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विदेशों में कभी चूरू के इस काम की बोलती थी तूती, मगर अब नहीं रहे ‘अच्छे दिन’

उद्योगपतियों की मानें तो वर्ष 2005 तक परवान पर रहा चूरू जिले का हैंडीक्राफ्ट उद्योग वर्ष दर वर्ष गिरता गया।

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Vishwanath Saini

Sep 28, 2016

विदेश में हैंडीक्राफ्ट के काम की वर्ष दर वर्ष घटी मांग ने चूरू जिले के इस उद्योग की कमर तोड़ दी है। ऐसे में कभी अपनी बारीक कारीगरी और सुंदरता के दम पर विदेशों में मशहूर रहा जिले का हैंडीक्राफ्ट उद्योग आज एक चौथाई रह गया है।

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उद्योगपतियों की मानें तो वर्ष 2005 तक परवान पर रहा ये उद्योग वर्ष दर वर्ष गिरता गया। आज विदेशों की डिमांड में 90 प्रतिशत की गिरावट आने से अब ये महज देश के बड़े महानगरों से आने वाली मांग पर टिका है। ऐसे में जिले में पहले की तुलना में उत्पादन एक चौथाई रह गया है।

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10 वर्ष पहले ये उद्योग 20-25 हजार लोगों के रोजगार का जरिया था। आज इस उद्योग से करीब पांच-छह हजार लोग जुड़े हैं। हैंडीक्राफ्ट उद्योग के क्षेत्र चूरू, रतनगढ़ व सरदारशहर में वहां के औद्योगिक क्षेत्रों व गली-मोहल्लों में करीब 300 छोटे-बड़े कारखाने हैं।

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यहां तैयार माल को ऑनलाइन शॉपिंग या एक्सपोर्टर के जरिए देश-विदेश में भेजा जा रहा है। कुछ लोग ऑर्डर मिलने पर माल तैयार कर बड़े उद्योगपतियों को देते हैं।

बदल गया रोजगार का जरिया

हैंडीक्राफ्ट उद्योग की मांग घटने से बेरोजगार हुए हजारों लोगों ने अपना रोजगार का जरिया बदल लिया। अधिकांश लोग लोहे का फर्नीचर बनाने के काम में लगे हैं। एक समय ऐसा था, जब शहर में तैयार हैंडीक्राफ्ट के सामान के रोजाना विदेशों के लिए कंटेनर भरे जाते थे। आज शहर में तीन-चार एक्सपोर्टर बचे हैं। जो डिमांड आने पर तैयार माल बाहर भिजवाते हैं। उद्योग में विदेशी मांग में 90 प्रतिशत की कमी आई है।

-विश्वनाथ सैनी, अध्यक्ष विश्वकर्मा उद्योग संघ, चूरू

जिले में अब तैयार अधिकांश माल देश के बड़े महानगरों के शोरूम में जाता है। महज 10 फीसदी माल विदेशों में भेजा जाता है। कुल मिलाकर पहले की तुलना में उत्पादन एक चौथाई रह गया है।

-अजीत भाऊवाला, मंत्री विश्वकर्मा उद्योग संघ, चूरू

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