
पारसनाथ जैन मंदिर की भूमि पर कर रहे निर्माण
सरदारशहर.
अखिल राजस्थान पुजारी महासभा विकास मंच आदि संगठनों ने उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर सोमनाथ मंदिर के पास स्थित पारसनाथ जैन मंदिर की भूमि को बचाने की मांग की है। उन्होंने ज्ञापन में लिखा कि पारसनाथ जैन मंदिर राजकीय वृत्ति प्राप्त मंदिरों में है।
उक्त मंदिर को राजश्री, बीकानेर ने संवत 1934 में 60 बीघा भूमि देवमूर्ति के नाम दी थी। तब से निरंतर उक्त भूमि आज तक देवमूर्ति के नाम ही चली आ रही है। उक्त भूमि में से 31 बीघा दो बिश्वा भूमि राजकीय अनन्य कार्यो के लिए आवाप्त की गई। उक्त भूमि में आजादी से पहले 1943 में लादूराम गोलछा ने कुण्ड निर्माण की ईजाजत तत्कालीन सरकार द्वारा चाही थी। जिसे विधि विरुद्ध मानते हुए इजाजत देने से इनकार कर दिया गया। आजादी के बाद भी समय-समय पर राज्य सरकार द्वारा की गई आदेशों में ऐसी भूमियों को मंदिर माफी भूमि की श्रेणी में रखा गया। किसी भी व्यक्ति को हस्तान्तरणीय अधिकार प्राप्त नहीं है। इस भूमि के संबंध में पुजारी महासभा ने 17 जुलाई 2012 को तत्कालीन उपखंड अधिकारी को ज्ञापन दिया था व 22 नवंबर 2012 को सहायक आयुक्त देवास्थान विभाग, बीकानेर को भी ज्ञापन दिया गया था।
जिस पर दोनों अधिकारियों ने इस भूमि को अतिक्रमण मुक्त रखने का आदेश दिया। तब से लेकर दिसम्बर 2018 तक किसी तरह की छेड़छाड़ इस भूमि से नहीं हुई। लेकिन तीन जनवरी 2019 को कुछ लोगों द्वारा पुन: इस भूमि पर कब्जे की नीयत के साथ निर्माण आदि करके कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। इस भूमि को भू-माफियाओं से बचाया जाए। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भू माफियाओ का कब्जा नहीं होने दिया जाएगा। महासभा इसके लिए संधर्ष करेगी। इस लेकर पुजारी महासभा राज्यव्यापी आंदोलन करेगी। इस अवसर पर पुजारी महासभा के प्रदेशाध्यक्ष डा. रघुवीर सिंह मुहाल, विकास मंच के अध्यक्ष एडवोकेट राजेन्द्रसिंह राज पुरोहित, तिलोकचन्द सुथार, दुर्गाराम माली, नवतरन मीणा, छात्रसिंह पींचा, रणजीत पींचा आदि उपस्थित थे।
Published on:
10 Jan 2019 12:13 pm
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