
चूरू. कड़ाके की सर्दी आम जीवन के साथ राष्ट्रीय पक्षी मोरों के लिए घातक साबित हो रही है। सर्दी के कारण निमोनिया संक्रमण से तालछापर अभयारण्य से सटे गांव रामपुर की रोही में पिछले दो दिन में 28 मोर की मौत हो गई है। ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग ने क्षेत्र के खेत और बीड़ में मोरों की तलाश के लिए अभियान चलाया है। टीम को लगातार मृत मोर मिल रहे हैं। शनिवार शाम वन विभाग की टीम को छापर व अभयारण्य के आसपास छह मोर गंभीर स्थिति में मिले। जिन्हेंं टीम रेस्कयू सेंटर लाया गया। यहां उपचार के दौरान इनमें से तीन मोरों की मौत हो गई। 3 का उपचार जारी है। इसके अलावा 19 कमेड़ी (डव) भी मृत मिली हैं। मृत मोरों का पशु चिकित्सकों का बोर्ड गठित कर पोस्टमार्टम करवाया गया। सुजानगढ़ के रेंजर विकास स्वामी ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामाने आया है कि सर्दी की वजह से मोर निमोनिया के शिकार हो गए। संक्रमण बढ़ने से इनकी मौत हो गई।
पेड़ से फड़फड़ाकर गिर रहे हैं नीचे
ग्रामीणों के अनुसार पेड़ पर बैठा मोर पेड़ से फड़फड़ाकर नीचे गिरता है। कुछ समय बाद ही उसकी मौत हो जाती है। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक शुक्रवार को क्षेत्र के खेतों व बीड़ में 23 मोर मृत मिले। 6 की हालत नाजुक थी। जिन्हें तालछापर अभयारण्य के रेस्कयू सेंटर लाया गया। इस बीच दो मोरों की उपचार के दौरान मौत हो गई। चार का उपचार कर उनकी जान बचाई गई। अब तीन मादा मोर की हालत में सुधार है। जबकि एक नर मोर की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है। कुल मृत मोरों में 19 मादा व 6 नर शामिल हैं। शनिवार को छह मोर और मिले। जिनमें से तीन की मौत हो गई। इस प्रकार मोरों की मौतों का आंकड़ा बढकर 28 हो गया है।
फैफड़ों में फैला संक्रमण
वन विभाग की टीम ने तीन पशु चिकित्सों के बोर्ड का गठन कर मृत नर व मादा मोरों का शनिवार को पोस्टमार्टम करवाया। बोर्ड में छापर पशु चिकित्सालय के डॉ प्रदीप सोनी, सांडवा से डॉ. गोविंद कारगवाल व सालासर से डॉ. सतीश शर्मा शामिल रहे। चिकित्सकों ने बताया कि मोरों के फैफड़ों में निमोनिया का संक्रमण फैलने के कारण इनकी मौत हुई है।
दहशत में ग्रामीण...दिनभर तलाश
मोर व कमेडि़यों की लगातार हो रही मौत से क्षेेत्र के ग्रामीण दहशत में हैं। ग्रामीण पिछले दो दिन से लगातार मोरों की तलाश में वन विभाग के अधिकारियों के साथ तलाश में जुटे हैं। गांव की रोही व खेतों में शुक्रवार को सबसे पहले मृत मोर दिनेश कालेर ने देखे। उन्होंने इसकी खबर गांव के अन्य लोगों की दी। इसके बाद कई ग्रामीण एकत्र हो गए। लोगाें ने मोरों के शव एकत्र कर वन विभाग के अधिकारियों को इसकी सूचना दी। इस बीच ग्रामीणों में पक्षियों में बीमारी फैलने की सूचना फैल गई। गांव के महेंद्रसिंह शेखावत ने बताया कि राष्ट्रीय पक्षी की इस तरह के मौत होना बड़ा सदमा दे रहा है। विकास पूनिया ने बताया कि मोर हमारे गांव की शोभा हैं। बड़ी संख्या में मोर यहां निवास करते हैं। अब इस तरह से इनकी मौत हो रही है तो पूरा गांव सदमे में है।
यह बैक्टिरिया करता है पक्षियों को संक्रमित
पशु चिकित्सा विज्ञान से जुडे विशेषज्ञों की मानें तो क्लैमाइडिया सिटासी एक प्रकार का बैक्टीरिया है जो अक्सर पक्षियों को संक्रमित करता है। जिसके चलते पक्षियों के फेंफड़ों में संक्रमण बढ जाता है। जिससे उन्हें निमोनिया हो जाता है। जिससे वे सिटाकोसिस नामक बीमारी का शिकार हो जाते हैं। समय पर संभाल नहीं होने के कारण उनकी मौत हो जाती है
इनका कहना है...
कड़ाके की सर्दी की वजह से मोरों के निमोनिया का संक्रमण हो गया। जिससे ये बीमार होकर मर गए।
डॉ. प्रदीप सोनी, पशु चिकित्सक, छापर
गांव रामपुर में शुक्रवार को कुल 29 मोर मिले। जिनमें से 23 की पहले मौत हो चुकी थी। छह की हालत नाजुक थी। जिन्हें रेस्कयू कर तालछापर अभयारण्य लाया गया। जिनमें से दो की उपचार के दौरान मौत गई। चार का उपचार जारी है। शनिवार को कुल छह मोर गंभीर हालत में मिले। जिनमें से तीन की उपचार करते समय मौत हो गई। तीन का इलाज जारी है। वहीं 19 डव भी मृत मिली। विभाग की टीम का छापर व आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान जारी है।
विकास स्वामी, क्षेत्रीय वन अधिकारी, सुजानगढ़
Published on:
03 Feb 2024 08:13 pm
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