रचार-प्रसार करो। इस पर गोयनका ने ही गीता प्रेस की स्थापना कर डाली। बच्चों को अच्छे संस्कार देने के लिए 1923 में धर्म स्तूप के पास गुरुकुल की स्थापना की गई। गुरुकुल में शिक्षा, वस्त्र, शिक्षण सामग्रियां आजतक नि:शुल्क है। उनसे भोजन का खर्च भी नाम मात्र का लिया जा रहा है।
गुरुकुल में 12वीं तक की कक्षाएं
राठौड़ ने बताया कि गुरुकुल की स्थापना के बाद इसे संत रामसुखदास महाराज व हनुमान प्रसाद पौद्दार ने सिंचित व पोषित किया। गुरुकुल का संचालन गोविन्द भवन गीता प्रेस कोलकाता कार्यालय से किया जाता है। गुरुकुल कक्षा तीन से 12वीं तक की कक्षाएं प्रतिदिन लगती हंै। जहां पर आधुनिक के साथ वैदिक शिक्षा दी जाती है।
नियमों की पालना जरूरी
सर्दी, गर्मी हो या बरसात गुरुकुल में हर क्रिया का समय निर्धारित है। सभी बच्चे सुबह सूर्यादय से पहजे उठते हैं और संध्या को हवन पूजन के बाद भोजन ग्रहण करते हैं। गुरुकुल में बच्चे कक्षा 12वीं में संस्कृत व गणित सहित कुछ अन्य विषय ही ले सकते हैं। यहां पर विज्ञान व वाणिज्य वर्ग के विषय नहीं हैं।