
सीमेंट लगा कर जोड़ दी 84 साल की महिला की कूल्हे की हड्डी
चूरू. जिले के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान डेडराज भरतिया अस्पताल यानी डीबीएच में सप्ताह भर के भीतर ही दो जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न ( Medical Miracle) हुए। खास बात यह है कि डीबीएच में दोनों ही मामले जटिलताओं के मामले में अपनी तरह के पहला मामला हैं। इन शल्यक्रियाओं को सफलतापूर्वक अंजाम देने वाली टीम को साथी डॉक्टरों व प्रोफसरों ने भी बधाई दी है।
चूरू निवासी 82 साल की इंदिराकंवर ‘फ्रेक्चर नेक ऑफ फीवर’ यानी आम भाषा में कहें तो कूल्हे के जोड़ का गर्दन से टूट जाना नामक समस्या से पीडि़त थीं। यह मामला तीन वजहों से बेहद जटिल था। एक तो मरीज की उम्र अधिक थी। दूसरी हड्डी का ‘ऑस्टियोथोरोटिक होना’ (भुरभुरा या कमजोर होना) एक गंभीर जटिलता थी। इसके अलावा बर्षाइटिस यानी जोड़ पर से हड्डी खराब थी, जिसके कारण उपचार बेहद कठिन था। डीबीएच में जब हड्डी रोग विभाग के डॉक्टरों के सम्मुख यह मामला आया, तो उन्होंने इसे चुनौती की तरह लिया। डीबीएच के लिहाज से यह अपनी तरह का जटिलताओं से परिपूर्ण पहला मामला था, जिसे अस्पताल अपने स्तर पर ठीक करने की कोशिशों में जुटा था।
चिकित्सकों की टीम, जिसने कर दिखाया
हड्डी रोग के डॉ. प्रदीप शर्मा, डॉ. आनंद प्रकाश, डा. सुदर्शन आर्या और निश्चेतन विभाग के डॉ. दीपक चौधरी और डॉ. प्रमोद अग्रवाल की टीम ने यह चुनौती स्वीकार की। डॉक्टरों ने मरीज के कूल्हे की हड्डी का गोला बदल कर बोन सीमेंट का उपयोग करते हुए ऑपरेशन संपन्न किया। खास बात यह रही कि छह फरवरी को ऑपरेशन हुआ और सात फरवरी को मरीज वॉकर के सहारे चलने भी लगा।
कितना आया खर्च
डॉक्टर प्रदीप शर्मा की मानें, तो डीबीएच में ऑपरेशन के दौरान मरीज के परिजनों से सिर्फ कूल्हे की हड्डी का गोला जयपुर से मंगाया गया। कुल मिला कर ऑपरेशन में करीब दस हजार का खर्चा आने की संभावना है। वहीं अगर निजी अस्पताल में यह ऑपरेशन होता, तो 40 से 50 हजार तक खर्च हो सकता था।
युवक के कंधे का जटिल ऑपरेशन
सोमवार (10 फरवरी) को डॉ. प्रमोद अग्रवाल, डॉ. प्रदीप शर्मा, डॉ. विजयपाल कड़वासरा की टीम ने करीब तीन हफ्ते पुराने एक्सीडेंट के एक मामले में कंधे का टूटना (एसी जॉइंट डिसलोकेशन ग्रेड-4) के जटिल मामले का ऑपरेशन किया।
क्या हुआ था
लावंडा फतेहपुर निवासी युवक देवकीनंदन (30 वर्ष) कंधे के बल गिरा था, जिससे कंधे की हड्डी टूट कर जोड़ से बाहर निकल गई थी। उसका टूटा हुआ टुकड़ा हड्डी को वापस जोड़ में बैठने नहीं दे रहा था। उसे निकाल कर फाइबर टेप द्वारा हड्डी में छेद करके जोड़ में कस कर बैठाया गया। फाइबर टेप (तार जैसी शक्ल वाला), जिसकी अनुमानत: कीमत 5 हजार रुपए के करीब है, बाहर से मंगानी पड़ी। अब युवक ठीक है। करीब 4 से 5 दिन अस्पताल में भर्ती रहने के बाद उसे छुट्टी दे दी जाएगी। निजी अस्पताल में इलाज कराने पर मरीज को करीब 35 से 40 हजार रुपए का खर्च आने का अनुमान जताया जा रहा है।
अस्पताल में खुशी
पांच दिन में दो जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक होने से अस्पताल में खुशी का माहौल है। पीएमओ डॉ. गोगाराम, वरिष्ठ चिकित्सक एवं प्रोफेसर एफएच गौरी, उपअधीक्षक जेपी महायच सहित अन्य साथी डॉक्टरों ने दोनों ऑपरेशनों को अंजाम देने वाली टीम को बधाई दी है और उम्मीद जताई है कि अब डीबीएच भी जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देने में नई ऊंचाइयां हासिल करेगा।
Published on:
11 Feb 2020 12:31 pm
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