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सिधमुख ऐसी नहर जिस पर चल रही वर्षों से राजनीति

सिधमुख नहर परियोजना जनप्रतिनिधियों की राजनीति का जरिया बन चुकी है। किसानों को पानी मिले। इससे किसी को सरोकार नहीं बल्कि उनकी राजनीति बस चलती रहनी चाहिए। वर्षों से सिधमुख नहर के साथ ऐसा ही तो होता आ रहा है। ऐसा ही इस बार भी हुआ।

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सिधमुख ऐसी नहर जिस पर चल रही वर्षों से राजनीति

चूरू. सिधमुख नहर परियोजना जनप्रतिनिधियों की राजनीति का जरिया बन चुकी है। किसानों को पानी मिले। इससे किसी को सरोकार नहीं बल्कि उनकी राजनीति बस चलती रहनी चाहिए। वर्षों से सिधमुख नहर के साथ ऐसा ही तो होता आ रहा है। ऐसा ही इस बार भी हुआ। नए रेगुलेशन को लेकर आयोजित की गई बैठक किसानों के सिधमुख नहर में निर्धारित पानी छोडऩा था। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया है। नई सरकार बनने के बाद क्षेत्र के लोगों को सिधमुख नहर परियोजना को पूरा करने एवं पर्याप्त पानी मिलने की आस थी। लेकिन पर्याप्त पानी नहीं मिलने से किसानों की आशाओं पर पानी फिर रहा है। सिधमुख नहर संघर्ष समिति के अनिल भीमसाणा, हरजीराम बिजारणियां, आशीष शर्मा, खेमचंद भांभू आदि ने बताया कि नए रेगुलेशन के दौरान बैठक में यह तय किया गया कि सिधमुख वितरीका के डाबड़ी भिरानी का पानी बीस जनवरी शाम छह बजे से 23 जनवरी तक तथा इससे आगे के गांवों को पन्द्रह जनवरी शाम छह से बीस जनवरी शाम छह बजे तक पानी मिलना था। लेकिन पांच दिन की बारी दो दिन में ही सिमट गई। 17 जनवरी की शाम को टेल तक पानी पहुंचना दूर वितरीका में पानी नजर नहीं आया। ऐसा ही हाल वितरीका से जुड़े पांच माइनरों का रहा। पदाधिकारियों ने बताया कि विभाग को शिकायत करने के बाद एक ही रटारटाया जवाब मिलता है कि जाब्ते की कमी एवं कर्मचारियों के अभाव के कारण पानी चोरी रोक पाना संभव नहीं है। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र के किसानों के साथ वादाखिलाफी हुई है तथा रेगुलेशन में किए वादे खोखले साबित हुए। समिति के संयोजक अशोक जांगिड़ ने कहा कि हर बार क्षेत्र के साथ हो रहे अन्याय को कब तक सहेंगे तथा यही हाल रहा तो किसानों को सड़कों पर उतरने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं है। पदाधिकारियों ने कहा कि जन प्रतिनिधि एवं प्रशासन सिधमुख नहर के मामले के प्रति गंभीर नहीं है। इसका खमियाजा उनको भुगतना पड़ेगा।

राजीव गांधी नहर परियोजना के नाम से जानते हैं
सिधमुख नहर परियोजना को वर्तमान में राजीव गांधी नहर परियोजना के नाम से जाना जाता है तथा भाखड़ा नांगल हैड से अलग कर पंजाब, हरियाणा में से नहर का निर्माण किया गया है। जिसका नाम सिधमुख फीडर रखा गया है तथा भादरा, नोहर, तारानगर, राजगढ़ आदि क्षेत्रों में हजारों हैक्टेयर भूमि को सिंचित करने के लिए नहर का निर्माण किया था। साठ वर्ष बीत जाने के बाद भी नहर के लिए चिह्नित सिधमुख क्षेत्र के 14 गांवों में पानी नहीं पहुंच पाया तथा वर्षों बीत गए।


नहर से जुड़े गांव
सिधमुख नहर परियोजना अन्तर्गत सादुलपुर तहसील के कुल 14 गांव नहर से जुड़े हुए हंै। जिनमें गालड़, रेजड़ी, टुण्डाखेड़ी, रामसरा ताल, रजपुरिया, ढाणी बड़ी, सादपुरा, सरदारपुरा, धोलिया, भीमसाणा, ताम्बाखेड़ी तथा सिधमुख आदि शामिल हैं।