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12 करोड़ 84 लाख की पार्थ सिटी योजना को लगा ग्रहण, बिखर रहा सपनों का घर

वर्ष 2013 के कांग्रेस शासन में चूरू जिला मुख्यालय पर शुरू की गई पार्थ सिटी को ग्रहण लग गया है। मकान लेने के लिए इच्छुक लोगों से रूपए लेकर मकान का ढांचा बनाकर छोड़ दिया गया है।

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12 करोड़ 84 लाख की पार्थ सिटी योजना को लगा ग्रहण, बिखर रहा सपनों का घर

12 करोड़ 84 लाख की पार्थ सिटी योजना को लगा ग्रहण, बिखर रहा सपनों का घर

चूरू. वर्ष 2013 के कांग्रेस शासन में चूरू जिला मुख्यालय पर शुरू की गई पार्थ सिटी को ग्रहण लग गया है। मकान लेने के लिए इच्छुक लोगों से रूपए लेकर मकान का ढांचा बनाकर छोड़ दिया गया है। लेकिन अभी तक इसका काम पूरा नहीं हो पाया है। ऐसे में लोगों को अब भी आशियाने की दरकार है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2013 में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार थी। गहलोत ने चूरू आगमन पर ही 28 मई को इसका शिलान्यास किया था। यह योजना 12 करोड़ 84 लाख रुपए की योजना थी। इस योजना के तहत एसएनजी ग्रुप की ओर से बनाया जा रहा था लेकिन इसका काम गति नहीं पकड़ पाया है।
मई 2015 में पूरा होना था काम
पार्थसिटी योजना के मुताबिक इसका काम मई 2015 में होना था लेकिन सात साल बीत जाने के बावजूद लोगों के आशियाने नहीं बन पाए।
नगरपरिषद की लापरवाही का दंश झेल रहे लोग
इस योजना को लेकर नगरपरिषद की जिम्मेदारी थी लेकिन परिषद प्रशासन की अनदेखी और एसएनजी ग्रुप की लापरवाही के चलते आज तक लोगों को फ्लैट नहीं मिल पाए। इस योजना पर काम दो साल में करना था और इसकी चाबी फ्लैटधारकों व मालिकों को देनी थी लेकिन आज भी इसका इंतजार बना हुआ है।
आखिर उपभोक्ताओं ने नगरपरिषद को थमाया नोटिस
12.84 करोड़ की प्रतिक्षित योजना को लाभ नहीं मिल पाने के कारण लोगों ने अब कानूनी सहायता ली है। इसके माध्यम से उन्होंने नगरपरिषद प्रशासन को नोटिस थमाया है। लोगों का आरोप है कि नगरपरिषद की कार्यशैली सही नहीं होने के कारण लोग इसका लाभ नहीं ले पा रहे हैं। नगरपरिषद को जारी किए गए कानूनी नोटिस में स्पष्ट उल्लेख किया है कि दो माह में इसका निर्माण पूरा कर चाबी संबंधित लोगों को सौंपी जाए। अन्यथा कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
352 लोगों ने किया था आवेदन
पार्थ सिटी में फ्लैट लेने के इच्छुक लोगों के लिए कैटेगरी तय की गई थी। इसके तहत 352 लोगों ने विभिन्न श्रेणियों में अपने आवेदन कर किश्तें जमा करवाई थीं। किश्त लेने के दौरान कुछ समय तक तो काम चला लेकिन बाद में एसएनजी ्रग्रुप प्रशासन ने इसकी सुध लेनी ही छोड़ थी और नगरपरिषद प्रशासन की ओर से भी इस पर ध्यान नहीं दिया गया। अधिवक्ता अनंतराम सोनी, रोहित सोनी, राहुल सोनी ने बताया कि संबंधित कम्पनी एसएनजी ग्रुप प्रा.लि. जयपुर, नगरपरिषद सभापति, आयुक्त तथा राजस्थान सरकार जरिये जिला कलक्टर, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को संबंधित कंपनी एवं नगर-परिषद को निर्माणकार्य में देरी संबंधित एवं फ्लैटो/घरों की चाबी/कब्जा अभी तक न दिये जाने के लिए दो माह का क़ानूनी नोटिस दिया गया है।
पहले यूं हुई देरी
अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम के तहत 30 सितंबर 2011 तक आवेदन लिए गए थे। बाद में 14 अगस्त 2012 को नगर परिषद, एसएनजी व आवास विकास लि. के बीच एग्रीमेंट हुआ। 28 फरवरी 2013 को लॉटरी निकालकर 352 आवेदकों के नाम तय किए गए। 19 दिसंबर 2013 में तीनों का साझा खाता खुलने में 10 माह की ढिलाई की वजह से काम शुरू होने में देरी हो गई।
एक नजर फ्लैट की रेट पर
श्रेणी संख्या रेट
ईडब्ल्यूएस 192 2.40
एलआईजी 096 3.75
एमआईजी 064 7.00
कुल 352 (नोट-फ्लैट की रेट पढ़ें लाख में।)

इनका कहना है
फर्म को इस संबंध में नोटिस दिया था। फर्म का कहना है की आवंटीधारी राशि जमा करवाते हैं तो वे मकान का निर्माण करवा सकते हैं। इस संबंध में आवंटीधारियों को नोटिस जारी करेंगे कि वे बकाया राशि जमा करवाएं ताकि पार्थ सिटी का निर्माण किया जा सके।
द्वारकाप्रसाद, आयुक्त, नगरपरिषद