बदलते वक्त के साथ-साथ हमारी सोच और व्यवहार में आया है बदलाव
चूरू. सरदारशहर. मदर्स डे पर हर कोई अपने अपने तरह से मां को याद कर रहा है, मां के सम्मान में इस दिन को सेलिब्रेट कर रहा है। लेकिन कहीं ना कहीं बदलते वक्त के साथ-साथ आज हमारी सोच में भी बदलाव आया है। मदर्स डे पर आज हम आपको सरदारशहर के श्रवण कुमार से मिलाने जा रहे हैं जो इस कलयुग में अपनी माता की सेवा कर एक अलग उदाहरण पेश कर रहे हैं। यूं तो मदर्स डे पर हर किसी को अपनी माता याद आ जाती है और सोशल मीडिया के जरिए माताओं को शुभकामनाएं देकर सेलिब्रेट लोग कर लेते हैं, लेकिन जब बात बूढे हो चुके मां बाप की सेवा करने की आती है तो हर कोई अपनी जिम्मेदारियों से दूर भागते हैं, लेकिन सरदारशहर का झिकनाडिया परिवार इस मामले अलग ही है। दरअसल झिकनाडिय़ा परिवार की 65 वर्षीय चंदादेवी पिछले 17 सालों से (पैरालाइज) लकवे का शिकार है। जिसके चलते वह चलने फिरने उठने बैठने में असमर्थ है, ऐसे में पिछले 17 सालों से लगातार उनके तीन बेटे उनकी दिन-रात सेवा कर रहे हैं। जैसी भी चंदादेवी की इच्छा होती है उसी के अनुरूप उनके तीनों पुत्र काम करते हैं। इस सेवा के काम में उनकी तीनों पुत्र वधुएं भी बखूबी अपना कर्तव्य निभा रही है।
17 सालों से चलने- फिरने में असमर्थ चंदा देवी
सरदारशहर के गणेश नगर में रहने वाली 65 वर्षीय चंदा देवी ने बताया कि वे पिछले 17 सालों से चलने फिरने में असमर्थ हैं। नहाने से लेकर हर काम उनके तीनों बेटे व उनकी पुत्र वधुएं करती है। उन्होंने बताया कि मेरे लक्ष्मीनारायण, सत्यनारायण और रामस्वरूप तीन बेटे तथा तीन पुत्रवधु उर्मिला देवी, मधु देवी व हेमलता देवी हैं। काम के सिलसिले में अब बड़ा बेटा सूरत में काम करता है जबकि दो छोटे बेटे हैं। वह उनके पास रहकर उनकी सेवा कर रहे हैं। ऐसे में वह अपने तीनों पुत्रों को पाकर बेहद
खुश हैं। नगरपालिका अध्यक्ष राजकरण चौधरी ने बताया कि जिस प्रकार से आज के समय में पुत्र अपने माता पिता के साथ नेगेटिव व्यवहार करते हैं वही उसके विपरीत सरदारशहर का झिकनाडिया परिवार एक आदर्श मिसाल पेश कर रहा है। इस परिवार से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। वे भी एक बार उनके घर गए थे तब इनके तीनों पुत्र और पुत्र वधू अपनी माता की सेवा कर रहे थे। यह वाकई में सराहनीय है। इसका हर बेटों को अनुसरण करना चाहिए।