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Churu News: कोर्ट के आदेश के बावजूद बिजली निगम ने नहीं दिया क्लेम, एसई ऑफिस का कुर्की वारंट जारी

करंट से 11 साल के बालक की मौत के मामले में एक वर्ष बाद भी क्लेम का पैसा नहीं देने पर अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने बिजली निगम के अधीक्षण अभियंता के कार्यालय का कुर्की वारंट जारी कर दिया।

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चूरू

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Santosh Trivedi

Jun 27, 2024

Rajasthan High Court

चूरू। बिजली निगम की तानशाही पर कड़क रूख अपना लिया। करंट से 11 साल के बालक की मौत के मामले में एक वर्ष बाद भी क्लेम का पैसा नहीं देने पर अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने बिजली निगम के अधीक्षण अभियंता के कार्यालय का कुर्की वारंट जारी कर दिया।

कोर्ट का नाजिर जब कुर्की करने के लिए एससी ऑफिर पहुंचा तो निगम के कर्मचारियों के हाथ-पांव फूल गए। निगम ने न्यायालय से 30 जून तक की मोहल्लत मांगी है। 30 जून तक क्लेम का पैसा ब्याज सहित जमा करवाने का आवेदन लिखित में पेश किया है। ऐसे में कुर्की टाल दी गई।

यह है मामला

एडवोकेट संजीव कुमार वर्मा ने बताया कि 26 दिसबर 2016 को शहर के वार्ड 32 निवासी सुल्तान प्रजापत ने कोतवाली थाना में मामला दर्ज करवाया कि 25 दिसबर को उसका 11 वर्षीय बेटा हेमंत घर की छत पर बैठा था। घर की छत के उपर से 11 हजार वॉल्ट की लाइन गुजर रही थी। जिससे हेमंत को करंट लग गया। जिसे गंभीर हालत में अस्पताल लेकर गये। जहां डॉक्टरों ने उसको मृत घोषित कर दिया। इस पर बिजली विभाग के खिलाफ एडीजे कोर्ट में सुल्तान प्रजापत व उसकी पत्नी ललिता देवी ने दावा किया। जिस पर कोर्ट ने 30 मई 2023 को बिजली विभाग के खिलाफ 4 लाख 77 हजार रुपए की क्षतिपूर्ति राशि देने के आदेष दिए थे।

एक वर्ष बाद भी नहीं दिया पैसा


न्यायालय के आदेश के बावजूद बिजली निगम ने पीड़ित पक्ष को क्षतिपूर्ति राशि नहीं दी। इसके बाद सुल्तान प्रजापत व ललिता देवी ने एडीजे कोर्ट में बिजली विभाग के खिलाफ वसूली के लिए इजराय पेश की। जिस पर एडीजे कोर्ट ने बिजली विभाग के खिलाफ चार लाख 77 हजार रुपए व ब्याज की राशि मिलाकर सात लाख 98 रुपए देने के आदेश दिए। इस आदेश के बावजूद पीड़ित पक्ष को पैसा नहीं दिया गया।

तब कोर्ट ने पीड़ित पक्ष की इजराय के आधार पर बिजली विभाग के एसई ऑफिस की सपंति को सीज करने के आदेश दिए। बुधवार कोर्ट की टीम बिजली विभाग के एसई ऑफिस को सीज करने पहुंची। जहां बिजली विभाग के एसई ने बताया कि क्षतिपूर्ति राशि की स्वीकृति का मामला उच्चाधिकारियों के पास विचाराधीन है। 30 जून तक रुपए जमा करवा दिये जाएग। पीड़ित पक्ष की ओर से पैरवी एडवोकेट संजीव कुमार वर्मा ने की।

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