8 फ़रवरी 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Asia Cup 2023: भारत समेत मात्र तीन टीमों ने जीता है खिताब, पढ़ें एशिया कप का इतिहास और आंकड़े

पाकिस्तान ने पिछली बार 2008 में मेजबानी की थी। 15 साल के बाद उसकी जमीन पर एशिया कप के मैच खेले जाएंगे। पिछली बार जब पाकिस्तान ने मेजबानी की थी तब श्रीलंका ने कराची में भारत को हराकर खिताब पर कब्जा किया था। एशिया कप के इतिहास में अबतक तीन टीमें ही खिताब जीत पाई हैं।

3 min read
Google source verification
asia_cup_2023.png

Asia Cup 202 history and records: एशिया कप 2023 का आयोजन 30 अगस्त से 17 सितंबर के बीच किया जाएगा। इस साल इस टूर्नामेंट का आयोजन हाइब्रिड मॉडल के तहत होगा। पाकिस्तान में 4 जबकि श्रीलंका में 9 मैच होंगे। भारत ने सुरक्षा कारणों से पाकिस्तान में खेलने से मना कर दिया था, जिसके बाद हाइब्रिड मॉडल अपनाने का फैसला किया गया।

पाकिस्तान ने पिछली बार 2008 में मेजबानी की थी। 15 साल के बाद उसकी जमीन पर एशिया कप के मैच खेले जाएंगे। पिछली बार जब पाकिस्तान ने मेजबानी की थी तब श्रीलंका ने कराची में भारत को हराकर खिताब पर कब्जा किया था। एशिया कप के इतिहास में अबतक तीन टीमें ही खिताब जीत पाई हैं। भारत सबसे ज्यादा सात बार चैंपियन बना है। वहीं, श्रीलंका ने छह बार खिताब अपने नाम किया। पाकिस्तान दो बार ट्रॉफी उठाने में सफल रहा। इन तीनों के अलावा बांग्लादेश ही एक ऐसी टीम है जो फाइनल में पहुंचने के बाद भी चैंपियन नहीं बनी है। अफगानिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात और हॉन्ग कॉन्ग की टीमें फाइनल में नहीं पहुंच पाई हैं। नेपाल पहली बार इस टूर्नामेंट में खेलेगा।





































































































साल मेजबान विजेता उप-विजेता
1984यूएईभारतश्रीलंका
1986श्रीलंकाश्रीलंकापाकिस्तान
1988बांग्लादेशभारतश्रीलंका
1990-91भारतभारतश्रीलंका
1995यूएईभारतश्रीलंका
1997श्रीलंकाश्रीलंकाभारत
2000बांग्लादेशपाकिस्तानश्रीलंका
2004श्रीलंकाश्रीलंकाभारत
2008पाकिस्तानश्रीलंकाभारत
2010श्रीलंकाभारतश्रीलंका
2012बांग्लादेशपाकिस्तानबांग्लादेश
2014बांग्लादेशश्रीलंकापाकिस्तान
2016बांग्लादेशभारतबांग्लादेश
2018यूएईभारतबांग्लादेश
2022यूएईश्रीलंकापाकिस्तान


1984 से 2014 तक 12 बार इस टूर्नामेंट का आयोजन वनडे फॉर्मेट में हुआ। 2016 में पहली बार टी20 प्रारूप में मैच खेले गए थे। उसके बाद 2022 में भी टी20 फॉर्मेट में ही टूर्नामेंट का आयोजन हुआ। अब तक 15 में से 13 संस्करण वनडे और दो टी20 प्रारूप में हुए हैं।

कैसे हुई इस टूर्नामेंट की शुरुआत -
भारत ने 1983 में कपिल देव की कप्तानी में वर्ल्ड कप जीता और विश्व क्रिकेट में अपना नाम बुलंद किया। इसके ठीक एक साथ बाद 1984 में एशिया कप की शुरुआत हुई। दरअसल 25 जून 1983 को भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेले गए वर्ल्ड कप फ़ाइनल में तत्कालीन बीसीसीआई अध्यक्ष एनकेपी साल्वे को मैदान में एंट्री नहीं मिली थी। साल्वे या मैच स्टैंड से देखना चाहते थे और उनके पास स्टेडियम पास नहीं था। जब किसी देश की टीम पहली बार वर्ल्ड कप फ़ाइनल खेल रही हो और उनके बोर्ड के अध्यक्ष के साथ ऐसा वरताव हो तो ज़हीर है गुस्सा तो आयेगा।

साल्वे को यह बात नागवार गुजरी और वो गुस्से से भर गए। मगर उन्होंने अपना गुस्सा कुछ अलग अंदाज में जाहिर किया। साल्वे ने यह ठान लिया कि अब वो वर्ल्ड कप को इंग्लैंड से बाहर निकालकर ही रहेंगे। इंग्लैंड तब क्रिकेट का सुपरपावर था और यह काम इतना आसान भी नहीं था और यह बात साल्वे अच्छी तरह से जानते थे।

लेकिन साल्वे की इस ज़िद में उनका साथ पाकिस्तान ने दिया। इसके लिए साल्वे ने पूरा जोर लगाया, उन्होंने तब पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के अध्यक्ष रहे नूर खान से बात की और उन्हें अपने साथ मिला लिया। इसके बाद श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड (SLC) के हेड गामिनी दिसानायके भी साथ आ गए और 19 सितंबर 1983 को नई दिल्ली में एशियन क्रिकेट कॉन्फ्रेंस (ACC) का गठन किया गया। जो अब एशियन क्रिकेट काउंसिल के नाम से जाना जाता है।

एसीसी में भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका के अलावा इस संस्था में बांग्लादेश, मलेशिया और सिंगापुर को भी शामिल किया गया। एसीसी के गठन के पीछे आईसीसी को चुनौती देना था। इस टूर्नामेंट में सिर्फ एशियाई टीमों को ही खेलने की अनुमति थी। एशिया कप का पहला सीजन 1984 में कराया गया। यह पहला सीजन वनडे फॉर्मेट में खेला गया, जिसकी मेजबानी UAE ने की। इस सीजन का खिताब भारत ने जीता।