4 मई 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

कॉलेज के धीमे निर्माण कार्य पर कंपनी प्रतिनिधियों व ठेकेदार को लगाई फटकार

जुलाई तक काम पूरा करने के दिए निर्देश

2 min read
Google source verification
churu medecal news

churu photo

चूरू.

राजस्थान पत्रिका में मेडिकल कॉलेज के धीमे निर्माणकार्य का मामला प्रकाशित होने के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है। पहले जयपुर स्थित चिकित्सा शिक्षा विभाग में कार्यकारी एजेंसी एचएससीएल, कॉलेज प्रशासन व निर्माणकार्ता कम्पनी पीएसपी के प्रतिनिधियों को बुलाकर स्थिति की समीक्षा की। इसके बाद विभाग के अतिरिक्त निदेशक बचनेश कुमार गुरुवार को चूरू पहुंचकर मेडिकल कॉलेज की स्थिति का अवलोकन किया। अतिरिक्त निदेशक ने निर्माण कार्य की धीमी प्रगति पर कार्यकारी एजेंसी एचएससीएल व पीएसपी कम्पनी के प्रतिनिधियों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि एक अगस्त से कक्षाएं शुरू हो जाएंगी। लेकिन अभी तक कक्षा-कक्ष तैयार नहीं हो पाए। एक अगस्त तक हरहाल में काम पूरा होना चाहिए। विद्यार्थी अब आने लगेंगे वे कहां बैठेंगे कहां रहेंगे इसकी किसी को चिंता नहीं है। कामकाज को लेकर स्टाफ से भी चर्चा की और

अस्पताल में उपकरण खरीदने के निर्देश दिए।
एचएससीएल के जोनल हैड मनोज कुमार, इंजीनियर अजय कुमार व निर्माणकर्ता कम्पनी के एमडी आरएस यादव भी मौजूद थे। इस मौके पर कार्यवाहक प्रिंसिपल डा. शरद जैन, अधीक्षक डा. जेएन खत्री, प्रोफेसर गजेन्द्र सक्सेना, डा. जेपी चौधरी आदि मौजूद थे। बाद में जोनल हैड कुमार ने अलग से मीटिंग लेकर एक अगस्त से पहले काम पूरा करने की रणनीति पर चर्चा की।

139 करोड़ में करना होगा कार्य
जानकारी के मुताबिक एचएससीएल को १३९ करोड़ रूपए में निर्माणकार्य पूरा करना होगा। विभाग अब तक एचएससीएल को ९४ करोड़ रुपए दे चुका है। वहीं एचएससीएल ने निर्माणकर्ता कम्पनी पीएसपी को अब तक ४७ करोड़ रुपए ही दिया है। निर्माणकार्य में २५० के आस-पास मजदूर काम कर रहे हैं। लेकिन काम की गति तेज नहीं की गई तो एक अगस्त से पहले कक्षा-कक्षों का तैयार होना मुश्किल है। चूंकि अभी तक कक्षाकक्षों में फालसिलिंग, लाइट व फर्नीचर का काम बाकी है।

पत्रिका ने बताई हकीकत
गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिका ने २१ जून के अंक में 'दो दिन बाद आने लगेंगे छात्र, तैयार नहीं हुआ मेडिकल कॉलेजÓ शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर कॉलेज निर्माण की हकीकत उजागर की थी। इसके बाद विभाग ने कालेज निर्माण की गति देने के लिए कवायद तेज कर दी है।