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राजस्थान की इस मिठाई की दुबई तक धूम, बनाई जा रही 125 साल से

न केवल थळी-शेखावाटी बल्कि देश विदेश में सरदारशहर की फीणी एक लजीज मिष्ठान के रूप में प्रसिद्ध है। करीब 125 साल से पहले सरदारशहर के मिष्ठान कारिगरों की ओर से बनाई जानेवाली मिष्ठान मंजूषा फीणी मीठी हो या बिना चीणी लोगों को खूब भाती है।

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चूरू

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Kirti Verma

May 23, 2024

सरदारशहर। न केवल थळी-शेखावाटी बल्कि देश विदेश में सरदारशहर की फीणी एक लजीज मिष्ठान के रूप में प्रसिद्ध है। करीब 125 साल से पहले सरदारशहर के मिष्ठान कारिगरों की ओर से बनाई जानेवाली मिष्ठान मंजूषा फीणी मीठी हो या बिना चीणी लोगों को खूब भाती है।

शीतकालीन मौसम की विशेष मिठाई फीणी सरदारशहर के निवासी, प्रवासी और देशभर में रहनेवाले राजस्थानियों की पहली पसंद है तो मारवाड़ियों ने देश-विदेश में रहनेवाले लोगों को इसका रसास्वादन करवाया तो वे भी इसके मुरीद हो गए है तभी तो सर्दी के मौसम जिस भी मिष्ठान की दुकान पर देखों मो फीणी से सजी नजर आती है।

महीन तार में गूंथी मिठाई
हलवाईयों की ओर से महीन तार गूंथी मिठाई फीणी खाने में स्वादिष्ट है तो यह हल्की मिठाई मानी जाती है तो आसानी से पच जाती है तो बच्चों से लेकर वृद्ध तक इसका आसानी से सेवन कर सकते हैं। शरत ऋतु में दीपावली से बनना शुरू होने वाली फीणी सरदारशहर मे होली तक यह प्रचूर मात्रा बनती है तो यह यह खूब बिकती है।

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बनाने में लगती है काफी मेहनत
यहां फीणी बनानेवाले हलवाई बताते हैं कि सर्दी के मौसम में जब फीणी बनानी होती है तो पसीने आ जाते हैं। यहा एक नहीं अनेक हवाई फीणी बनाते हैं तो इनका कहना है कि इस मिष्ठान को बनाने में यदि कुछ ग्राम पानी अधिक और थोड़ा सा भी तापमान कम-ज्यादा हो जाए तो फीणी के तार ही बन सकते और यह बनने से पहले ही खराब हो जाती है।

मैदे से बनती है फीणी
फीणी बनानेवाले हलवाईयों का कहना है कि इस मिठाई को बनाने से पहले रात को मैदे को गूंदते है बाद में सुबह घी में गुंदाई की जाती है। इसी गूंदे हुए मैदे को कई बार लंबाई दी जाती है और गोल किया जाता है। यह इतना मेहनत का काम है कि फीणी बनाने के लिए कई प्रक्रियाओं के दौर से गुजरना पड़ता है फिर इसे तलकर सुखाया जाता है तब कही जाकर फीणी तैयार होती हैं।

सीजन में रोजना बनती है क्विंटलो फीणी
शरद ऋतु के दौरान आनेवाले सीजन में सरदारशहर में रोजाना पचास क्विंटल से अधिक फीणी तैयार की जाती है। यहां से आसाम, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना सहित विदेशों में फीणी की मांग रहती है और यहां दुबई आदि अरब देशों में फीणी का निर्यात किया जाता है।

समय अनुसार होते हैं भाव
सीजन के दौरान फीणी के भाव हर साल नवीनता लिए होते हैं लेकिन आमतौर पर चार सौ से पांच सौ रुपए प्रति किलों के भाव हुआ करते हैं। मकर संक्रांति पर घेवर के साथ यहां की फीणी की अत्यधिक मांग रहती है। फीणी भी देशी घी, केसर की फीणी, वनस्पति घी की फीणी बनती है। इसी अनुरूप इसके भाव होते हैं। सबसे कम रेट में वनस्पति घी की फीणी करीब दो सौ रुपए किलो तक मिल जाया करती है।

सरदारशहर का बड़ा कारोबार
मिष्ठान उद्योग की बात करें तो यह सरदारशहर का बड़ा कारोबार है, छोटे हलवाईयों या छोटी मिष्ठान की दुकानों से लेकर यहां कोई एक सौ से अधिक उद्यमी हलवाईयों के यहां फीणी बनाने का बड़ा कारोबार है। उद्यमी हलवाईयों, कारोबारियों के अलावा हजारों लोग इस कारोबार से जुड़े हैं। यह युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा और सशक्त माध्यम बनता जा रहा है।