
नरेंद्र शर्मा
चूरू. संस्कृत शिक्षा के सुदृढ़ संचालन के लिए बनाई गई नई प्रशासनिक व्यवस्था अभी तक ज़मीन पर उतरती नजर नहीं आ रही है। वर्ष 2025 में चूरू, सीकर और झुंझुनूं को मिलाकर बनाए गए मण्डल का कार्यालय आज भी शुरू नहीं हो सका है, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है। एक समय प्रदेश में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अलग विभाग स्थापित कर विद्यालयों के साथ-साथ प्रशासनिक कार्यालय भी संचालित किए जाते थे। चूरू में भी संभागीय कार्यालय कार्यरत था, लेकिन पूर्व सरकार ने इसे बीकानेर स्थानांतरित कर दिया। इसके बाद नई सरकार बनने पर कार्यालय की वापसी की उम्मीद जगी, मगर यह पूरी नहीं हो सकी।
हालांकि सरकार ने प्रदेशभर में संस्कृत शिक्षा के सुचारू संचालन के लिए 9 मण्डलों का गठन किया, जिनमें चूरू, सीकर और झुंझुनूं को एक मण्डल बनाया गया। इस निर्णय से शिक्षकों और विद्यार्थियों में उत्साह बढ़ा, लेकिन मण्डल कार्यालय शुरू नहीं होने से यह पहल अधूरी ही रह गई है।
अभी बीकानेर से हो रहा संचालन
संस्कृत शिक्षा विभाग (Sanskrit Education Department) ने प्रशासनिक पुनर्गठन के तहत जयपुर, जोधपुर, भरतपुर, अजमेर, बीकानेर, उदयपुर, कोटा, चूरू और पाली मण्डल बनाए। जनवरी 2025 के आदेश में स्पष्ट किया गया था कि चूरू मण्डल का कार्य तब तक बीकानेर संभाग कार्यालय से संचालित होगा, जब तक नए पदों का सृजन और कार्यालय स्थापना नहीं हो जाती। साथ ही जिला मुख्यालय पर वरिष्ठ उपाध्याय विद्यालय के प्रधानाचार्य को नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई। लेकिन अब तक स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
चूरू में उपलब्ध है भवन, फिर भी उपेक्षा
चूरू जिला मुख्यालय पर भामाशाह नेमीचंद तोषनीवाल द्वारा संस्कृत शिक्षा संभाग कार्यालय के लिए भवन बनवाया गया था। जब कार्यालय को बीकानेर स्थानांतरित किया गया, तब इस पर आपत्ति भी जताई गई। वर्ष 2023 से अब तक समाजसेवी तोषनीवाल द्वारा मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को कई बार पत्र लिखकर कार्यालय को वापस चूरू लाने की मांग की गई, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। वर्तमान में इस भवन में माध्यमिक शिक्षा विभाग का कार्यालय संचालित हो रहा है।
एक्सपर्ट व्यू
संस्कृत शिक्षा को सशक्त बनाने के उद्देश्य से किए गए प्रशासनिक बदलाव तब तक सार्थक नहीं होंगे, जब तक मण्डल स्तर पर कार्यालय स्थापित कर व्यवस्थाएं पूरी तरह लागू नहीं की जातीं। फिलहाल चूरू मण्डल का कार्यालय शुरू किया जाना विभाग की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। अशोक तिवाड़ी, प्रदेश अध्यक्ष, राजस्थान संस्कृत शिक्षा विभागीय संघ
इनका कहना है
- संस्कृत शिक्षा के लिए विडम्बनापूर्ण स्थिति है कि अभी तक कार्यालय नहीं खोला जा रहा है। इससे विद्यार्थियों और शिक्षाकर्मियों को बड़ी निराशा हुई है। जबकि विभाग को अपनी नीति के अनुरूप कार्ययोजना लागू कर उसे धरातल पर उतारना चाहिए। अनिल भारद्वाज, मण्डल अध्यक्ष राजस्थान संस्कृत शिक्षा विभागीय संघ सीकर
Published on:
07 Apr 2026 11:18 am
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