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ताल छापर अभयारण्य में आया दुर्लभ उल्लू

चूरू. चूरू जिले के तालछापर अभयारण्य में लॉकडाउन के चलते वन्यजीव जंतु स्वच्छंद विचरण करते नजर आ रहे हैं।

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चूरू

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manish mishra

May 11, 2020

ताल छापर अभयारण्य में आया दुर्लभ उल्लू

ताल छापर अभयारण्य में आया दुर्लभ उल्लू

चूरू. चूरू जिले के तालछापर अभयारण्य में लॉकडाउन के चलते वन्यजीव जंतु स्वच्छंद विचरण करते नजर आ रहे हैं। ऐसे में अभयारण्य में सोमवार को दुर्लभ उल्लू दिखाई दिया है। ये दुर्लभ प्रजाति इण्डियन स्कोप्स आऊल के नाम से जाना जाता है। यह भारतीय उप-महाद्वीप का निवासी पक्षी है जो मुख्यतया भारत, पाकिस्तान, पूर्वी अरब तथा हिमालय के दक्षिण में पाया जाता है तथा दक्षिण ऐशिया का मूल निवासी है।प्रभारी क्षेत्रीय वन अधिकारी उमेश बागोतिया ने बताया कि यह एक रात्रिचर प्राणी है जो दिन के समय बहुत ही दुर्लभ दिखाई देता है। दिन के समय प्राय: यह सोता रहता है तथा जैसे ही शाम ढलती है यह पेड़ पर ऐसे स्थान पर आकर बैठ जाता है जिस के पास रोशनी हो। जब इस रोशनी के पास कीड़े -मकौड़े तथा छोटे चूहे आदि आते हंै तो यह उनका शिकार करता है। इसे शहर का भूत भी कहा जाता है क्योंकि इसे सिर्फ सुनाई देता है। यह बड़ी हीं धीमी मेंढक जैसी आवाज निकालता है।यह दिसम्बर माह में 3 से 5 अण्डे देता है। जिनसे लगभग 26 दिनों में बच्चे बाहर निकल आते हंै। इसकी सबसे बडी़ खासियत यह है कि यह अपनी प्रजाति में सबसे छोटा उल्लू है जो सामान्यत: 23-25 सेमी. लम्बा होता है। यह पेड़ के छेद में अथवा छाल में अपना घोसला बनाता है। सामान्यतया यह उल्लू उन जगहों पर ज्यादा मिलता है जहां पथरीली पहाडिय़ो के जंगल हो अथवा सपाट मैदान हो जहां पेड़ सघन हो। खुले घास के मैदानों में प्राय: यह कम देखने को मिलता है। सहायक वन संरक्षक प्रदीप चौधरी ने बताया कि तालछापर अभयारण्य कीं जैव विविधता के लिहाज से इसका यहां देखा जाना एक अच्छा संकेत है ।