
चूरू.
रंगों का त्यौहार होली के कुछ ही दिन शेष बचे हैं। क्षेत्र के लोगों में होली की रंगत छाने लगी है। हर वर्ग होली को अपने-अपने अंदाज में मनाने का निर्णय किया है। परंपरागत तरीके से होली पर्व मनाने को लेकर हर वर्ग के चेहरे पर चमक दिखाई देने लगी है। लोगों ने पर्व को लेकर अभी से तैयारियां भी शुरू कर दी है। कोई बड़कुले, कोई चंग तो कई पारंपरिक रीति रिवाज निभाने सहित अनेक तैयारियों में जुटे गए हैं। इन्ही सब बातों से रूबरू कराती पत्रिका समाचार शृंखला खुल के खेलो होली।
पुरानी परंपराएं आज भी बरकरार है। वहीं रंगों के त्यौहार में आधुनिकता का प्रवेश कर गया है। बुजुर्ग जहां पुराने तरीके से होली खेलेंगे वहीं युवा डीजे की धुन पर नाचकर रंगों के त्यौहार का स्वागत करेंगे। बड़कुले बनाने वाली महिलाओं का कहना है कि होलिका दहन के समय इनकी पूजा की जाएगी और बाद में होलिका को समर्पित कर दिया जाएगा।
शहरी क्षेत्र में जहां अष्टमी से बड़कुलेे बनाए जाते हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में होली के करीब दस दिन पहले से ही बड़कुले बनाने शुरू गए हैं। हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार एकादशी के दिन घरों में ढाल तलवार बनाए जाते हंै। जिनकी पूर्णिमा के दिन माला बनाकर पूजा अर्चना कर उनको भोग लगाया जाता है। इसके बाद शुभ मुर्हूत में होलिका दहन किया जाता है।
''रंगों व खुशियों के इस त्योहार का हर वर्ष बेसब्री से इंतजार करते हैं। होली हंसी व ठिठोली का पर्व है। इसलिए इसको पूरे हर्षोल्लास से मनाती हूं। बाजार में बिकने वाले रंगों से किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं हो इसके लिए ब्रांडेड गुलाल का उपयोग करते हैं।''
टीना, चूरू
''होली पर्व उमंग व भाईचारे का पर्व है। परम्पराओं के अनुसार होली पर्व पर महिलाएं शाम के समय घरों के आगे बैठकर होली के गीत गाती है। होली में देवरानी अपनी जेठानी व ननद के साथ होली खेलती है। नवविवाहिताएं होली के दूसरे से गणगौर का पूजन करती हैं।''
-कृष्णा, चूरू
''होली के दूसरे दिन से ही नवविवाहिताएं गणगौर की पूजा शुरू कर देती है। होली पर्व को लेकर अभी से बाजार सजने लगे हंै। शहर में जगह-जगह चंग की थाप पर रसिये थिरकते हैं। वहीं घरों में भी महिलाएं नृत्य करती हैं।''
पूनम, चूरू
Published on:
22 Feb 2018 11:57 am
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