मनीष मिश्रा.
चूरू. जिस उम्र में युवा अपने भविष्य को सवारने के सपने देखता है उसी उम्र में आज के कई युवा अपराध का रास्ता चुन अपने भविष्य को अंधकार की तरफ धकेल रहे हैं। लेकिन अपराध की तरफ जाने के लिए क्या कारण रहे हैं, इस पर कोई ध्यान नहीं देता। शहर के ही 74 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षक ने जिला जेल में बंद 210 बंदियों पर शोध कर यह पता करने का प्रयास किया कि आखिर अपराध की दुनिया की तरफ आज का युवा क्यो इतना आकर्षित हो अपने भविष्य को उजाड़ रहा है। रिटायर्ड शिक्षक ओमप्रकाश तंवर के इस शोध में कई चौकाने वाले खुलासे हुए हैं, शोध में सामने आया कि अपराध के दलदल में फंसने वालो में शहर के बजाए ग्रामीण क्षत्रों से ताल्लुक रखने वाले युवाओं की संख्या अधिक थी। हालांकि युवाओं को अपने किए के ऊपर पश्चतावा है और वो इस दलदल से निकलने के लिए प्रयास भी कर रहे हैं। शोध में सामने आया कि बंदियों में 18 से 35 आयु वर्ग के कुल 163 युवा शामिल थे। शोध में सामने आया कि अपराध में होने वालों में 162 ग्रामीण क्षेत्र के व 48 शहरी क्षेत्रों के शामिल थे। यानि 77 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों के थे, जो कि विभिन्न अपराधों के आरोपी थे।
अपराध में शामिल होने के कारण
गलत संगत, पारिवारिक कलह, कानूनी जानकारी का अभाव, भावावेश, गांव की राजनीति, सोशल मीडिया, बेरोजगारी व आर्थिक तंगी, पति या पत्नी का दूसरे से अवैध संबंध, पुरानी रंजिश, पुलिस का झूठे मुकदमों में फंसाना आदि मुख्य कारण सामने आए।
शोध में शामिल
पुरुष- 198
महिला- 12
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बंदियों की आयु
वर्ग संख्या
18 से 25 85
26 से 30 50
31 से 35 28
36 से 40 21
45 से 50 9
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शैक्षिक योग्यता
निरक्षर- 36
कक्षा पांच तक शिक्षित- 39
कक्षा आठ तक शिक्षित- 31
कक्षा दस तक शिक्षित – 30
12वीं तक शिक्षित- 52
स्नातक- 18
अधिस्नातक- 2
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परिवार में शिक्षा की िस्थति
1. पिता शिक्षित- 93
अशिक्षित- 117
2. माता शिक्षित- 44
अशिक्षित- 166
3. भाई-बहन शिक्षित- 97
अशिक्षित- 113
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बंदियों के विवाह की िस्थति
विवाहित- 93
अविवाहित- 106
तलाकशुदा- 4
विधवा- 5
विधुर- 2
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अपराध की प्रवृत्ति
पोक्सो- 60
बलात्कार- 18
एनडीपीएस- 44
हत्या- 51
अन्य अपराध- 37
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जेल में रहने की अवधि
छह माह से अधिक- 68
एक वर्ष से- 35
दो वर्ष से- 46
तीन वर्ष से- 25
चार वर्ष से 26
पांच व उससे अधिक- 10
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इनका कहना है….
जेल में बंदियों की मनोिस्थति जानने के लिए शोध कार्य किया था, जिसमें 18 से 35 आयु वर्ग की संख्या अधिक रही है। युवा अब अपराध के दलदल से निकलना चाहते हैं। जेल में पहले बंदियों के पास कुछ विशेष काम नहीं होता है, इसको ध्यान में रखते हुए लोगों का सहयोग लेते हुए पुस्तकालय शुरू करवाया गया। अधिकांश युवा पुस्तकालय में समय बिताते है। इससे अपराध को लेकर सोच बदलने लगी है।
ओमप्रकाश तंवर, सेवानिवृत्त शिक्षक व शोधकर्ता, चूरू।