
CHURU NEWS- बहुत कुछ बोल रही है ये तस्वीर: लंपी रोग से मृत हुए पशुओं को नोच रहे कुत्ते
आखिर कब करेंगे प्रॉटोकॉल का पालन: कागजों में निर्देश, धरातल पर एकदम उलट
चूरू. लंपी रोग से मौत का शिकार हुए गोवंश की बेकद्री कितनी है। ये तस्वीर इसकी बानगी है। मौत के बाद में भी इस गोवंश को चेन नहीं है। हालात तो ऐसे हैं कि इनको कुत्ते नोच रहे हैं। लंपी रोग ग्रस्त होकर मौत का शिकार हुए इन गोवंश को जमीन में गाड़ा भी नहीं जा रहा है। इस फोटो को देखकर हर किसी की आंखें खुली की खुल रह जाए। लेकिन प्रशासन इतना सबकुछ होने के बावजूद मौन है। सरकार की ओर से आदेश दिए जाने के बावजूद इनको दफनाया नहीं जा रहा है। बदबू ने उसके आस-पास के क्षेत्र के हालात ऐसे कर दिए हैं कि लोगों का जीना दूभर हो गया है। हालांकि नगरपरिषद की ओर से खुले मृत पड़े गोवंश को गढ्डों में दफनाने के आदेश जारी किए हैं लेकिन ये केवल आदेश ही है। अभी तक इन पशुओं को नहीं दफनाया गया।
क्या कहता है प्रोटोकॉल
पशुपालन विभाग के अधिकारियों की मानें तो लंपी रोग से ग्रस्त यदि किसी पशु की मौत हो जाती है तो उसे आबादी क्षेत्र से दूर ले जाना चाहिए। फिर वहां पर उसके लिए डेढ-दो मीटर का गढडा खोदकर मृत पशु को उसमें डाला जाए और इसके बाद उस पर नमक और चूना डालकर मिटटी डाली जाए। लेकिन चूूरू जिले में ऐसा कहीं भी देखने को नजर नहीं आ रहा है।
सांसद बोले, कागजों में बहुत कुछ धरातल पर नहीं
सांसद राहुल कस्वा शुक्रवार को पशुओं में फैले लंपी रोग को लेकर केन्द्रीय जांच दल के साथ चूरू आए। इस चिकित्सकों के दल के साथ उन्होंने आदर्श विद्या मंदिर की गोशाला का निरीक्षण किया। टीम में लाइफ स्टॉक अधिकारी डॉ सुनील कुमार सिंह गाजुवास, बीकानेर से डॉ जेपी कच्छावा, डॉ मनीष महरा, डॉ ब्रजनन्दन श्रृंगी व हिसार के डॉ रमेश कुमार शामिल थे। टीम ने गोशाला संचालक विश्वनाथ चौधरी से गायों के इलाज के लिए जानकारी प्राप्त की। इस दौरा सांसद ने लंपी रोग को लेकर किए जा रहे प्रयासों के बारे में पूछा। उन्होंने जब जानकारी दी तो सांसद ने कहा कि ये काम तो केवल कागजों में हो रहे हैं। धरातल पर कुछ और ही स्थिति है। हालात तो ऐसे हैं कि पशुपालक निजी चिकित्सकों से उपचार करवाने को मजबूर है। इस दौरान गोशाला में चिकित्सकों की टीम ने संक्रमित, कम संक्रमित गायों को देखकर आश्चर्य किया। उन्होंने गोसेवा समिति के पदाधिकारियों को इन गायों को अलग-अलग रखने के निर्देश दिए। उन्होंने गायों की सेवा करने वालों को कहीं पर भ्रमण नहीं करने की हिदायत दी। इस टीम ने दूधवाखारा, रतनपुरा की गोशाला में भी निरीक्षण कर व्यवस्थाएं देखी। टीम ने इस बीमारी की जांच के लिए सैंपल भी लिए। उन्होंने इस वायरस को गंभीरता से लेने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि संक्रमण रोकने के हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए। इस मौके पर जिला प्रमुख वंदना आर्य, ओम सारस्वत, नरेंद्र काछवाल, दीन दयाल सैनी, मोहनलाल आर्य, धर्मेंद्र श्योराण, विनोद सैनी, राजीव शर्मा, राकेश तलनिया, संकुल प्रमुख किशनलाल सैनी, पशुपालन विभाग के डॉ अशोक कुमार शर्मा, डॉ निरंजन चिराणिया, डा.विक्रम सिंह, नोडल अधिकारी डॉ सुनील मेहरा व सुधाकर सहल व ओमप्रकाश तंवर योगेश ढाका आदि मौजूद रहे।
Published on:
03 Sept 2022 01:00 pm
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