
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड पर पूंजी से संबंधित एक नया विवाद गहराता दिख रहा है। भारतीय क्रिकटे कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) पर यह आरोप लगा है कि बोर्ड ने एक पदाधिकारी को बिना कोई काम किए 43.20 लाख रूपए का भुगतान किया है। बोर्ड ने टीम इंडिया के पूर्व चयनकर्ता जतिन परांजपे को पिछले महीने 43.20 लाख रुपए का भुगतान किया। बोर्ड ने परांजपे को यह पैसा फरवरी से सितंबर 2027 तक के पेशेवर शुल्क के रूप में दिया है। जबकि इस दौरान जतिन परांजपे चयनकर्ता नहीं थे। बता दें कि परांजपे को लोढा समिति की सिफारिशों के चलते जनवरी 2017 में ही पद से हटना पड़ा था।
अधिकारी का मानना परांजपे की कोई गलती नहीं
बीसीसीआई ने अपनी वेबसाइट पर 25 लाख रुपये से अधिक के भुगतान का जिक्र किया है। इसमें परांजपे को किया गया भुगतान भी शामिल है। बोर्ड के एक अधिकारी ने इस मामले पर गोपनीयता की शर्त पर कहा कि हां, परांजपे को इस दौर के लिये पेशेवर शुल्क के रूप में 43.20 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। इसका कारण यह था कि एक चयनकर्ता का अनुबंध हर वर्ष सितंबर तक होता है। अधिकारी का कहना है कि सलेक्शन पैनल से हटने में परांजपे की कोई गलती नहीं थी। बोर्ड ने उनके साथ जितने दिनों का करार किया था, उसी के अनुरूप परांजपे को भुगतान किया गया है। कारण कि इस मामले में उनकी जीविका प्रभावित होती।
लोढा समिति की सिफारिश बनी थी हटने का आधार
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित लोढा समिति की सिफारिशों में राष्ट्रीय चयनकर्ता बनने की अनिवार्य अर्हता में संबंधित व्यक्ति का टेस्ट खिलाड़ी होना अनिवार्य था। मतलब यह कि भारतीय क्रिेकेट टीम का चयनकर्ता वहीं बन सकता है, जिसने पूर्व में भारतीय क्रिकेट टीम की ओर से टेस्ट मैच खेला हो। इस सिफारिश के लागू होने के बाद परांजपे और गगन खोड़ा को चयन पैनल से हटना पड़ा था।
Published on:
12 Jan 2018 11:07 am
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