
खुदाई में मिले थे 18वीं सदी के कईं प्राचीन सिक्के
भंवरसिंह राजपूत
सादुलपुर. तहसील मुख्यालय की पूर्व दिशा में बीकानेर-दिल्ली रेलखण्ड स्थित गांव किरतान में प्राचीन सिक्के खुदाई के दौरान मिले थे। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि गांव काफी प्राचीन है। 1800 ईस्वी सम्वत के आस-पास सुलताना के ठाकुर हाथी सिंह ने किरतान पर चढ़ाई की थी, क्योंकि बीकानेर रियासत का आखिरी गांव था। इसलिए हरियाणा सीमा में मुस्लिम नवाब व शेखावाटी में हमेशा आक्रमण करते रहते थे। तभी हाथीराम सिंह ने किरतान पर आक्रमण किया तथा वर्तमान में गांव में स्थित मोक्षभूमि के आस-पास लड़ाई हुई। उसमें पुरान किरतान गांव संपूर्ण रूप से खत्म हो गया था। सुलताना की सेना भी खत्म हो गई थी। हाथीराम सिंह स्वयं घायल हो गए थे। किदवंति के अनुसार हाथीरामसिंह की समझदार घोड़ी ने पीठ के ऊपर घायल अवस्था में सुलताना ले गई, जहां उनकी मृत्यु हो गई। उसके बाद गांव खाली हो गया, तो भरीण्डा ने नाहर सिंह ने आकर 1810 ईस्वी संवत् में किरतान गांव की पुन: स्थापना की। इसके बाद गांव के मुख्य चौक में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों एवं त्योहारों को भाईचारे की भावना से मनाया। गणगौर की सवारी भी निकाली गई।
ओढ़ संहारक ठाकर हुकम सिंह
आजादी के बाद ओढ़ जाति के लोग पशुधन के साथ बीकानेर की तरफ आए। पशुओं को चराते हुए किसानों की फसल नष्ट कर दी। किरतान गांव के पास डेरा डाल दिया। गांव सरदारपुरा, बेवड़, भैंसली इत्यादि गांव के लोगों ने आकर बताया कि ओढ़ हमारे खेतों को चराते हुए गांव किरतान तक आ पहुंचे हैं। फसलों को नुकसान कर रहे हैं,लेकिन ओढ़ जाति के लोगों को हटाने के लिए कोई तैयार नहीं था। ऐसी स्थिति में हुकम सिंह ओढ़ के लोगों को ललकारा। ओढ़ जाति के नेता से लड़ाई लड़कर उसे मौत की घाट उतार दिया। बाद में ओढ़ जाति के लोग अपने पशु लेकर भाग गए।
खुदाई में मिले सिक्के
गांव के पूर्व दिशा में जसवंतसिंह राठौड़ के खेत में मिट्टी खोदकर लोग ईंट निकालते थे। खुदाई के दौरान ही एक पुराना कुआं निकला। यह कुआं अद्र्ध वृत्ताकार चार ईंटों से बना हुआ था। कुएं में नीचे उतरने के लिए ईंटों की सीढिय़ा बनी हुई थी। गांव के लोगों ने कुएं को खोदना चाहा एवं खुदाई शुरू की, तो 50 हाथ खोजने के बाद ईंट आनी बंद हो गई। पानी काफी गहरा होने से कुएं की खुदाई बंद कर दी। इसी दौरान प्राचीन सिक्के भी निकले थे। इसी खेत के पास नारायणसिंह राठौड़ का खेत है, जिसमें फसल बिजाई के दौरान मृद भाण्डों के अवशेष, लुहारों की भट्टियां, कोयले व सिक्के मिले थे। शिक्षक रामचंद्र सिंह ने बताया कि फसल बिजाई के दौरान जिसमें तांबे के सिक्के मिले। बहुत पुरान फारसी भाषा व जॉर्ज सवाईमानसिंह के समय के सिक्के आदि मिले, जिससे अनुमान है कि कभी गांव व्यापार का भी प्रमुख केंद्र रहा होगा।
गांव में थे दो ठाकुर
शिक्षक रामचंद्रसिंह ने बताया कि गांव के दो ठाकुर थे। दो गांव किरतान व बास किरतान की राजस्व भूमि उनके पास थी, लेकिन दोनों आपस में लड़ते थे। इसलिए बीकानेर दरबार ने तीन हजार बीघा अतिरिक्त भूमि दी। वहीं भूमि किरतान कहलाई। उन्होंने बताया कि गांव के लोग आज भी सुलतान गांव में रिश्ता नहीं करते हैं, क्योंकि सुलताना के ठाकुर ने गांव पर आक्रमण किया था।
Published on:
09 Nov 2020 10:40 am
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