
चूरू. Sudan crisis: सूडान से वतन लौटे चूरू तहसील के नाकरासर गांव के निवासी मोहन चोटिया ने आपबीती सुनाते हुए कहा कि वहां बहुत ही भयानक मंजर देखा। हर पल मौत का डर सता रहा था। गोलियों की आवाज जैसे ही कानों में पड़ती रूह कांप उठती। इस युुुद्ध से उपजे संकट के कारण हर दिन परेशान रहे। चोटिया ने बताया कि वे स्टील कंपनी में काम करते थे। सात दिन कमरे में ही कैदी की तरह बंद रहे। जब जाने का दिन नजदीक आया तो वहां पर आए लोगों ने कमरे में लूटपाट की। हमारे पास जो पैसा था वो छीन लिया, स्टील कंपनी की गाडिय़ा लेकर फरार हो गए। यही नहीं हमारे पास जो मोबाइल थे वो भी उन लोगों ने छीन लिया।
एक दिन तो ऐसा गुजरा की मौत भी पास से छूकर निकल गई। जैसे तैसे एयरपोर्ट पर पहुंचे। वहां से प्लेन से बुधवार रात को दिल्ली पहुंचे। गुरुवार को वे गांव आए हैं। उन्होंने बताया कि अब जान में जान आई है। वहां के हालात बहुत बुरे हैं। अब वहां जाने का मन भी नहीं करता।
कमरे में चाय बिस्कुट से चलाया काम
सूडान में सैनिक और अर्द्धसैनिक बलों के बीच छिड़ी जंग थमने का नाम ही नहीं ले रही है। इस जंग की दहशत के बीच वतन लौटे राजस्थान के भी कई लोग शामिल थे। जिसमें एक युवक रतनगढ़ का मुकेश दुलार भी था। उसने युद्ध के दौरान आपबीती सुनाते हुए कहा कि वहां बड़ी मुश्किल से खाने के इंतजाम हो रहे थे। एक तरह से कमरे में कैद होकर रह गए। युद्ध के दौरान बरसाई जा रही गोलियां भी दीवारों को छेदकर कमरे में आ रही थी। ऐसे में हर समय मौत का डर लग रहा था। हम लगातार भारतीय दूतावास के संपर्क में रहे। बसों की व्यवस्था करने की मांग की गई। कुछ दिनों के संघर्ष के बाद उन्हे उन्हे ये खुशी मिली और वतन वापसी की। सूडान में जिस कंपनी में काम कर रहे थे। वहां कंपनी ने पासपोर्ट तक नहीं दिया था। ऐसे में हमने तो वतन वापसी की आस ही छोड़ दी थी, लेकिन पर्याप्त मात्रा में उनके लोगों के पास डीजल था। इसके बाद भारतीय सेना ने हम तक पहुंचकर हमें सही सलामत वापस भारत पहुंचा दिया।
Published on:
28 Apr 2023 02:07 pm
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