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पैदल घर जा रहे मजदूरों को खाना खिला रहे हैं KXIP के क्रिकेटर Tajinder Singh Dhillon, पूरा इलाका आया साथ

KXIP के क्रिकेटर Tajinder Singh Dhillon राजस्थान के रहने वाले हैं। वह पैदल घर लौट रहे मजदूरों को खाना खिला रहे हैं। अब तक 10 हजार मजदूरों को खाना खिला चुके हैं।

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Tajinder Singh Dhillon

Tajinder Singh Dhillon

नई दिल्ली : कोरोना वायरस (Coronavirus) महामारी के कारण भारत में सबसे ज्यादा दुर्गति मजदूरों को झेलनी पड़ी है। भारत में लॉकडाउन (Lockdown in India) की वजह से उनका काम छूट गया है और उनके पास पैसा भी नहीं है। इतना ही नहीं, घर वापस लौटने का उनके पास साधन भी नहीं है। इस कारण भूख से बिलबिला रहे अधिकतर मजदूर पैदल ही अपने गांव जा रहे हैं। वह अपने पूरे परिवार, बूढ़े, बच्चे और बीमार सदस्यों के साथ हजारों किलोमीटर की यात्रा कर अपने घर पहुंच रहे हैं। वह 40 डिग्री से ज्यादा तापमान को झेल रहे हैं। तपती धूप, लू और आंधी-बारिश के बीच सफर तय कर अपने घरों को जा रहे हैं। रास्ते में कई-कई दिन उन्हें खाना और पानी भी नसीब नहीं होता है। इसके बावजूद उनके पास कोई चारा नहीं है। ऐसे में मजदूरों के लिए मसीहा बनकर आए हैं इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की फ्रेंचाइजी टीम किंग्स इलेवन पंजाब (KXIP) के क्रिकेटर ताजिंदर सिंह ढिल्लों (Tajinder Singh Dhillon)। वह गांव लौट रहे करीब 10,000 मजदूरों को खाना-पानी मुहैया करा चुके हैं और अब भी उनकी यह सेवा जारी है।

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दोस्तों के साथ सड़क पर उतरे

ताजिंदर राजस्थान के रहने वाले हैं। 27 साल के ताजिंदर को जब समाचार माध्यमों से पता चला कि कानपुर की तरफ जाने वाला वह राजमार्ग उनके घर से महज 100 किलोमीटर दूर है, जिसका इस्तेमाल मजदूर अपने घर जाने के लिए कर रहे हैं। इनमें से कई मजदूरों के पास इस धधकती गर्मी में पांव में चप्पल भी नहीं है। इसके बाद ताजिंदर ने अपने परिजनों से बात की और कहा कि उन्हें इन प्रवासी मजदूरों की मदद करनी चाहिए। इसके बाद उन्होंने उस क्षेत्र में रहने वाले अपने दोस्तों से बात की और प्रवासी मजदूरों तक भोजन-पानी पहुंचाने की योजना बनाई। किंग्स इलेवन पंजाब की वेबसाइट के अनुसार, इसके बाद ताजिंदर ने उन तक भोजन-पानी पहुंचाई।

ऐसे किया इंतजाम

ताजिंदर इसके बाद उस राजमार्ग के आसपास के अन्य लोगों के पास भी मदद के लिए गए, ताकि प्रवासी मजदूरों के लिए सब्जी-रोटी बनाई जा सके। ताजिंदर ने बताया कि उनके क्षेत्र में एक व्यक्ति सब्जी का बिजनेस करता है। उन्होंने उस व्यक्ति से सब्जी बनाने के लिए बड़ी मात्रा में आलू देने के लिए कहा। इसके अलावा 50 किलो आटा भी जुटाया। इसके बाद इन सामग्रियों को कालोनी के कई घरों में बांट दिया, ताकि वे उसकी रोटी बना सकें। इसके बाद पहले दिन बांटने के लिए हमारे पास करीब 1400 रोटियां और पूड़ी जमा हो गई।

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अगले दिन से बढ़ गई संख्या

ताजिंदर ने बताया कि पुलिसकर्मी भीड़ को नियंत्रित कर रहे थे और वह तथा उनके साथियों ने प्रवासी मजदूरों में खाना बांटा। ताजिंदर ने बताया कि पहले दिन हमने करीब 1000 मजदूरों को भोजन कराया। अगले दिन से यह संख्या बढ़ने लगी। दो दिनों में संख्या 5000 तक पहुंच गई। ताजिंदर ने बताया कि इनमें कई बच्चे और बूढ़े भी शामिल थे। ताजिंदर ने बताया कि उनकी टीम ने आलू-पूरी के अलावा दूध और शरबत भी दिया। बता दें कि ताजिंदर मजदूरों के बीच करीब एक हफ्ते से खाना-पानी बांट रहे हैं।