
नई दिल्ली : विश्व कप के बाद से ही अनफिट चल रहे भुवनेश्वर कुमार तीन महीने से भी ज्यादा समय एनसीए में बिताने के बाद दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी-20 सीरीज में वापसी की थी और अब वह एक बार फिर वह अस्वस्थ हो गए हैं। इसके बाद से बेंगलूरु के एनसीए में काम कर रहे विशेषज्ञों की योग्यता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। क्योंकि उनकी क्लीन चिट के बाद ही भुवनेश्वर को राष्ट्रीय टीम में शामिल किया गया था और महज तीन टी-20 मैच खेलते ही उनकी बीमारी फिर उभर आई। इसके बाद अब एक और बड़ी खबर यह आ रही है कि हार्दिक पांड्या और जसप्रीत बुमराह ने भी पुनर्वास के लिए एनसीए जाने से मना कर दिया है।
भुवनेश्वर को है हार्निया की शिकायत
भुवनेश्वर को हार्निया की शिकायत बताई जाती है। इसी कारण वह विश्व कप के बाद से पुनर्वास के लिए एनसीए में थे। टीम मैनेजमेंट की कोशिश थी कि वह जब शत-प्रतिशत फिट हो जाएं, तब उन्हें टीम इंडिया में शामिल किया जाए। लेकिन एनसीए की मेडिकल टीम उनकी चोट को समझ पाने में विफल रही। यही कारण है कि राष्ट्रीय टीम के साथ महज तीन टी-20 खेल वह एक बार फिर अस्वस्थ हो गए। एक अधिकारी ने बताया कि वह 3 महीने तक एनसीए में थे। वहां उनके न जाने कितने टेस्ट हुए। उनकी सारी जांचे की गई थी। इसके बाद भी उनकी हार्निया की परेशानी दूर नहीं हुई। एनसीए की टीम ने उन्हें स्वस्थ घोषित कर दिया और जैसे ही मुंबई में दोबारा उनकी जांच की गई तो यह मामला सामने आ गया। अब वह सर्जरी कराएंगे और आईपीएल तक ही वापसी कर पाएंगे।
पहले केस नहीं हैं भुवनेश्वर
अधिकारी ने बताया कि भुवनेश्वर पहले खिलाड़ी नहीं हैं। जिनके साथ एनसीए में इस तरह की परेशानी आई है। वृद्धिमान साहा का भी उदाहरण हमारे सामने है। उनकी पुरानी चोट पूरी तरह ठीक नहीं हुई थी। इस कारण वह न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में नहीं खेल पाएंगे।
पांड्या और बुमराह ने किया मना
बीसीसीआई अधिकारी ने कहा कि प्रोटोकॉल के मुताबिक, अनुबंधित खिलाड़ियों को पुनर्वास के लिए एनसीए जाना पड़ता है, लेकिन पांड्या और बुमराह ने साफ कर दिया है कि वह बेंगलूरु नहीं जाएंगे। इस वजह से योगेश परमार की निगरानी में हार्दिक पांड्या हैं और नितिन पटेल बुमराह की देख-रेख कर रहे हैं। अधिकारी ने कहा कि ये दोनों अनुबंधित खिलाड़ी हैं। उन्हें एनसीए में होना चाहिए था, लेकिन वहां जोखिम ज्यादा है और खिलाड़ी चोट गंभीर। इसलिए एक समय के बाद बोर्ड को यह आजादी देनी पड़ती है कि खिलाड़ी अपने हित में फैसले ले सके।
Updated on:
15 Dec 2019 07:58 am
Published on:
14 Dec 2019 06:14 pm
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